किशनगंज जिले के ठाकुरगंज क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग NH-327E पर स्थित रेल ओवरब्रिज गंभीर खतरे का संकेत दे रहा है। करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित इस पुल की गुणवत्ता और मजबूती पर सवाल उठ रहे हैं। पुल के बीचों-बीच और निचले हिस्सों में कई जगहों पर भयानक दरारें उभर आई हैं, जिससे निर्माण कार्य में लापरवाही की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय लोगों और राहगीरों के अनुसार, ओवरब्रिज के नीचे से लगातार सीमेंट और कंक्रीट के टुकड़े गिर रहे हैं। कई स्थानों पर लोहे की सरिया (रॉड) भी साफ दिखाई देने लगी है, जो किसी भी पुल के लिए चिंताजनक स्थिति है। यह स्थिति निर्माण के दौरान निम्न गुणवत्ता वाली सामग्री के उपयोग या तकनीकी मानकों की अनदेखी का संकेत देती है। हजारों वाहनों के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग
यह ओवरब्रिज न केवल ठाकुरगंज बल्कि सिलीगुड़ी कॉरिडोर और अररिया की ओर जाने वाले हजारों वाहनों के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है। प्रतिदिन इस पुल से भारी वाहनों, बसों, ट्रकों, निजी गाड़ियों और पैदल राहगीरों का आवागमन होता है। इसके साथ ही, ओवरब्रिज के नीचे से हर दिन दर्जनों रेलगाड़ियां भी गुजरती हैं, जिससे किसी भी संभावित दुर्घटना की गंभीरता कई गुना बढ़ जाती है।अगर समय रहते इस पुल की मरम्मत या जांच नहीं कराई गई, तो यह कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकता है। वाहन चालकों में डर और असुरक्षा का माहौल
पुल के नीचे गिरते मलबे से राहगीरों और वाहन चालकों में डर और असुरक्षा का माहौल है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और रेलवे विभाग जैसे संबंधित विभागों ने अब तक इस गंभीर समस्या को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया है, जबकि यह मामला सीधे तौर पर जन सुरक्षा से जुड़ा है। अब सवाल यह उठता है कि क्या संबंधित विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं, या फिर समय रहते जागकर इस गंभीर समस्या का समाधान करेंगे। फिलहाल, ठाकुरगंज का यह रेल ओवरब्रिज लोगों के लिए सुविधा से ज्यादा खतरे का प्रतीक बनता जा रहा है। किशनगंज जिले के ठाकुरगंज क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग NH-327E पर स्थित रेल ओवरब्रिज गंभीर खतरे का संकेत दे रहा है। करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित इस पुल की गुणवत्ता और मजबूती पर सवाल उठ रहे हैं। पुल के बीचों-बीच और निचले हिस्सों में कई जगहों पर भयानक दरारें उभर आई हैं, जिससे निर्माण कार्य में लापरवाही की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय लोगों और राहगीरों के अनुसार, ओवरब्रिज के नीचे से लगातार सीमेंट और कंक्रीट के टुकड़े गिर रहे हैं। कई स्थानों पर लोहे की सरिया (रॉड) भी साफ दिखाई देने लगी है, जो किसी भी पुल के लिए चिंताजनक स्थिति है। यह स्थिति निर्माण के दौरान निम्न गुणवत्ता वाली सामग्री के उपयोग या तकनीकी मानकों की अनदेखी का संकेत देती है। हजारों वाहनों के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग
यह ओवरब्रिज न केवल ठाकुरगंज बल्कि सिलीगुड़ी कॉरिडोर और अररिया की ओर जाने वाले हजारों वाहनों के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है। प्रतिदिन इस पुल से भारी वाहनों, बसों, ट्रकों, निजी गाड़ियों और पैदल राहगीरों का आवागमन होता है। इसके साथ ही, ओवरब्रिज के नीचे से हर दिन दर्जनों रेलगाड़ियां भी गुजरती हैं, जिससे किसी भी संभावित दुर्घटना की गंभीरता कई गुना बढ़ जाती है।अगर समय रहते इस पुल की मरम्मत या जांच नहीं कराई गई, तो यह कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकता है। वाहन चालकों में डर और असुरक्षा का माहौल
पुल के नीचे गिरते मलबे से राहगीरों और वाहन चालकों में डर और असुरक्षा का माहौल है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और रेलवे विभाग जैसे संबंधित विभागों ने अब तक इस गंभीर समस्या को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया है, जबकि यह मामला सीधे तौर पर जन सुरक्षा से जुड़ा है। अब सवाल यह उठता है कि क्या संबंधित विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं, या फिर समय रहते जागकर इस गंभीर समस्या का समाधान करेंगे। फिलहाल, ठाकुरगंज का यह रेल ओवरब्रिज लोगों के लिए सुविधा से ज्यादा खतरे का प्रतीक बनता जा रहा है।


