Daily Hidden Expenses: सुबह की जल्दी में एक कप चाय, 10-11 बजते ही लगती है भूख, दो फ्रेंड्स को साथ लिया और पहुंच गए नाश्ता करने.. तीन समोसे, तीन चाय या फिर हल्के नाश्ते के रूप में कुछ और। जो भी खाया बिल एक ने चुकाया… हर बार बारी-बारी से ही सही आप एक दिन में 50-100 रुपए तक खर्च कर रही हैं। ये कहानी काल्पनिक नहीं, बिल्कुल रियल है। तीन सहेलियों की इस कहानी (Daily Hidden Expenses) का हिस्सा अकेली ये तीनों ही नहीं, बल्कि भारत के हजारों-लाखों हो सकता है करोड़ों लोग हैं।
तो क्या आप भी सालाना 18000 से 36000 रुपए छोटे-छोटे रूप में खर्च कर रहे हैं? ये ऐसा हिडन एक्सपेंस है जिस पर आपका ध्यान भी नहीं जाता, फिर जरूरी खर्च तो अलग ही हैं। आपकी जेब के खालीपन को दूर कर देगी… संजना कुमार की ये रिपोर्ट…
छोटे-छोटे खर्च का गणित साफ है…
50 रुपए हर दिन- तो महीने के – 1500 और सालाना 18,000
100 रुपए हर दिन- तो महीने के- 3000 और सालाना 36,000
छोटी आदतों का इतना बड़ा असर
ऑफिस वर्किंग लोगों में से एक अनूप (बदला हुआ नाम), भोपाल का कहना है, हम दिन में तीन-चार बार चाय पी लेते हैं। एक चाय पर कहीं 10 रुपए का, तो कहीं 15 रुपए का खर्च आता है। तीन से चार चाय का मतलब हुआ 40-60 रुपए। लेकिन वाकई हमने कभी में सोचा ही नहीं कि ये खर्च महीने में कितना हो रहा है।
अगर मान लिया जाए कि एक दिन में 40 रुपए की 4 कप चाय भी आपको लगती है, तो दिन में एक बिस्किट का पैकेट या कुछ और भी साथ ले लिया जाता है, इसका खर्च भी जोड़ें तो 5-10 रुपए तक तो होना ही है। यानी आप चाय पर ही एक दिन में 50 रुपए तक खर्च (Daily Hidden Expenses) तो कर ही देते हैं।

टेक्नोलॉजी जिंदगी का हिस्सा, लेकिन न भूलें ये फिजूल खर्च
आजकल OTT, म्यूजिक ऐप्स और क्लाउड स्टोरेज जैसी सेवाओं ने हमारी जिंदगी को आसान बना दिया है। ये सुविधाएं हमारे जीवन का हिस्सा हैं। लेकिन ये मत भूलिए कि इन सेवाओं के लिए आपको पेमेंट करना पड़ रहा है। 199-299 रुपए का मासिक सब्सक्रिप्शन रोज के हिसाब से 7 रुपए से 10 रुपए तक बनता है। एक से ज्यादा ऐप आपके फोन में हैं, तो यह खर्च (Daily Hidden Expenses) और बढ़ जाता है।
सिंगरौली से भोपाल आकर रह रही एक स्टूडेंट रितिका अग्रवाल कहती हैं कि उनके मोबाइल में तीन ऐप हैं जिनका उन्होंने सब्सक्रिप्शन ले रखा है। लेकिन उन तीन ऐप में से वो एक का इस्तेमाल नहीं कर पाती हैं। लेकिन उन्होंने अब तक सब्सक्रिप्शन जारी रखा है। वे बोलीं कि वे यह तो भूल ही गई थीं कि उस ऐप के लिए उनके खाते से पर मंथ 49 रुपए कट रहे थे।
पानी की बोतल का खर्च (Daily Hidden Expenses)
हर दिन घर से बाहर खाना खाने वाले अनादि आर्यन का कहते हैं कि वे भोपाल में पिछले 2 महीने से हैं। अकेले होने के कारण घर पर खाना नहीं बनाते। लेकिन बड़ी गलती ये करते हैं कि घर से पीने का पानी साथ लेकर नहीं चलते। क्योंकि हाथ में बॉटल रखने के आदी नहीं हैं। अनादि बताते हैं कि वे जब भी दोपहर हो या रात खाना खाने जाते हैं, तो पानी की एक बॉटल अलग से खरीदते हैं, ताकि घर या ऑफिस के बाहर साफ पानी पी सकें।
