दरभंगा जिले में प्रस्तावित एम्स के आसपास के क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री पर लगी रोक और ग्रीनफील्ड टाउनशिप योजना को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है। राज्य सरकार ने सुनियोजित शहरीकरण के तहत दरभंगा समेत 11 जिलों में सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने का निर्णय लिया है। NH-27 फोरलेन के पास निर्माणाधीन राज्य के दूसरे एम्स के आसपास बहादुरपुर प्रखंड के चांडी, भरौल, बलिया मौजा सहित एक दर्जन गांवों को टाउनशिप क्षेत्र में शामिल किया गया है। इन इलाकों में फिलहाल जमीन की खरीद-बिक्री पूरी तरह रोक दी गई है, जो मास्टर प्लान अधिसूचित होने तक प्रभावी रहेगी। 12 हजार एकड़ में विकसित होगी मिथिला टाउनशिप सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत ‘मिथिला टाउनशिप’ को करीब 12 हजार एकड़ भूमि में विकसित किया जाएगा। इसका दायरा बहादुरपुर और हनुमाननगर प्रखंड से आगे बढ़कर तीन प्रखंडों के 102 गांवों तक होगा। चयनित गांवों में फूलबरिया, जलबार, महनौली, दलौर, शोभन, भरौल, चांडी, गोढ़ियारी, बलिया, तालपुपरी सहित शहरी क्षेत्र के शुभंकरपुर और रत्नोपट्टी जैसे इलाके भी शामिल है। सरकार का मुख्य उद्देश्य इन क्षेत्रों में अनियोजित निर्माण पर रोक लगाना है। ताकि भविष्य में आधुनिक बुनियादी ढांचे जैसे चौड़ी सड़कें, बेहतर जल-निकासी, स्वास्थ्य सेवाएं और व्यावसायिक सुविधाओं के साथ इसे एक व्यवस्थित शहरी केंद्र के रूप में विकसित किया जा सके। प्रशासन का मानना है कि बिना रोक के तेजी से हो रहे प्लॉटिंग और निर्माण से भविष्य की योजना प्रभावित हो सकती थी। प्रशासनिक पहल और राजनीतिक भूमिका स्थानीय स्तर पर इस फैसले के पीछे लंबे समय से चल रहे सर्वे और निरीक्षण को अहम माना जा रहा है। जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा और डीएम कौशल कुमार ने कई बार इन क्षेत्रों का निरीक्षण किया था। इसके बाद जमीन लेन-देन पर प्रारंभिक रोक की प्रक्रिया शुरू हुई, जिसे अब राज्य कैबिनेट ने औपचारिक मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में लिए गए इस निर्णय को दरभंगा के दीर्घकालिक विकास से जोड़कर देखा जा रहा है।
व्यापारिक संगठनों ने जताई आपत्ति हालांकि इस फैसले पर प्रमंडलीय चेंबर ऑफ कॉमर्स ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि कई बार लोगों को अचानक जरूरत पड़ने पर जमीन बेचनी पड़ती है, ऐसे में पूर्ण प्रतिबंध से आम लोगों को परेशानी होगी। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार टाउनशिप के लिए सीधे जमीन अधिग्रहण या खरीद करे, लेकिन निजी लेन-देन पर पूरी तरह रोक नहीं लगानी चाहिए। स्थानीय जनप्रतिनिधियों का समर्थन जिला मुखिया संघ के अध्यक्ष राजीव चौधरी ने इस निर्णय का समर्थन किया है। उनका कहना है कि ग्रीनफील्ड टाउनशिप के निर्माण से क्षेत्र के जमीन मालिकों को उचित लाभ मिलेगा और दरभंगा का विकास नई दिशा में होगा। उन्होंने इसे ग्रेटर नोएडा की तर्ज पर विकसित होने वाली योजना बताते हुए कहा कि इससे शहर का विस्तार और आधुनिककरण तेजी से होगा। निवेशकों और भू-माफियाओं में हलचल एम्स निर्माण की घोषणा के बाद शोभन, मब्बी, सिमरी समेत आसपास के क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री तेजी से बढ़ गई थी। कई निवेशकों ने अपार्टमेंट और व्यावसायिक परियोजनाओं की योजना बनाकर जमीन खरीदी थी। लेकिन अब अचानक लगे प्रतिबंध से ऐसे निवेशकों और जमीन कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। प्रशासन की चेतावनी जिला प्रशासन ने साफ किया है कि प्रतिबंधित क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की अवैध खरीद-बिक्री या निर्माण कार्य पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। डीएम कौशल कुमार ने बताया कि एम्स के आसपास के इलाके को ही मिथिला टाउनशिप के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसके लिए जमीन चिन्हित कर ली गई है और फिलहाल सभी गतिविधियों पर नियंत्रण रखा जा रहा