पीएमसीएच अब पेपरलेस होने जा रहा है। मई के दूसरे सप्ताह से अस्पताल के नए भवन में मरीजों और डॉक्टरों को हाईस्पीड इंटरनेट और ऑनलाइन सुविधाओं का लाभ मिलने लगेगा। 40 लाख की लागत से बीएसएनएल पूरे परिसर में फाइबर ऑप्टिक लीज लाइन बिछा रहा है। हर फ्लोर को हाई-स्पीड वाई-फाई जोन बनाया जा रहा है, ताकि डाटा ट्रांसफर में कोई रुकावट न आए। अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने कहा-हमारा उद्देश्य मरीजों की भागदौड़ कम करना है। हम कनेक्टिविटी को इतना मजबूत कर रहे हैं कि इलाज की प्रक्रिया तेज और पारदर्शी हो जाए। मई के दूसरे सप्ताह से इसका असर दिखने लगेगा। क्या-क्या बदलेगा
मरीजों को जांच रिपोर्ट का इंतजार नहीं करना होगा। सीधे संबंधित डॉक्टर के कंप्यूटर स्क्रीन पर पहुंच जाएगी।
ओपीडी में दिखाने के लिए सुबह 4 बजे से लाइन में नहीं लगना होगा। मरीज घर बैठे ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे।
मरीज को भारी-भरकम फाइलें नहीं ढोनी पड़ेंगी। उनकी मेडिकल हिस्ट्री डिजिटल रिकॉर्ड में सुरक्षित रहेगी।
जन्म-मृत्यु की जानकारी तुरंत डब्ल्यूएचओ और सरकार के पोर्टल पर अपडेट हो जाएगी।
अप्वाइंटमेंट सिस्टम होने से मरीज को पता होगा कि उसे किस समय डॉक्टर के पास पहुंचना है। इससे ओपीडी की भीड़ कम होगी। पीएमसीएच अब पेपरलेस होने जा रहा है। मई के दूसरे सप्ताह से अस्पताल के नए भवन में मरीजों और डॉक्टरों को हाईस्पीड इंटरनेट और ऑनलाइन सुविधाओं का लाभ मिलने लगेगा। 40 लाख की लागत से बीएसएनएल पूरे परिसर में फाइबर ऑप्टिक लीज लाइन बिछा रहा है। हर फ्लोर को हाई-स्पीड वाई-फाई जोन बनाया जा रहा है, ताकि डाटा ट्रांसफर में कोई रुकावट न आए। अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने कहा-हमारा उद्देश्य मरीजों की भागदौड़ कम करना है। हम कनेक्टिविटी को इतना मजबूत कर रहे हैं कि इलाज की प्रक्रिया तेज और पारदर्शी हो जाए। मई के दूसरे सप्ताह से इसका असर दिखने लगेगा। क्या-क्या बदलेगा
मरीजों को जांच रिपोर्ट का इंतजार नहीं करना होगा। सीधे संबंधित डॉक्टर के कंप्यूटर स्क्रीन पर पहुंच जाएगी।
ओपीडी में दिखाने के लिए सुबह 4 बजे से लाइन में नहीं लगना होगा। मरीज घर बैठे ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे।
मरीज को भारी-भरकम फाइलें नहीं ढोनी पड़ेंगी। उनकी मेडिकल हिस्ट्री डिजिटल रिकॉर्ड में सुरक्षित रहेगी।
जन्म-मृत्यु की जानकारी तुरंत डब्ल्यूएचओ और सरकार के पोर्टल पर अपडेट हो जाएगी।
अप्वाइंटमेंट सिस्टम होने से मरीज को पता होगा कि उसे किस समय डॉक्टर के पास पहुंचना है। इससे ओपीडी की भीड़ कम होगी।