20 रुपए की पानी बॉटल का इस्तेमाल वो सिर्फ खाने की टेबल पर ही करते हैं, लेकिन उनकी जेब से एक छोटे खर्च के रूप में दोनों टाइम की 20 रुपए की बॉटल के हिसाब से 40 रुपए का खर्च ऐसा है जिसे उन्होंने हल्के में लिया। जबकि महीने के हिसाब से ये खर्च 1200 तो सालाना 14 हजार से ऊपर पहुंच जाता है।

एक हिडन खर्च ये भी
घर में टीवी, सेट टॉप बॉक्स, चार्जर या अन्य बिजली के उपकरण अक्सर स्टेंडबाय मोड पर देखे जा सकते हैं। स्टेंड बाय मोड पर ये इलेक्ट्रिक सामान भले ही बंद दिखता है, लेकिन स्विच ऑफ न होने से इनकी बिजली की खपत (Daily Hidden Expenses) जारी रहती है।
भोपाल के इलेक्ट्रिशियन कपिल शर्मा कहते हैं कि घर में रखा हर इलेक्ट्रॉनिक सामान तब तक बिजली की खपत करता है, जब तक कि वह मेन स्विच बोर्ड से ऑन है। क्योंकि हर इलेक्ट्रॉनिक आइटम के वायर्स पिन में छोटे-छोटे इलेक्ट्रॉनिक सर्किट होते हैं जो हमेशा एक्टिव रहते हैं। ये स्टेंडबाय पावर या फेंटमलोड कहलाते हैं। एक मोबाइल चार्जर से बहुत ही मामूली करीब 0.1.0.5 वॉट बिजली की खपत होगी। यह खर्च दिनभर में भले ही बहुत कम दिखे, लेकिन जब ऐसी स्थिति लगातार बनी रहे और सिर्फ चार्जर ही नहीं, घर में रखे कई इलेक्ट्रॉनिक आइटम का यूज करते समय आप ऐसी ही लापरवाही करते हैं, तो ये सब जुड़कर आपका बड़ा खर्च बना देते हैं।
पैदल चलने की आदत छोड़ दी है
अगर आपकी पैदल चलने की आदत नहीं है। तो थोड़ी दूरी के लिए भी आप बस या ऑटो या फिर बाइक का सहारा लेते हैं। जरा सी दूरी आपका समय जरूर बचाती है, लेकिन आपकी जेब से 10-20 रुपए जरूर उड़ा ले जाती है। इस पर भी अगर आपके पास चेंज या छुट्टा नहीं है, तो आप 2-5 रुपए ज्यादा चुकाने से भी परहेज नहीं करेंगे। इस तरह के खर्च (Daily Hidden Expenses) को आप खर्च में गिनते ही नहीं हैं।
जयपुर की सीमा कुशवाह कहती हैं कि जरा सा पैदल चलने में उनकी सांसें फूलने लगती हैं। वहीं ऑफिस से शाम को 6 बजे निकलने पर घर पहुंचने की जल्दी भी उन्हें आधे से एक किमी की दूरी तय करने की परमिशन नहीं देती। वे ऑफिस से मेन रोड तक आती हैं और फिर रिक्शा का वेट करती हैं। बस आई तो बस से ही ये सफर तय करती हैं। और अक्सर रेपिडो के जरिये घर पहुंचती हैं। ऐसे में इस आधे किमी से एक किमी सफर के लिए उन्हें हर दिन 10-20 रुपए और रेपिडो से 50 रुपए तक चुकाने होते हैं। लेकिन वो इस खर्च को कभी गिनती ही नहीं हैं। जबकि 10-20 रुपए के हिसाब से ये खर्च बड़ा है- हर महीने के हिसाब से 300-600 और 50 रुपए के हिसाब से 1500 रुपए हर महीना।
आखिर क्यों नहीं दिखता ये खर्च
ये खर्च (Daily Hidden Expenses) आमतौर पर इसलिए नहीं गिने जाते क्योंकि, ये बहुत छोटे खर्च हैं, इसलिए ये हिडन खर्च नजरअंदाज कर दिए जाते हैं। डिजिटल पेमेंट और यूपीआई के इस दौर में ये नजरअंदाजी और भी आसान हो गई है। ऐसे में जेब से पैसे जा भी रहे हैं और उसका कोई दुख या दर्द भी नहीं है।
