IGIMS में एमबीबीएस परीक्षा में धांधली की पुष्टि:सेकेंड सेमेस्टर का एग्जाम रद्द, परीक्षा शाखा में फेरबदल का निर्णय; मुख्य दोषी को बचाने का आरोप

IGIMS में एमबीबीएस परीक्षा में धांधली की पुष्टि:सेकेंड सेमेस्टर का एग्जाम रद्द, परीक्षा शाखा में फेरबदल का निर्णय; मुख्य दोषी को बचाने का आरोप

आईजीआईएमएस में एमबीबीएस परीक्षा में गड़बड़ी की आधिकारिक पुष्टि सोमवार को हो गई है। संस्थान की जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में परीक्षा प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं होने की बात स्वीकार की है। इसके बाद संस्थान प्रशासन ने एमबीबीएस के द्वितीय सेमेस्टर 2025 की परीक्षा रद्द कर दी है। संस्थान प्रशासन ने डीन एग्जामिनेशन सेक्शन से जुड़े कर्मियों और कुछ छात्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। साथ ही, परीक्षा शाखा में बड़े पैमाने पर फेरबदल का निर्णय लिया गया है। हालांकि, संस्थान के शिक्षकों-छात्रों ने जांच रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं। छात्रों का आरोप है कि रिपोर्ट में लीपापोती की गई है और मुख्य दोषी को बचाया गया है। उनका यह भी कहना है कि जिस व्यक्ति पर सबसे ज्यादा आरोप थे, उनकी जिम्मेदारी कम करने के बजाय उन्हें और अधिक अधिकार दे दिए गए हैं, जिससे छात्रों में आक्रोश है। परीक्षा शाखा में बदलाव करते हुए डॉ. अंजू सिंह, डॉ. विनोद कुमार और डॉ. सरिता मिश्रा को सब डीन (एग्जाम) का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। अन्य कर्मचारियों का भी तत्काल प्रभाव से तबादला किया जा रहा है। पहले से ही लगाए जा रहे थे गंभीर आरोप

मामले की शुरुआत 13 मार्च को एक अनजान ई-मेल से हुई थी, जिसमें परीक्षा में पेपर लीक और पैसों के लेन-देन का आरोप लगाया गया था। हालांकि आरोप सामने आने के करीब 1 महीने बाद डॉ. ओम की अध्यक्षता में आंतरिक जांच समिति गठित की गई। बाद में मीडिया में खबर प्रकाशित होने के बाद फिर से तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन पीएसएम विभागाध्यक्ष डॉ. संजय कुमार की अध्यक्षता में किया गया, जिसमें डॉ. ज्ञान भास्कर और डॉ. अश्विनी को सदस्य बनाया गया। समिति को 7 कार्य दिवस में रिपोर्ट सौंपनी थी, लेकिन रिपोर्ट सौंपने में एक महीने से भी अधिक समय लग गया। इस बीच कई प्रशासनिक उलट-फेर किए गए और संस्थान में पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठाए जाते रहे। प्रिंसिपल को अलग रखा गया

विवाद में एक और बड़ा सवाल यह है कि कॉलेज के प्रिंसिपल को जांच प्रक्रिया से दूर रखा गया। छात्रों और कुछ शिक्षकों का कहना है कि 13 मार्च के बाद हुई किसी भी बैठक में प्रिंसिपल को नहीं बुलाया गया। जांच समिति की कॉपी तक साझा नहीं की गई। आंतरिक बैठकों से भी उन्हें अलग रखा गया। इसे लेकर आरोप है कि संस्थान में जानबूझकर कुछ तथ्यों को छिपाया जा रहा है।

