बड़े अस्पतालों में कूलिंग सिस्टम फेल:अस्पताल या भट्ठी?…इलाज से पहले गर्मी से जंग लड़ रहे मरीज

बड़े अस्पतालों में कूलिंग सिस्टम फेल:अस्पताल या भट्ठी?…इलाज से पहले गर्मी से जंग लड़ रहे मरीज

पटना का तापमान 42 डिग्री के पार पहुंच चुका है, लेकिन यहां के बड़े अस्पतालों में कूलिंग सिस्टम फेल है। पहले से ही बीमारी और दर्द से जूझ रहे मरीजों की परेशानी भीषण गर्मी ने बढ़ा दी है। वार्डों में लगे एसी शोपीस बने हैं और कूलर पानी के बिना गर्म हवा फेंक रहे हैं। मरीज और उनके परिजन कैंपस में स्थित पेड़ के पास बैठकर ओपीडी में नंबर आने का इंतजार करते हैं। मरीज अपने घर से पंखे और बेना (हाथ का पंखा) लाने को मजबूर हैं। गर्दनीबाग अस्पताल यहां आधुनिक टीकाकरण केंद्र है, लेकिन बच्चों और परिजनों के बैठने की उचित व्यवस्था नहीं है। भीषण गर्मी के बीच बैठना पड़ता है। स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में गर्भवती माताओं की भारी भीड़ रहती है, लेकिन न तो उनके ठीक से बैठने का इंतजाम है और न ही गर्मी से बचाव की व्यवस्था। न्यू गार्डिनर रोड अस्पताल टीका दिलवाने आए बच्चों और परिजनों के लिए बैठने की उचित जगह नही हैं। बरामदे में लगी बेंच पर बैठना पड़ता है। यहां ग्रिल से तेज गर्म हवा अंदर आकर झुलसाती रहती है। वहां न तो पंखे की व्यवस्था है और न कूलर की। टीका दिलाने के बाद भी 20-25 मिनट वहीं बैठना होता है। अधीक्षकों के पास दलीलों की भरमार पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने कहा-ज्यादातर विभागों को नए भवन में शिफ्ट कर दिया गया है, जो पूरी तरह वातानुकूलित है। पुराने भवन में थोड़ी परेशानी है, उसे दूर किया जा रहा है। न्यू गार्डिनर रोड अस्पताल के अधीक्षक डॉ. मनोज कुमार सिन्हा ने कहा-भवन बेहद पुराना आैर जर्जर हो चुका है। मरीजों की भीड़ बढ़ रही है, लेकिन अस्पताल का मौजूदा ढांचा उसके अनुरूप नहीं है। इस वजह से मरीजों को उचित व्यवस्था नहीं मिल पाती। घर से पंखा लाने को मरीज और परिजन मजबूर इंदिरा गांधी आकस्मिक विभाग और राजेंद्र सर्जिकल ब्लॉक के वार्डों की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। यहां के नवनिर्मित भवन में तो सेंट्रलाइज्ड एसी है, लेकिन सर्जिकल इमरजेंसी, ऑर्थो, न्यूरो सर्जरी समेत कई वार्ड अब भी पुराने भवन में ही चल रहे हैं, जहां छत के पंखे इतनी धीमी गति से चलते हैं कि उनकी हवा नीचे तक नहीं पहुंच पाती। मरीजों को अपने घर से स्टैंड फैन या हाथ वाला पंखा (बेना) लाना पड़ रहा है। कई मरीज और उनके परिजन बरामदे या ठंडे फर्श पर लेटे रहते हैं आईजीआईएमएस में रोहतास से किडनी का इलाज कराने पहुंचे मरीज के परिजन बिंदू सिंह ने बताया कि सुबह 8 बजे से लाइन में लगे हैं। अस्पताल के अंदर इतनी उमस है कि स्वस्थ आदमी भी बीमार पड़ जाए। पसीने से कपड़े तर-बतर हैं और बैठने तक की सही जगह नहीं है। अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन में भी नंबर लगाने