भोपाल के फाइनेंशियल एक्सपर्ट अनिमेष कर कहते हैं, ऐसे खर्च माइक्रो स्पेंडिंग कहलाते हैं। ये खर्च भले ही छोटे होते हैं, लेकिन लगातार होने पर ये बड़ा नुकसान देते हैं।
कैसे बचाएं रोज के ये खर्च, क्योंकि पैसे पेड़ पर नहीं लटकते

अनिमेष कहते हैं कि पैसे (Daily Hidden Expenses) को लेकर थोड़ी अवेयरनेस जरूरी है, क्योंकि पैसे पेड़ पर नहीं लटकते… आप या आपके पेरेंट्स इसे बहुत मेहनत से कमाते हैं। इसलिए अपने खर्च का हिसाब रखना सीखिए।
- घर से खाना और पानी साथ लेकर निकलिए, ताकि आप का एक्स्ट्रा खर्च न हो और आपकी सेहत भी बनी रहे।
- जिन ऐप्स का आप इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं उनका सब्सक्रिप्शन बंद करवा दें।
- बिजली का सामान स्टेंडबाय मॉड पर रखने से बेहतर है मेन स्विच बंद करके रखें, जरूरत पड़ने पर ऑन कर लें।
- हर दिन अपने एक-एक रुपए का हिसाब लिखने की आदत बनाइए।
- अपने रोजाना के खर्च को कम करने के लिए वीकली खर्च की एक सीमा बनाएं कि उससे ज्यादा खर्च नहीं करना है।

अनिमेष कहते हैं कि ये छोटी-छोटी आदतें बना लेंगे तो इसका बड़ा असर आपको साल के अंत में जरूर नजर आ जाएगा। कैसे बिना कमाई बढ़ाए आप बचत कर सकते हैं। क्योंकि हर रोज का 10-50 रुपए या 100 रुपए खर्च सुनने में भले ही छोटा लगता है, लेकिन साल के अंत तक यही रकम जुड़े तो हजारों रुपए हो जाएगी।
ये जानना भी जरूरी
National Sample Survey Office (NSSO) के हाउसहोल्ड कंजप्शन सर्वे (2023-24) के मुताबिक भारत में ग्रामीण क्षेत्रों में जहां प्रतिव्यक्ति खर्च 3500 से 4000 रुपए है, वहीं शहरी क्षेत्रों में प्रतिव्यक्ति औसत खर्च (Daily Hidden Expenses) 6000 से 7000 रुपए है। इसका मतलब ये है कि छोटे-छोटे डेली खर्च ऑवरऑल आपके बजट का हिस्सा होते हैं।
KPMG India और FICCI की मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि भारत में OTT यूजर्स का बड़ा हिस्सा 150-500 रुपए महीने खर्च करता है, यानी हर दिन का खर्च 5 रुपए से 15 रुपए तक।
वहीं कुछ अन्य रिपोर्ट्स बताती हैं कि शहरी भारत में लोग हर दिन 20-100 रुपए बाहर खाने-पीने में ही खर्च कर देते हैं। इस खर्च में चाय, पानी, स्नैक्स भी शामिल हैं। वहीं digital payments ट्रेंड के बाद लोग छोटे-छोटे खर्च ज्यादा कर रहे हैं। क्योंकि डिजिटल पेमेंट करने का असर वो महसूस ही नहीं कर पा रहे। जबकि जेब से पैसे खर्च करते समय वे संभलकर खर्च कर रहे थे।
अब जरा सोचिए इन छोटे-छोटे दिखने वाले खर्च से आप अपने बच्चों की फीस भर सकते हैं। किसी जरूरतमंद परिवार के लिए दो-तीन महीने का राशन ला सकते हैं। किसी एक जरूरतमंद बच्चे की पढ़ाई का खर्च उठा सकते हैं। ऐसे यूज करेंगे तो कभी पछताएंगे नहीं। ये छोटा दिखने वाला लेकिन बड़ा खर्च बिना हिसाब किए जाएगा, तो आज न सही, कल आपको दर्द जरूर देगा, आप बड़ा पछताओगे।


