आज त्रिवेणी संयोग में मनाई जा रही जानकी नवमी:पटना के महावीर मंदिर में विशेष पूजा, उमड़ी भक्तों की भीड़; 24 घंटे का अष्टयाम कीर्तन शुरू

आज त्रिवेणी संयोग में मनाई जा रही जानकी नवमी:पटना के महावीर मंदिर में विशेष पूजा, उमड़ी भक्तों की भीड़; 24 घंटे का अष्टयाम कीर्तन शुरू

माता सीता के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाई जाने वाली जानकी नवमी पर राजधानी पटना के महावीर मंदिर में भक्ति का माहौल देखने को मिल रहा है। इस बार जानकी नवमी पर अश्लेषा नक्षत्र, रवियोग और सिद्धयोग का दुर्लभ संयोग बनने से दिन का धार्मिक महत्व और बढ़ गया है। मंदिर को खास तरीके से सजाया गया है और सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ दर्शन के लिए उमड़ रही है। सुबह 8 बजे से शुरू हुई पूजा, अष्टयाम कीर्तन जारी मंदिर में सुबह 8 बजे से माता जानकी की विशेष पूजा शुरू हुई। पूजन सम्पन्न होने के बाद 24 घंटे का ‘अष्टयाम कीर्तन’ प्रारंभ कर दिया गया है। इस दौरान माता जानकी का विशेष श्रृंगार भी किया जाएगा। पूजा के लिए शुभ मुहूर्त शुभ योग- सुबह 6:56 से 8:33 बजे तक। अभिजीत मुहूर्त- 11:22 से 12:13 बजे। चर-लाभ-अमृत- 11:48 से 4:39 बजे। हवन-आरती के साथ संपन्न हुआ अनुष्ठान महावीर मंदिर में प्राचीन परंपरा के अनुसार विशिष्ट पूजा पद्धति से माता जानकी का पूजन किया गया। यह पूजा का कार्यक्रम मंदिर के दक्षिण-पूर्व कोण पर स्थित राम-जानकी की प्रतिमा के समक्ष हुआ। पूजा के बाद हवन और आरती भी की गई। आज भक्त लाइन में लग कर माता जानकी के दर्शन कर सकते हैं। जानकी नवमी मनाने का क्या है विधान पंडित भवनाथ झा ने कहा कि, माता सीता के प्रकट होने के उपलक्ष्य में धर्मशास्त्रियों ने जानकी-नवमी मनाने का विधान किया है। इस दिन व्रत और जानकी की विशेष पूजा करना का विधान है। जगद्गुरु रामानन्दाचार्य कृत वैष्णवमताब्जभास्कर में जानकी नवमी व्रत का उल्लेख किया गया है। इस प्रसंग में रामानन्दाचार्य कहते हैं कि वैशाख मास में शुक्ल पक्ष में पुष्य नक्षत्र से युक्त नवमी तिथि में श्रीजनक महाराज ने हल से खेत को जोता। इस दौरान माता सीता धरती से प्राप्त हुईं। इस अवसर पर व्रत करना चाहिए।’ मंदिर में अनुष्ठान-त्योहार का विशेष ध्यान रखा जाता है श्री महावीर स्थान न्यास समिति के सचिव सायण कुणाल ने कहा कि, ‘महावीर मंदिर में आयोजित होने वाली सभी अनुष्ठान-त्योहार का विशेष ध्यान रखा जाता है। भक्तों को भी मंदिर में आयोजित होने वाले अनुष्ठान-त्योहार का आदि का इंतजार रहता है। इस वजह से हर छोटे से बड़े त्योहार का आयोजन धूमधाम से किया जाता है।’ माता सीता के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाई जाने वाली जानकी नवमी पर राजधानी पटना के महावीर मंदिर में भक्ति का माहौल देखने को मिल रहा है। इस बार जानकी नवमी पर अश्लेषा नक्षत्र, रवियोग और सिद्धयोग का दुर्लभ संयोग बनने से दिन का धार्मिक महत्व और बढ़ गया है। मंदिर को खास तरीके से सजाया गया है और सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ दर्शन के लिए उमड़ रही है। सुबह 8 बजे से शुरू हुई पूजा, अष्टयाम कीर्तन जारी मंदिर में सुबह 8 बजे से माता जानकी की विशेष पूजा शुरू हुई। पूजन सम्पन्न होने के बाद 24 घंटे का ‘अष्टयाम कीर्तन’ प्रारंभ कर दिया गया है। इस दौरान माता जानकी का विशेष श्रृंगार भी किया जाएगा। पूजा के लिए शुभ मुहूर्त शुभ योग- सुबह 6:56 से 8:33 बजे तक। अभिजीत मुहूर्त- 11:22 से 12:13 बजे। चर-लाभ-अमृत- 11:48 से 4:39 बजे। हवन-आरती के साथ संपन्न हुआ अनुष्ठान महावीर मंदिर में प्राचीन परंपरा के अनुसार विशिष्ट पूजा पद्धति से माता जानकी का पूजन किया गया। यह पूजा का कार्यक्रम मंदिर के दक्षिण-पूर्व कोण पर स्थित राम-जानकी की प्रतिमा के समक्ष हुआ। पूजा के बाद हवन और आरती भी की गई। आज भक्त लाइन में लग कर माता जानकी के दर्शन कर सकते हैं। जानकी नवमी मनाने का क्या है विधान पंडित भवनाथ झा ने कहा कि, माता सीता के प्रकट होने के उपलक्ष्य में धर्मशास्त्रियों ने जानकी-नवमी मनाने का विधान किया है। इस दिन व्रत और जानकी की विशेष पूजा करना का विधान है। जगद्गुरु रामानन्दाचार्य कृत वैष्णवमताब्जभास्कर में जानकी नवमी व्रत का उल्लेख किया गया है। इस प्रसंग में रामानन्दाचार्य कहते हैं कि वैशाख मास में शुक्ल पक्ष में पुष्य नक्षत्र से युक्त नवमी तिथि में श्रीजनक महाराज ने हल से खेत को जोता। इस दौरान माता सीता धरती से प्राप्त हुईं। इस अवसर पर व्रत करना चाहिए।’ मंदिर में अनुष्ठान-त्योहार का विशेष ध्यान रखा जाता है श्री महावीर स्थान न्यास समिति के सचिव सायण कुणाल ने कहा कि, ‘महावीर मंदिर में आयोजित होने वाली सभी अनुष्ठान-त्योहार का विशेष ध्यान रखा जाता है। भक्तों को भी मंदिर में आयोजित होने वाले अनुष्ठान-त्योहार का आदि का इंतजार रहता है। इस वजह से हर छोटे से बड़े त्योहार का आयोजन धूमधाम से किया जाता है।’  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *