बिहार के सीमांचल समेत छह जिलों में ब्लैकआउट!:हवाई हमलों की वजह से चलेगा मॉक ड्रिल, मई के तीसरे सप्ताह में एक साथ बजेगा सायरन

बिहार के सीमांचल समेत छह जिलों में ब्लैकआउट!:हवाई हमलों की वजह से चलेगा मॉक ड्रिल, मई के तीसरे सप्ताह में एक साथ बजेगा सायरन

केंद्रीय गृह मंत्रालय बिहार के छह जिलों किशनगंज, पटना, बेगूसराय, पूर्णिया, अररिया और कटिहार में मई के तीसरे सप्ताह में हवाई हमले और ब्लैकआउट से संबंधित व्यापक मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी। इसको लेकर राज्य का आपदा प्रबंधन विभाग पूरी तरह सक्रिय हो गया है। सभी संबंधित जिलों के जिला पदाधिकारी (डीएम) और पुलिस अधीक्षकों (एसपी) के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इसमें तैयारियों का जायजा लिया गया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई अहम बैठक बैठक की अध्यक्षता आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव डॉ.चंद्रशेखर सिंह ने की। यह बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित हुई, जिसमें सभी छह जिलों के अधिकारी जुड़े। बैठक के दौरान सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिया कि मॉक ड्रिल को लेकर किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार नागरिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए साल में कम से कम दो बार अर्द्धवार्षिक मॉक ड्रिल कराना अनिवार्य है। यह अभ्यास न सिर्फ प्रशासनिक तैयारियों का परीक्षण करता है, बल्कि आम नागरिकों को भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार करता है। एक साथ बजेगा सायरन, सिस्टम दुरुस्त रखने का निर्देश डॉ. सिंह ने बताया कि निर्धारित तिथि और समय पर सभी जिलों में एक साथ सायरन बजाया जाएगा, जो इस मॉक ड्रिल का अहम हिस्सा होगा। इसके लिए पर्याप्त संख्या में सायरन की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि सायरन की कमी होने पर चौक-चौराहों पर लगे साउंड सिस्टम, पुलिस थानों और फायर ब्रिगेड की गाड़ियों का भी उपयोग किया जा सकता है। लक्ष्य यह है कि सायरन की आवाज अधिकतम लोगों तक पहुंचे और वे सतर्क हो सकें। ब्लैकआउट के दौरान बिजली विभाग की भूमिका अहम मॉक ड्रिल के दौरान ब्लैकआउट की स्थिति भी बनाई जाएगी। इस दौरान बिजली विभाग की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी। सचिव ने सभी जिलों को निर्देश दिया कि वे समय रहते बिजली विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर लें, ताकि अभ्यास के दौरान किसी प्रकार की तकनीकी बाधा न आए। ब्लैकआउट का उद्देश्य यह समझना है कि अचानक बिजली गुल होने की स्थिति में प्रशासन और आमजन किस तरह प्रतिक्रिया देते हैं और कितनी तेजी से व्यवस्था बहाल की जा सकती है। अस्पतालों में भी होंगे विशेष इंतजाम मॉक ड्रिल के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं की भी परीक्षा होगी। सचिव ने निर्देश दिया कि सभी अस्पतालों में खिड़कियों पर प्राइवेसी कर्टन या क्यूबिकल पर्दे लगाए जाएं, ताकि आपात स्थिति में मरीजों की सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित की जा सके। इसके अलावा अस्पतालों को यह भी परखा जाएगा कि वे आपातकालीन स्थिति में कितनी तेजी से मरीजों को संभाल सकते हैं और संसाधनों का उपयोग कैसे करते हैं। घबराहट से बचाने के लिए होगा व्यापक प्रचार-प्रसार प्रशासन का सबसे बड़ा फोकस इस बात पर है कि मॉक ड्रिल के दौरान आमजन में किसी प्रकार की अफवाह या घबराहट न फैले। इसके लिए व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए गए हैं। लाउडस्पीकर, सोशल मीडिया, स्थानीय मीडिया और जनप्रतिनिधियों के माध्यम से लोगों को पहले से ही जानकारी दी जाएगी कि यह केवल एक अभ्यास है, ताकि लोग सहज रहें और इसमें सहयोग करें। बेगूसराय