जबलपुर की नेताजी सुभाष चंद्र बोस केंद्रीय जेल में 26 अप्रैल को विशेष जेल लोक अदालत का आयोजन किया गया। यह लोक अदालत संजीव सचदेवा और विवेक रूसिया के निर्देशन में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के मार्गदर्शन में आयोजित की गई। इसका उद्देश्य छोटे अपराधों में बंद अंडर ट्रायल कैदियों को त्वरित न्याय दिलाना है। छोटे मामलों को दी जा रही प्राथमिकता लोक अदालत में चोरी जैसे सामान्य अपराधों और पेटी ऑफेंस से जुड़े मामलों को प्राथमिकता दी जा रही है। पैरालीगल वॉलंटियर्स (PLV) के माध्यम से संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर उनकी उपस्थिति सुनिश्चित की गई। 25 मामलों का चयन, सुनवाई जारी शुरुआती चरण में 25 प्रकरणों को सुनवाई के लिए चुना गया है, जिनमें से अब तक 4-5 फरियादी उपस्थित हो चुके हैं। अधिकारियों को उम्मीद है कि दिनभर में और भी पक्षकार पहुंचेंगे, जिससे अधिक मामलों का मौके पर ही निराकरण हो सकेगा। रेलवे और समझौता योग्य मामलों पर भी फोकस लोक अदालत में रेलवे से जुड़े छोटे मामलों और स्वीकारोक्ति आधारित प्रकरणों को भी शामिल किया गया है। साथ ही नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट की धारा 138 जैसे मामलों और अन्य कंपाउंडेबल केसों में समझौते के जरिए समाधान का प्रयास किया जा रहा है। सुबह से शाम तक चलेगी कार्यवाही लोक अदालत की कार्यवाही सुबह 9:15 बजे शुरू हुई, जो शाम 5 बजे तक जारी रहेगी। जिला स्तर पर बड़ी संख्या में मामलों की सुनवाई की जा रही है। न्याय प्रक्रिया में तेजी लाने की पहल इस पहल से न केवल बंदियों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद है, बल्कि जेलों में भीड़ कम होगी और न्यायालयों पर लंबित मामलों का बोझ घटेगा। त्वरित और सुलभ न्याय की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


