ईडी निदेशक बनकर डीएम को कॉल करने वाला जालसाज गिरफ्तार:2.61 लाख कैश और मोबाइल बरामद; 2022 में तत्कालीन डीजीपी को दिया था झांसा

ईडी निदेशक बनकर डीएम को कॉल करने वाला जालसाज गिरफ्तार:2.61 लाख कैश और मोबाइल बरामद; 2022 में तत्कालीन डीजीपी को दिया था झांसा

भोजपुर जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जहां खुद को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का निदेशक बताकर जिलाधिकारी तनय सुल्तानिया को फोन करने वाले एक शातिर जालसाज को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। जिसकी पहचान पटना के बुद्धा कॉलोनी निवासी अभिषेक भोपल्का उर्फ अभिषेक अग्रवाल के तौर पर हुई है। करीब 2.61 लाख रुपए नकद और मोबाइल बरामद हुआ है। पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है, जिसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पहले भी खुद को बड़े अधिकारी के रूप में पेश कर कई लोगों को गुमराह कर चुका है। 2022 में इसी जालसाज ने चीफ जस्टिस बनकर तत्कालीन डीजीपी को झांसा दिया था। पटना से हुई गिरफ्तारी घटना 27 अप्रैल 2026 की है, जब जिलाधिकारी के सरकारी मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से व्हाट्सएप कॉल आया। कॉल करने वाला खुद को दिल्ली से ईडी का निदेशक बताते हुए अनावश्यक दबाव बनाने और बातचीत करने लगा। शक होने पर डीएम कार्यालय के कर्मी रोहित कुमार ने 28 अप्रैल को नवादा थाने में केस दर्ज कराया। केस दर्ज होते ही एसटीएफ और पुलिस एक्टिव हो गई। पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की। अभिषेक लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था। इसी बीच उसकी लोकेशन पटना के कोतवाली इलाके में मिली। पुलिस ने घेराबंदी कर उसे दबोच लिया। जांच में यह भी सामने आया कि गिरफ्तार युवक पहले भी इसी तरह की घटनाओं को अंजाम दे चुका है। तत्कालीन डीजीपी को चीफ जस्टिस बनकर फोन किया था अभिषेक अग्रवाल ने 2022 में तत्कालीन डीजीपी एसके सिंघल को झांसा दिया था। फोन करके खुद को पटना हाईकोर्ट का तत्कालीन चीफ जस्टिस संजय करोल बताया था। जालसाज ने तत्कालीन गया एसपी आदित्य कुमार के फेवर में प्रशासनिक फैसले लेने के लिए सिंघल पर दबाव बनाया था। पोल खुलने पर आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने जांच की। पता चला कि सिम किसी और के नाम पर था। बाद में ईओयू ने उसे गिरफ्तार किया था। इस मामले में उसे तीन साल पहले पटना हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी। गंभीर धाराओं में केस दर्ज भोजपुर के नवादा थाने में अभिषेक पर बीएनएस की 5 और आईटी एक्ट को 2 धाराओं में केस दर्ज हुआ है। इसमें जबरन वसूली (एक्सटॉर्शन) की धारा भी है, जिसमें 7 साल तक की सजा का प्रावधान है। धारा 319 (2) (प्रतिरूपण द्वारा छल): 3 साल तक जेल या जुर्माना, या दोनों। धारा 308(2) (जबरन क्सूली): 7 साल तक जेल और जुर्माना। धारा 351(2) (आपराधिक धमकी): 2 साल तक सजा या जुर्माना, या दोनों। धारा 351(4) (पहचान छिपाकर धमकी): 4 साल तक की सजा। धारा 352(3) (जानबूझकर अपमानित करना): 2 साल तक सजा या जुर्माना। आईटी एक्ट 660 (पहचान का गलत इस्तेमाल): 3 साल तक जेल, 1 लाख जुर्माना। आईटी एक्ट 66D (कंप्यूटर/ मोबाइल से फर्जी पहचान बना धोखाधड़ी): 3 साल तक जेल, 1 लाख जुर्माना। बड़े अफसरों को करता था ब्लैकमेल अभिषेक कई आईएएस और आईपीएस अफसरों का करीबी रहा है। चार साल पहले कई बड़े अफसरों के साथ उसकी तस्वीरें भी वायरल हुई थीं। वह बेहद शातिर है। फर्जी सिम का इस्तेमाल कर वह जांच एजेंसियों का बड़ा अफसर बनता है। फिर अधिकारियों को कॉल कर ब्लैकमेल करने के साथ ही ट्रांसफर-पोस्टिंग की पैरवी करता है। उस पर पटना और भोजपुर में रंगदारी और धोखाधड़ी के तीन केस पहले से दर्ज है। भोजपुर जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जहां खुद को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का निदेशक बताकर जिलाधिकारी तनय सुल्तानिया को फोन करने वाले एक शातिर जालसाज को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। जिसकी पहचान पटना के बुद्धा कॉलोनी निवासी अभिषेक भोपल्का उर्फ अभिषेक अग्रवाल के तौर पर हुई है। करीब 2.61 लाख रुपए नकद और मोबाइल बरामद हुआ है। पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है, जिसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पहले भी खुद को बड़े अधिकारी के रूप में पेश कर कई लोगों को गुमराह कर चुका है। 2022 में इसी जालसाज ने चीफ जस्टिस बनकर तत्कालीन डीजीपी को झांसा दिया था। पटना से हुई गिरफ्तारी घटना 27 अप्रैल 2026 की है, जब जिलाधिकारी के सरकारी मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से व्हाट्सएप कॉल आया। कॉल करने वाला खुद को दिल्ली से ईडी का निदेशक बताते हुए अनावश्यक दबाव बनाने और बातचीत करने लगा। शक होने पर डीएम कार्यालय के कर्मी रोहित कुमार ने 28 अप्रैल को नवादा थाने में केस दर्ज कराया। केस दर्ज होते ही एसटीएफ और पुलिस एक्टिव हो गई। पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की। अभिषेक लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था। इसी बीच उसकी लोकेशन पटना के कोतवाली इलाके में मिली। पुलिस ने घेराबंदी कर उसे दबोच लिया। जांच में यह भी सामने आया कि गिरफ्तार युवक पहले भी इसी तरह की घटनाओं को अंजाम दे चुका है। तत्कालीन डीजीपी को चीफ जस्टिस बनकर फोन किया था अभिषेक अग्रवाल ने 2022 में तत्कालीन डीजीपी एसके सिंघल को झांसा दिया था। फोन करके खुद को पटना हाईकोर्ट का तत्कालीन चीफ जस्टिस संजय करोल बताया था। जालसाज ने तत्कालीन गया एसपी आदित्य कुमार के फेवर में प्रशासनिक फैसले लेने के लिए सिंघल पर दबाव बनाया था। पोल खुलने पर आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने जांच की। पता चला कि सिम किसी और के नाम पर था। बाद में ईओयू ने उसे गिरफ्तार किया था। इस मामले में उसे तीन साल पहले पटना हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी। गंभीर धाराओं में केस दर्ज भोजपुर के नवादा थाने में अभिषेक पर बीएनएस की 5 और आईटी एक्ट को 2 धाराओं में केस दर्ज हुआ है। इसमें जबरन वसूली (एक्सटॉर्शन) की धारा भी है, जिसमें 7 साल तक की सजा का प्रावधान है। धारा 319 (2) (प्रतिरूपण द्वारा छल): 3 साल तक जेल या जुर्माना, या दोनों। धारा 308(2) (जबरन क्सूली): 7 साल तक जेल और जुर्माना। धारा 351(2) (आपराधिक धमकी): 2 साल तक सजा या जुर्माना, या दोनों। धारा 351(4) (पहचान छिपाकर धमकी): 4 साल तक की सजा। धारा 352(3) (जानबूझकर अपमानित करना): 2 साल तक सजा या जुर्माना। आईटी एक्ट 660 (पहचान का गलत इस्तेमाल): 3 साल तक जेल, 1 लाख जुर्माना। आईटी एक्ट 66D (कंप्यूटर/ मोबाइल से फर्जी पहचान बना धोखाधड़ी): 3 साल तक जेल, 1 लाख जुर्माना। बड़े अफसरों को करता था ब्लैकमेल अभिषेक कई आईएएस और आईपीएस अफसरों का करीबी रहा है। चार साल पहले कई बड़े अफसरों के साथ उसकी तस्वीरें भी वायरल हुई थीं। वह बेहद शातिर है। फर्जी सिम का इस्तेमाल कर वह जांच एजेंसियों का बड़ा अफसर बनता है। फिर अधिकारियों को कॉल कर ब्लैकमेल करने के साथ ही ट्रांसफर-पोस्टिंग की पैरवी करता है। उस पर पटना और भोजपुर में रंगदारी और धोखाधड़ी के तीन केस पहले से दर्ज है।  

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