Maharashtra Auto Taxi Marathi Rule: महाराष्ट्र में ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी बोलना और जानना अनिवार्य करने के फैसले लेकर पूरे प्रदेश में जमकर सियासत हो रही है। इसी बीच खबर आ रही है कि अब राज्य सरकार बैकफुट पर आ सकती है। सूत्रों के मुताबिक, बढ़ते विरोध और परिवहन व्यवस्था ठप होने के डर से फडणवीस-शिंदे सरकार इस नियम को लागू करने की ‘डेडलाइन’ को आगे बढ़ा सकती है। इस मुद्दे पर चर्चा के लिए परिवहन मंत्री ने आज (सोमवार) एक आपात बैठक बुलाई है।
क्या है विवादित ‘मराठी नियम’?
आपको बता दें कि महाराष्ट्र सरकार ने परमिट हासिल करने या उसे रिन्यू (Renew) कराने के लिए एक शर्त अनिवार्य की थी। चालक को मराठी भाषा का बुनियादी ज्ञान (बोलना, पढ़ना और समझना) होना चाहिए। सरकार का तर्क था कि स्थानीय यात्रियों की सुविधा और राज्य की भाषा के सम्मान के लिए यह जरूरी है। प्रशासन ने इसके लिए एक समय सीमा तय की थी, जिसके बाद नियम न मानने वालों के लाइसेंस या बैज रद्द किए जा सकते थे।
विरोध के आगे क्यों झुक रही है सरकार?
इस फैसले को ‘यू-टर्न’ के तौर पर देखा जा रहा है, जिसके पीछे कई अहम वजहें मानी जा रही हैं। सबसे बड़ी चिंता रोजी-रोटी को लेकर है, क्योंकि मुंबई और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में ऑटो-टैक्सी चालक उत्तर प्रदेश, बिहार और अन्य राज्यों से आते हैं। यूनियनों का कहना है कि अचानक नई भाषा सीखना आसान नहीं है और इससे लाखों परिवारों की आजीविका पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा अनिश्चितकालीन हड़ताल का खतरा भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है, क्योंकि ऐसी स्थिति में मुंबई जैसे शहर की लाइफलाइन ठप पड़ सकती है और आम जनता को भारी परेशानी झेलनी पड़ती। साथ ही चुनावी माहौल में सियासी समीकरण भी अहम भूमिका निभा रहे हैं, जहां सरकार उत्तर भारतीय वोटरों और गरीब तबके की नाराजगी मोल लेने से फिलहाल बचना चाहती है।
आज की बैठक पर टिकी हैं निगाहें
परिवहन मंत्री और यूनियन नेताओं के बीच होने वाली आज की बैठक में बीच का रास्ता निकालने की कोशिश होगी। यूनियनें मांग कर रही हैं कि पुराने चालकों को इस नियम से पूरी तरह छूट दी जाए या कम से कम भाषा सीखने के लिए लंबा समय दिया जाए। माना जा रहा है कि इस बैठक के बाद सरकार आधिकारिक तौर पर डेडलाइन बढ़ाने की घोषणा कर सकती है। यदि ऐसा होता है, तो यह मुंबई और महाराष्ट्र के लाखों ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए बड़ी जीत और राहत की खबर होगी।


