गुजरात हाईकोर्ट ने बुधवार को दुष्कर्म के एक आरोपी की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। बचाव पक्ष ने दलील दी थी कि सहमति से बने शारीरिक संबंध के बाद शादी से इनकार करना दुष्कर्म नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने इसी दलील को मान्य रखते हुए आरोपी की गिरफ्तारी पर स्टे के साथ चार्जशीट सहित आगे की अन्य कार्रवाई पर भी रोक लगा दी। शिकायत दबाव बनाने के लिए की गई थी
आरोपी पक्ष के वकील अश्विन जोगड़िया और राजेन जाधव ने हाईकोर्ट में दलील दी कि पारस्परिक सहमति से बने संबंध के बाद शादी से इनकार बलात्कार नहीं है। पीड़िता की ओर से यह शिकायत 18 साल देर से की गई है। इससे साबित होता है कि यह शिकायत दबाव बनाने के लिए की गई है। वर्ष 2008 में हुई थी दोनों की मुलाकात
सूरत शहर के डिंडोली पुलिस स्टेशन में 27 फरवरी 2026 को एक अस्पताल में रिसेप्शनिस्ट 45 वर्षीय महिला ने शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में कहा था कि 44 वर्षीय विपुल भायाणी ने शादी का झांसा देकर उसके साथ 18 सालों तक दुष्कर्म किया। पुलिस में की गई शिकायत के अनुसार आरोपी के साथ पीड़िता का परिचय वर्ष 2008 में हुआ था। वर्ष 2013 में पीड़िता ने एक बेटे को जन्म दिया। उसके बाद पीड़िता ने आरोपी से शादी करने के लिए कहा तो उसने इनकार कर दिया तो मामला दर्ज करा दिया। केस दर्ज होने के बाद आरोपी युवक ने गिरफ्तारी से बचने के लिए गुजरात हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।