बना मॉडल, अन्य जिलों को दी गई सीख बैठक में असैनिक सुरक्षा के महानिदेशक-सह-आयुक्त डॉ. परेश सक्सेना ने भी अधिकारियों को मॉक ड्रिल की बारीकियों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि पिछले अभ्यास में बेगूसराय जिले का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा था। उन्होंने अन्य जिलों से अपील की कि वे बेगूसराय के मॉडल को अपनाते हुए उसी स्तर की तैयारी करें, ताकि इस बार भी मॉक ड्रिल सफल हो सके और बेहतर परिणाम सामने आएं। स्कूल-कॉलेज और सामाजिक संगठनों को भी जोड़ा जाएगा डॉ. सक्सेना ने कहा कि मॉक ड्रिल को सिर्फ प्रशासनिक अभ्यास तक सीमित नहीं रखना चाहिए। इसमें स्कूल-कॉलेजों, दवा व्यवसायियों और सामाजिक संगठनों को भी शामिल किया जाना चाहिए। इससे यह सुनिश्चित होगा कि आपदा की स्थिति में समाज के हर वर्ग की भागीदारी हो और सामूहिक प्रतिक्रिया अधिक प्रभावी बन सके। सीमांचल के जिलों में विशेष तैयारी किशनगंज के जिलाधिकारी विशाल राज ने बताया कि सीमांचल के चारों जिलों—किशनगंज, पूर्णिया, अररिया और कटिहार—में विशेष तैयारी की जा रही है। इसके साथ ही पटना और बेगूसराय में भी व्यापक स्तर पर अभ्यास की रूपरेखा तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि युद्ध जैसी आपदा स्थिति में लोगों को जागरूक रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है। इसलिए इस मॉक ड्रिल के जरिए लोगों को यह सिखाया जाएगा कि संकट की घड़ी में उन्हें क्या करना चाहिए और कैसे खुद को सुरक्षित रखना चाहिए। आपदा से निपटने की तैयारी का होगा परीक्षण यह मॉक ड्रिल राज्य की आपदा प्रबंधन प्रणाली की वास्तविक परीक्षा मानी जा रही है। इसमें प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, बिजली विभाग और आम नागरिकों की सामूहिक भागीदारी होगी। इस अभ्यास के जरिए यह आकलन किया जाएगा कि किसी भी आपात स्थिति—चाहे वह युद्ध जैसी हो या प्राकृतिक आपदा—में राज्य की तैयारियां कितनी मजबूत हैं और किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है। केंद्रीय गृह मंत्रालय बिहार के छह जिलों किशनगंज, पटना, बेगूसराय, पूर्णिया, अररिया और कटिहार में मई के तीसरे सप्ताह में हवाई हमले और ब्लैकआउट से संबंधित व्यापक मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी। इसको लेकर राज्य का आपदा प्रबंधन विभाग पूरी तरह सक्रिय हो गया है। सभी संबंधित जिलों के जिला पदाधिकारी (डीएम) और पुलिस अधीक्षकों (एसपी) के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इसमें तैयारियों का जायजा लिया गया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई अहम बैठक बैठक की अध्यक्षता आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव डॉ.चंद्रशेखर सिंह ने की। यह बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित हुई, जिसमें सभी छह जिलों के अधिकारी जुड़े। बैठक के दौरान सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिया कि मॉक ड्रिल को लेकर किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार नागरिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए साल में कम से कम दो बार अर्द्धवार्षिक मॉक ड्रिल कराना अनिवार्य है। यह अभ्यास न सिर्फ प्रशासनिक तैयारियों का परीक्षण करता है, बल्कि आम नागरिकों को भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार करता है। एक साथ बजेगा सायरन, सिस्टम दुरुस्त रखने का निर्देश डॉ. सिंह ने बताया कि निर्धारित तिथि और समय पर सभी जिलों में एक साथ सायरन बजाया जाएगा, जो इस मॉक ड्रिल का अहम हिस्सा होगा। इसके लिए पर्याप्त संख्या में सायरन की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि सायरन की कमी होने पर चौक-चौराहों पर लगे साउंड सिस्टम, पुलिस थानों और फायर ब्रिगेड की गाड़ियों का भी उपयोग किया जा सकता है। लक्ष्य यह है कि सायरन की आवाज अधिकतम लोगों तक पहुंचे और वे सतर्क हो सकें। ब्लैकआउट के दौरान बिजली विभाग की भूमिका अहम मॉक ड्रिल के दौरान ब्लैकआउट की स्थिति भी बनाई जाएगी। इस दौरान बिजली विभाग की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी। सचिव ने सभी जिलों को निर्देश दिया कि वे समय रहते बिजली विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर लें, ताकि अभ्यास के दौरान किसी प्रकार की तकनीकी बाधा न आए। ब्लैकआउट का उद्देश्य यह समझना है कि अचानक बिजली गुल होने की स्थिति में प्रशासन और आमजन किस तरह प्रतिक्रिया देते हैं और कितनी तेजी से व्यवस्था बहाल की जा सकती है। अस्पतालों में भी होंगे विशेष इंतजाम मॉक ड्रिल के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं की भी परीक्षा होगी। सचिव ने निर्देश दिया कि सभी अस्पतालों में खिड़कियों पर प्राइवेसी कर्टन या क्यूबिकल पर्दे लगाए जाएं, ताकि आपात स्थिति में मरीजों की सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित की जा सके। इसके अलावा अस्पतालों को यह भी परखा जाएगा कि वे आपातकालीन स्थिति में कितनी तेजी से मरीजों को संभाल सकते हैं और संसाधनों का उपयोग कैसे करते हैं। घबराहट से बचाने के लिए होगा व्यापक प्रचार-प्रसार प्रशासन का सबसे बड़ा फोकस इस बात पर है कि मॉक ड्रिल के दौरान आमजन में किसी प्रकार की अफवाह या घबराहट न फैले। इसके लिए व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए गए हैं। लाउडस्पीकर, सोशल मीडिया, स्थानीय मीडिया और जनप्रतिनिधियों के माध्यम से लोगों को पहले से ही जानकारी दी जाएगी कि यह केवल एक अभ्यास है, ताकि लोग सहज रहें और इसमें सहयोग करें। बेगूसराय बना मॉडल, अन्य जिलों को दी गई सीख बैठक में असैनिक सुरक्षा के महानिदेशक-सह-आयुक्त डॉ. परेश सक्सेना ने भी अधिकारियों को मॉक ड्रिल की बारीकियों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि पिछले अभ्यास में बेगूसराय जिले का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा था। उन्होंने अन्य जिलों से अपील की कि वे बेगूसराय के मॉडल को अपनाते हुए उसी स्तर की तैयारी करें, ताकि इस बार भी मॉक ड्रिल सफल हो सके और बेहतर परिणाम सामने आएं। स्कूल-कॉलेज और सामाजिक संगठनों को भी जोड़ा जाएगा डॉ. सक्सेना ने कहा कि मॉक ड्रिल को सिर्फ प्रशासनिक अभ्यास तक सीमित नहीं रखना चाहिए। इसमें स्कूल-कॉलेजों, दवा व्यवसायियों और सामाजिक संगठनों को भी शामिल किया जाना चाहिए। इससे यह सुनिश्चित होगा कि आपदा की स्थिति में समाज के हर वर्ग की भागीदारी हो और सामूहिक प्रतिक्रिया अधिक प्रभावी बन सके। सीमांचल के जिलों में विशेष तैयारी किशनगंज के जिलाधिकारी विशाल राज ने बताया कि सीमांचल के चारों जिलों—किशनगंज, पूर्णिया, अररिया और कटिहार—में विशेष तैयारी की जा रही है। इसके साथ ही पटना और बेगूसराय में भी व्यापक स्तर पर अभ्यास की रूपरेखा तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि युद्ध जैसी आपदा स्थिति में लोगों को जागरूक रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है। इसलिए इस मॉक ड्रिल के जरिए लोगों को यह सिखाया जाएगा कि संकट की घड़ी में उन्हें क्या करना चाहिए और कैसे खुद को सुरक्षित रखना चाहिए। आपदा से निपटने की तैयारी का होगा परीक्षण यह मॉक ड्रिल राज्य की आपदा प्रबंधन प्रणाली की वास्तविक परीक्षा मानी जा रही है। इसमें प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, बिजली विभाग और आम नागरिकों की सामूहिक भागीदारी होगी। इस अभ्यास के जरिए यह आकलन किया जाएगा कि किसी भी आपात स्थिति—चाहे वह युद्ध जैसी हो या प्राकृतिक आपदा—में राज्य की तैयारियां कितनी मजबूत हैं और किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *