CISCE के रिजल्ट्स में लखनऊ के मेधावियों ने शानदार प्रदर्शन किया है। बारहवीं (ISC) के नतीजों में 99.75% स्कोर करने वाले टॉप 6 में से 5 स्थान बेटियों ने हासिल किए हैं। इनमें CMS की ओहसीन अग्रवाल, छवि मिश्रा, संस्कृति चंदेल और जैनब फातिमा शामिल हैं। वहीं जयपुरिया की अक्षिता बंसल ने भी टॉप स्कोर किया है। दैनिक भास्कर ने लखनऊ की इन टॉपर बेटियों से बातचीत कर उनकी सफलता के राज जाने। पढ़िए पूरी बातचीत… 1 नंबर से 100% लाने में रही असफल ISC में 99.75% स्कोर करने वाली ओहसीन कहती हैं कि उम्मीद से ज्यादा मार्क्स आए हैं। जितने नंबर मुझे मिले इसी की मुझे बहुत खुशी हैं। 3 विषयों में 100 मिले हैं। सिर्फ फिजिक्स में एक नंबर कम रह गया। फिजिक्स में 99 मिले हैं। पूरी तरह से मन लगाकर पढ़ाई की थी। उसी का नतीजा हैं कि ये रिजल्ट आया है। ऑन्कोलॉजी या कार्डियो सर्जरी की डॉक्टर बनना लक्ष्य ओहसीन कहती हैं कि वो फिलहाल NEET की तैयारी कर रही हैं और आगे चलकर MBBS करना चाहती हैं। एमबीबीएस करने के बाद ऑंकोलॉजी या कार्डियो सर्जरी में सुपर स्पेशलिटी हासिल करना उनका लक्ष्य हैं। ओहसीन ने कहा कि मेरी सफलता में सबसे बड़ा योगदान मेरे पिता का रहा। उन्होंने मुझे बहुत सपोर्ट किया, खूब मोटिवेट किया। कभी डाउन फील नहीं होने दिया। हमेशा मोटिवेट करते हुए कहा कि खूब मेहनत करो। सफलता जरुर हासिल होगी। पढ़ाई से ब्रेक के दौरान फिक्शन बुक्स पढ़ती हैं ओहसीन बताती हैं कि जब वह सिलेबस की पढ़ाई से बोर हो जाती थीं, तो रिलैक्स होने के लिए फिक्शन किताबें पढ़ती थीं। रीडिंग उनका हॉबी है, जिससे उन्हें मानसिक शांति मिलती है। ओहसीन की मां सोनम अग्रवाल अपनी बेटी की सफलता पर बेहद गर्व महसूस कर रही हैं। उन्होंने कहा कि घर पर उन्होंने पूरा ध्यान रखा, लेकिन मेहनत ओहसीन ने खुद की है। ओहसीन के पिता और स्कूल टीचर्स का भी उन्हें पूरा सपोर्ट मिला। पिता का कहना है कि बेटी की मेहनत आज रंग लाई है। अब बात अक्षिता अग्रवाल की..जयपुरिया की इस स्टूडेंट ने भी 99.75% मार्क्स हासिल किए हैं। हर दिन की पढ़ाई बराबर नहीं होती है रोजाना अक्षिता बताती हैं कि उनकी कोशिश रहती थी कि रोजाना करीब 6 से 7 घंटे पढ़ाई करें। वह मानती हैं कि हर दिन एक जैसा नहीं होता। वह लगातार कई घंटे तक पढ़ाई नहीं करती थीं। बीच-बीच में ब्रेक लेना जरूरी समझती थीं। ब्रेक के दौरान कभी बाहर खेलने चली जाती थीं। कभी गाने सुनती थीं या हल्की एक्टिविटी करती थीं। इससे उन्हें रिलैक्स महसूस होता था। सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री के क्षेत्र में भविष्य बनाने का लक्ष्य भविष्य की तैयारियों को लेकर अक्षिता कहती हैं कि मेरा लक्ष्य आगे चलकर बीटेक करने के बाद सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री में काम करना है। इसके पीछे की वजह मेरी बहन के द्वारा दिया गया मोटिवेशन