है। दरभंगा जिले में प्रस्तावित एम्स के आसपास के क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री पर लगी रोक और ग्रीनफील्ड टाउनशिप योजना को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है। राज्य सरकार ने सुनियोजित शहरीकरण के तहत दरभंगा समेत 11 जिलों में सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने का निर्णय लिया है। NH-27 फोरलेन के पास निर्माणाधीन राज्य के दूसरे एम्स के आसपास बहादुरपुर प्रखंड के चांडी, भरौल, बलिया मौजा सहित एक दर्जन गांवों को टाउनशिप क्षेत्र में शामिल किया गया है। इन इलाकों में फिलहाल जमीन की खरीद-बिक्री पूरी तरह रोक दी गई है, जो मास्टर प्लान अधिसूचित होने तक प्रभावी रहेगी। 12 हजार एकड़ में विकसित होगी मिथिला टाउनशिप सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत ‘मिथिला टाउनशिप’ को करीब 12 हजार एकड़ भूमि में विकसित किया जाएगा। इसका दायरा बहादुरपुर और हनुमाननगर प्रखंड से आगे बढ़कर तीन प्रखंडों के 102 गांवों तक होगा। चयनित गांवों में फूलबरिया, जलबार, महनौली, दलौर, शोभन, भरौल, चांडी, गोढ़ियारी, बलिया, तालपुपरी सहित शहरी क्षेत्र के शुभंकरपुर और रत्नोपट्टी जैसे इलाके भी शामिल है। सरकार का मुख्य उद्देश्य इन क्षेत्रों में अनियोजित निर्माण पर रोक लगाना है। ताकि भविष्य में आधुनिक बुनियादी ढांचे जैसे चौड़ी सड़कें, बेहतर जल-निकासी, स्वास्थ्य सेवाएं और व्यावसायिक सुविधाओं के साथ इसे एक व्यवस्थित शहरी केंद्र के रूप में विकसित किया जा सके। प्रशासन का मानना है कि बिना रोक के तेजी से हो रहे प्लॉटिंग और निर्माण से भविष्य की योजना प्रभावित हो सकती थी। प्रशासनिक पहल और राजनीतिक भूमिका स्थानीय स्तर पर इस फैसले के पीछे लंबे समय से चल रहे सर्वे और निरीक्षण को अहम माना जा रहा है। जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा और डीएम कौशल कुमार ने कई बार इन क्षेत्रों का निरीक्षण किया था। इसके बाद जमीन लेन-देन पर प्रारंभिक रोक की प्रक्रिया शुरू हुई, जिसे अब राज्य कैबिनेट ने औपचारिक मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में लिए गए इस निर्णय को दरभंगा के दीर्घकालिक विकास से जोड़कर देखा जा रहा है।
व्यापारिक संगठनों ने जताई आपत्ति हालांकि इस फैसले पर प्रमंडलीय चेंबर ऑफ कॉमर्स ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि कई बार लोगों को अचानक जरूरत पड़ने पर जमीन बेचनी पड़ती है, ऐसे में पूर्ण प्रतिबंध से आम लोगों को परेशानी होगी। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार टाउनशिप के लिए सीधे जमीन अधिग्रहण या खरीद करे, लेकिन निजी लेन-देन पर पूरी तरह रोक नहीं लगानी चाहिए। स्थानीय जनप्रतिनिधियों का समर्थन जिला मुखिया संघ के अध्यक्ष राजीव चौधरी ने इस निर्णय का समर्थन किया है। उनका कहना है कि ग्रीनफील्ड टाउनशिप के निर्माण से क्षेत्र के जमीन मालिकों को उचित लाभ मिलेगा और दरभंगा का विकास नई दिशा में होगा। उन्होंने इसे ग्रेटर नोएडा की तर्ज पर विकसित होने वाली योजना बताते हुए कहा कि इससे शहर का विस्तार और आधुनिककरण तेजी से होगा। निवेशकों और भू-माफियाओं में हलचल एम्स निर्माण की घोषणा के बाद शोभन, मब्बी, सिमरी समेत आसपास के क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री तेजी से बढ़ गई थी। कई निवेशकों ने अपार्टमेंट और व्यावसायिक परियोजनाओं की योजना बनाकर जमीन खरीदी थी। लेकिन अब अचानक लगे प्रतिबंध से ऐसे निवेशकों और जमीन कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। प्रशासन की चेतावनी जिला प्रशासन ने साफ किया है कि प्रतिबंधित क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की अवैध खरीद-बिक्री या निर्माण कार्य पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। डीएम कौशल कुमार ने बताया कि एम्स के आसपास के इलाके को ही मिथिला टाउनशिप के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसके लिए जमीन चिन्हित कर ली गई है और फिलहाल सभी गतिविधियों पर नियंत्रण रखा जा रहा है।