5 से 8 लाख में पेपर लीक का आरोप

मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि एमबीबीएस फाइनल ईयर परीक्षा में पेपर लीक और उत्तर पुस्तिका में हेर फेर के लिए 5 से 8 लाख रुपए तक की डील की गई। बताया जा रहा है कि पेपर लीक और आंसर शीट अलग-अलग रेट पर तय थे। परीक्षा शाखा के सीसीटीवी में संदिग्ध आवाजाही के संकेत मिले हैं। प्रारंभिक जांच में उत्तर पुस्तिकाओं पर हस्ताक्षर से जुड़ी अनियमितताएं सामने आई हैं। छात्रों का कहना है कि यह मामला सिर्फ परीक्षा रद्द होने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे संस्थान की साख पर गहरा असर पड़ा है। आरोप है कि यह एक संगठित गड़बड़ी है, जिसमें एक-दो नहीं बल्कि कई लोग शामिल हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासन आगे क्या कार्रवाई करता है और क्या छात्रों के आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी या नहीं।
छात्रों का आरोप गलत है आईजीआईएमएस के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. विभूति प्रसन्न सिन्हा ने कहा कि परीक्षा में गड़बड़ी की पुष्टि हुई है, जिसके बाद नियमानुसार कार्रवाई शुरू कर दी गई है। एमबीबीएस द्वितीय सेमेस्टर 2025 को रद्द कर दिया गया है। डीन एग्जामिनेशन सेक्शन से जुड़े सभी कर्मियों और संबंधित छात्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। परीक्षा शाखा में तत्काल प्रभाव से प्रशासनिक बदलाव किए गए हैं। छात्रों की ओर से जांच में लीपापोती और मुख्य आरोपी को बचाने के आरोप निराधार हैं। यह जांच प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष है और किसी भी स्तर पर पक्षपात नहीं किया गया है। आईजीआईएमएस में एमबीबीएस परीक्षा में गड़बड़ी की आधिकारिक पुष्टि सोमवार को हो गई है। संस्थान की जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में परीक्षा प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं होने की बात स्वीकार की है। इसके बाद संस्थान प्रशासन ने एमबीबीएस के द्वितीय सेमेस्टर 2025 की परीक्षा रद्द कर दी है। संस्थान प्रशासन ने डीन एग्जामिनेशन सेक्शन से जुड़े कर्मियों और कुछ छात्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। साथ ही, परीक्षा शाखा में बड़े पैमाने पर फेरबदल का निर्णय लिया गया है। हालांकि, संस्थान के शिक्षकों-छात्रों ने जांच रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं। छात्रों का आरोप है कि रिपोर्ट में लीपापोती की गई है और मुख्य दोषी को बचाया गया है। उनका यह भी कहना है कि जिस व्यक्ति पर सबसे ज्यादा आरोप थे, उनकी जिम्मेदारी कम करने के बजाय उन्हें और अधिक अधिकार दे दिए गए हैं, जिससे छात्रों में आक्रोश है। परीक्षा शाखा में बदलाव करते हुए डॉ. अंजू सिंह, डॉ. विनोद कुमार और डॉ. सरिता मिश्रा को सब डीन (एग्जाम) का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। अन्य कर्मचारियों का भी तत्काल प्रभाव से तबादला किया जा रहा है। पहले से ही लगाए जा रहे थे गंभीर आरोप

मामले की शुरुआत 13 मार्च को एक अनजान ई-मेल से हुई थी, जिसमें परीक्षा में पेपर लीक और पैसों के लेन-देन का आरोप लगाया गया था। हालांकि आरोप सामने आने के करीब 1 महीने बाद डॉ. ओम की अध्यक्षता में आंतरिक जांच समिति गठित की गई। बाद में मीडिया में खबर प्रकाशित होने के बाद फिर से तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन पीएसएम विभागाध्यक्ष डॉ. संजय कुमार की अध्यक्षता में किया गया, जिसमें डॉ. ज्ञान भास्कर और डॉ. अश्विनी को सदस्य बनाया गया। समिति को 7 कार्य दिवस में रिपोर्ट सौंपनी थी, लेकिन रिपोर्ट सौंपने में एक महीने से भी अधिक समय लग गया। इस बीच कई प्रशासनिक उलट-फेर किए गए और संस्थान में पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठाए जाते रहे। प्रिंसिपल को अलग रखा गया

विवाद में एक और बड़ा सवाल यह है कि कॉलेज के प्रिंसिपल को जांच प्रक्रिया से दूर रखा गया। छात्रों और कुछ शिक्षकों का कहना है कि 13 मार्च के बाद हुई किसी भी बैठक में प्रिंसिपल को नहीं बुलाया गया। जांच समिति की कॉपी तक साझा नहीं की गई। आंतरिक बैठकों से भी उन्हें अलग रखा गया। इसे लेकर आरोप है कि संस्थान में जानबूझकर कुछ तथ्यों को छिपाया जा रहा है।

5 से 8 लाख में पेपर लीक का आरोप

मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि एमबीबीएस फाइनल ईयर परीक्षा में पेपर लीक और उत्तर पुस्तिका में हेर फेर के लिए 5 से 8 लाख रुपए तक की डील की गई। बताया जा रहा है कि पेपर लीक और आंसर शीट अलग-अलग रेट पर तय थे। परीक्षा शाखा के सीसीटीवी में संदिग्ध आवाजाही के संकेत मिले हैं। प्रारंभिक जांच में उत्तर पुस्तिकाओं पर हस्ताक्षर से जुड़ी अनियमितताएं सामने आई हैं। छात्रों का कहना है कि यह मामला सिर्फ परीक्षा रद्द होने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे संस्थान की साख पर गहरा असर पड़ा है। आरोप है कि यह एक संगठित गड़बड़ी है, जिसमें एक-दो नहीं बल्कि कई लोग शामिल हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासन आगे क्या कार्रवाई करता है और क्या छात्रों के आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी या नहीं।
छात्रों का आरोप गलत है आईजीआईएमएस के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. विभूति प्रसन्न सिन्हा ने कहा कि परीक्षा में गड़बड़ी की पुष्टि हुई है, जिसके बाद नियमानुसार कार्रवाई शुरू कर दी गई है। एमबीबीएस द्वितीय सेमेस्टर 2025 को रद्द कर दिया गया है। डीन एग्जामिनेशन सेक्शन से जुड़े सभी कर्मियों और संबंधित छात्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। परीक्षा शाखा में तत्काल प्रभाव से प्रशासनिक बदलाव किए गए हैं। छात्रों की ओर से जांच में लीपापोती और मुख्य आरोपी को बचाने के आरोप निराधार हैं। यह जांच प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष है और किसी भी स्तर पर पक्षपात नहीं किया गया है।  

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