और रिपोर्ट लेने के लिए एक-दूसरे से ठेला-ठेली की स्थिति बनी रहती है। पटना का तापमान 42 डिग्री के पार पहुंच चुका है, लेकिन यहां के बड़े अस्पतालों में कूलिंग सिस्टम फेल है। पहले से ही बीमारी और दर्द से जूझ रहे मरीजों की परेशानी भीषण गर्मी ने बढ़ा दी है। वार्डों में लगे एसी शोपीस बने हैं और कूलर पानी के बिना गर्म हवा फेंक रहे हैं। मरीज और उनके परिजन कैंपस में स्थित पेड़ के पास बैठकर ओपीडी में नंबर आने का इंतजार करते हैं। मरीज अपने घर से पंखे और बेना (हाथ का पंखा) लाने को मजबूर हैं। गर्दनीबाग अस्पताल यहां आधुनिक टीकाकरण केंद्र है, लेकिन बच्चों और परिजनों के बैठने की उचित व्यवस्था नहीं है। भीषण गर्मी के बीच बैठना पड़ता है। स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में गर्भवती माताओं की भारी भीड़ रहती है, लेकिन न तो उनके ठीक से बैठने का इंतजाम है और न ही गर्मी से बचाव की व्यवस्था। न्यू गार्डिनर रोड अस्पताल टीका दिलवाने आए बच्चों और परिजनों के लिए बैठने की उचित जगह नही हैं। बरामदे में लगी बेंच पर बैठना पड़ता है। यहां ग्रिल से तेज गर्म हवा अंदर आकर झुलसाती रहती है। वहां न तो पंखे की व्यवस्था है और न कूलर की। टीका दिलाने के बाद भी 20-25 मिनट वहीं बैठना होता है। अधीक्षकों के पास दलीलों की भरमार पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने कहा-ज्यादातर विभागों को नए भवन में शिफ्ट कर दिया गया है, जो पूरी तरह वातानुकूलित है। पुराने भवन में थोड़ी परेशानी है, उसे दूर किया जा रहा है। न्यू गार्डिनर रोड अस्पताल के अधीक्षक डॉ. मनोज कुमार सिन्हा ने कहा-भवन बेहद पुराना आैर जर्जर हो चुका है। मरीजों की भीड़ बढ़ रही है, लेकिन अस्पताल का मौजूदा ढांचा उसके अनुरूप नहीं है। इस वजह से मरीजों को उचित व्यवस्था नहीं मिल पाती। घर से पंखा लाने को मरीज और परिजन मजबूर इंदिरा गांधी आकस्मिक विभाग और राजेंद्र सर्जिकल ब्लॉक के वार्डों की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। यहां के नवनिर्मित भवन में तो सेंट्रलाइज्ड एसी है, लेकिन सर्जिकल इमरजेंसी, ऑर्थो, न्यूरो सर्जरी समेत कई वार्ड अब भी पुराने भवन में ही चल रहे हैं, जहां छत के पंखे इतनी धीमी गति से चलते हैं कि उनकी हवा नीचे तक नहीं पहुंच पाती। मरीजों को अपने घर से स्टैंड फैन या हाथ वाला पंखा (बेना) लाना पड़ रहा है। कई मरीज और उनके परिजन बरामदे या ठंडे फर्श पर लेटे रहते हैं आईजीआईएमएस में रोहतास से किडनी का इलाज कराने पहुंचे मरीज के परिजन बिंदू सिंह ने बताया कि सुबह 8 बजे से लाइन में लगे हैं। अस्पताल के अंदर इतनी उमस है कि स्वस्थ आदमी भी बीमार पड़ जाए। पसीने से कपड़े तर-बतर हैं और बैठने तक की सही जगह नहीं है। अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन में भी नंबर लगाने और रिपोर्ट लेने के लिए एक-दूसरे से ठेला-ठेली की स्थिति बनी रहती है।  

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