ट्रंप की तारीफ, ईरान से दोस्ती और भारत से जंग: आसिम मुनीर के पाकिस्तान का ‘सुप्रीम बॉस’ बनने की पूरी कहानी !

ट्रंप की तारीफ, ईरान से दोस्ती और भारत से जंग: आसिम मुनीर के पाकिस्तान का ‘सुप्रीम बॉस’ बनने की पूरी कहानी !

Leadership : पाकिस्तान के सैन्य इतिहास में जनरल आसिम मुनीर का नाम अब सिर्फ एक सेना प्रमुख के तौर पर नहीं, बल्कि एक ‘फील्ड मार्शल’ और देश के पहले ‘चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज’ के रूप में दर्ज हो चुका है। साल 2025 में भारत के साथ हुए चार दिनों के युद्ध और फिर 2026 में ईरान-अमेरिका तनाव के बीच उनकी भूमिका ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक ताकतवर शख्सियत बना दिया है। ध्यान रहे कि मई 2025 में कश्मीर के पहलगाम में हुए एक हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव युद्ध में बदल गया था। भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया, जिसके जवाब में पाकिस्तान ने अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन किया। इस चार दिवसीय संघर्ष के बाद, मुनीर की कमान में पाकिस्तानी सेना के प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें ‘फील्ड मार्शल’ की उपाधि दी गई। वह जनरल अय्यूब खान के बाद इस पद तक पहुंचने वाले दूसरे सैन्य अधिकारी बने।

ट्रंप के ‘पसंदीदा फील्ड मार्शल’ और ईरान संकट

हाल ही में जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की स्थिति बनी, तो मुनीर ने एक कुशल मध्यस्थ की भूमिका निभाई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सार्वजनिक रूप से तारीफ की। ट्रंप ने उन्हें अपना “पसंदीदा फील्ड मार्शल” बताया। मुनीर की तेहरान यात्रा और वाशिंगटन के साथ उनके सीधे संवाद ने दोनों देशों के बीच युद्ध विराम करवाने में बड़ी भूमिका निभाई।

संवैधानिक बदलाव और असीमित शक्तियां

पाकिस्तान की संसद ने 27वें संवैधानिक संशोधन के जरिए असीम मुनीर के पद को और भी शक्तिशाली बना दिया है। अब वे सेना, नौसेना और वायुसेना के संयुक्त प्रमुख हैं। उनका कार्यकाल 2030 तक बढ़ा दिया गया है और उन्हें जीवन भर के लिए कानूनी कार्रवाई से छूट दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान में अब सत्ता का असली केंद्र पूरी तरह से सेना की ओर झुक गया है।

यह “एक व्यक्ति के हाथ में असीमित शक्ति” देने जैसा

बहरहाल, पाकिस्तान के इस नए सैन्य ढांचे पर विशेषज्ञों का कहना है कि यह “एक व्यक्ति के हाथ में असीमित शक्ति” देने जैसा है, जो लोकतंत्र के लिए भविष्य में चुनौती बन सकता है। आने वाले हफ्तों में मुनीर की अगली चुनौती आर्थिक स्थिरता और सऊदी अरब के साथ हुए रक्षा समझौतों को जमीन पर उतारने की होगी। विपक्ष का आरोप है कि जेल में बंद पूर्व पीएम इमरान खान की पार्टी को कुचलने और सेना की पकड़ मजबूत करने के लिए इन युद्धों का इस्तेमाल एक ढाल की तरह किया गया।

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