हैं। उसने मुझे ये फील्ड चुनने में मदद की हैं। ऐसे हैंडल करे पियर प्रेशर पियर प्रेशर के सवाल पर अक्षिता रहती हैं कि भले ही कई बार हम इसे नकारे पर इसका इंपैक्ट जरूर होता है। जब आपके साथ के स्टूडेंट अच्छा परफॉर्म करते हैं तब खुद पर भी अच्छा परफॉर्म करने का दबाव रहता है। इसको हैंडल करने का तरीका पॉजिटिव होना चाहिए और फोकस खुद की परफॉर्मेंस पर रहना चाहिए। घर में सभी का मिला सपोर्ट अक्षिता की मां अंजू अग्रवाल विधानसभा में फाइनेंस कंट्रोलर हैं। पिता अंजनी कुमार अग्रवाल स्टेट टैक्स डिपार्टमेंट में एडिशनल कमिश्नर है। बड़ी बहन नोएडा की ट्रेडिंग कंपनी में सॉफ्टवेयर डेवलपर के रूप में काम कर रही हैं। इंग्लिश में कटे एक नंबर अक्षिता कहती हैं कि इंग्लिश में मेरे एक नंबर कम रह गए बाकी सभी विषयों में पूरे मार्क्स मिले हैं। एग्जाम अच्छे हुए थे पर यह स्कोर आएगा ऐसी हुई उम्मीद नहीं थी। इसे उम्मीद से ज्यादा भी कहा जा सकता हैं। सबसे पहले पेरेंट्स ने रिजल्ट देखा। पहला रिस्पांस थोड़ा शॉकिंग रहा पर मैंने अपना बेस्ट दिया था। महिला बिल किया जाना चाहिए CMS कानपुर रोड कैंपस की छात्रा और 99.75% स्कोर करने वाली छवि मिश्रा ने महिला आरक्षण पर खुलकर अपनी बात रखी। छवि का कहना है कि संसद में महिला आरक्षण बिल पास होना चाहिए था। आज के समय में महिलाओं को आरक्षण देना जरूरी है। इससे महिलाएं हर क्षेत्र में बेहतर योगदान दे सकेंगी। हालांकि एक समय बाद इसे हटा देना चाहिए। जब समाज में संतुलन आ जाए, तब आरक्षण की जरूरत नहीं रहनी चाहिए। छवि का कहना है कि जाति आधारित आरक्षण भी इसी तरह लागू होना चाहिए। अपनी सफलता का 40% श्रेय खुद को देती हैं। वहीं 60% श्रेय टीचर्स और पेरेंट्स को देती हैं। कोई ट्यूशन नहीं लिया, सिर्फ टीचर्स का कहना मानकर की पढ़ाई CMS गोमतीनगर की संस्कृति चंदेल को भी 99.75% मार्क्स मिले हैं। वह कहती हैं कि उनका कोई सोशल मीडिया अकाउंट नहीं था। फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफार्म पर एक्टिव नहीं थी। एग्जाम के बाद नया फोन लिया और अभी इन दोनों ही प्लेटफार्म पर अपना अकाउंट बनाया। संस्कृति कहती हैं कि मैंने सिर्फ वही किया जो मेरे टीचर्स ने कहा। कोई ट्यूशन नहीं लिया। भविष्य में UPSC क्वालीफाई करने की कोशिश करुंगी। सफलता का श्रेय देने के सवाल पर टॉपर का कहना हैं कि फैमिली से लगातार पूरा सपोर्ट मिला पर शुरू में बोर्ड एग्जाम से पहले के असेसमेंट में बहुत अच्छा स्कोर नहीं मिला था। जज बनना चाहती हैं जैनब सीएमएस अलीगंज ब्रांच की जैनब फातिमा ने ह्यूमैनिटीज में 99.75% अंक हासिल किए हैं। वह रोजाना करीब 4 से 5 घंटे पढ़ाई करती थीं। राइटिंग और पेंटिंग उनकी हॉबी है। पढ़ाई से बोर होने पर वह यही करती थीं। जैनब ने बताया कि पढ़ाई को लेकर पैरेंट्स की ओर से कोई दबाव नहीं था। जैनब आगे चलकर जज बनना चाहती हैं।


