IGIMS में बिना सर्जरी 16 सेमी गांठ निकाली गई:एंडोस्कोपी तकनीक से पैंक्रियाटाइटिस का फ्री इलाज, निजी अस्पतालों में 2 लाख तक खर्च

IGIMS में बिना सर्जरी 16 सेमी गांठ निकाली गई:एंडोस्कोपी तकनीक से पैंक्रियाटाइटिस का फ्री इलाज, निजी अस्पतालों में 2 लाख तक खर्च

पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग ने एक मरीज के पैंक्रियाज से बिना सर्जरी 16 सेंटीमीटर की गांठ सफलतापूर्वक निकाली है। यह जटिल प्रक्रिया एंडोस्कोपी के जरिए की गई और मरीज का इलाज आयुष्मान भारत योजना के तहत पूरी तरह नि:शुल्क हुआ। इस उपलब्धि के साथ IGIMS ने यह साबित कर दिया है कि सरकारी अस्पतालों में भी अत्याधुनिक और प्रभावी इलाज संभव है। आधुनिक LAMS तकनीक से गांठ निकाला मरीज को लंबे समय से पेट में दर्द और सूजन की शिकायत थी। जांच में गंभीर पैंक्रियाटाइटिस का पता चला, जिसके कारण अग्नाशय के आसपास गंदे तरल पदार्थ और मृत ऊतकों (नेक्रोसिस) की बड़ी गांठ बन गई थी। ऐसे मामलों में आमतौर पर जोखिम भरी और महंगी ओपन सर्जरी की आवश्यकता होती है। IGIMS के डॉक्टरों ने आधुनिक LAMS (ल्यूमेन-अपोज़िंग मेटल स्टेंट) तकनीक का उपयोग किया। इस एंडोस्कोपिक प्रक्रिया में पेट के अंदर एक विशेष स्टेंट डाला जाता है, जिससे जमा हुआ तरल पदार्थ और मृत ऊतक बाहर निकल जाते हैं। इसमें शरीर पर कोई चीरा या टांके नहीं लगाए जाते हैं। इस जटिल प्रक्रिया को गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. संजीव कुमार झा के नेतृत्व में पूरा किया गया। टीम में डॉ. भाग्यमणि, डॉ. ऋषव और तकनीकी सहयोगी जितेंद्र, रिंकी, याशिका, हर्षित तथा गौरव शामिल थे। IGIMS में फ्री इलाज, निजी अस्पतालों में 2 लाख तक खर्च डॉ. झा ने बताया कि पैंक्रियाटाइटिस के गंभीर मामलों में शरीर के अंदर संक्रमणयुक्त तरल और मृत ऊतक जमा हो जाते हैं। यदि समय रहते इन्हें नहीं निकाला जाए तो यह जानलेवा साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि पहले इसके लिए बड़े ऑपरेशन की आवश्यकता होती थी, लेकिन अब एंडोस्कोपिक तकनीक से यह प्रक्रिया सुरक्षित और तेजी से की जा सकती है। निजी अस्पतालों में इस तरह के इलाज पर आमतौर पर 1.5 लाख से 2 लाख रुपये तक का खर्च आता है। आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीज को यह सुविधा पूरी तरह मुफ्त मिली, जिससे उन्हें आर्थिक बोझ से मुक्ति मिली। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए नई उम्मीद IGIMS प्रशासन ने इसे राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि बताई हैं। डिप्टी डायरेक्टर डॉ. विभूति प्रसाद सिन्हा ने कहा कि, ‘यह तकनीक बिहार के आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। अब राज्य में ही विश्वस्तरीय इलाज उपलब्ध हो रहा है, जिससे लोगों को बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा।’

तेजी से रिकवरी, बेहतर परिणाम इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि मरीज को ज्यादा दिनों तक अस्पताल में भर्ती नहीं रहना पड़ता। चूंकि इसमें कोई बड़ा घाव नहीं होता, इसलिए संक्रमण का खतरा भी कम रहता है और मरीज जल्दी सामान्य जीवन में लौट सकता है। डॉक्टरों ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी को लंबे समय से पेट दर्द, सूजन, उल्टी या पाचन संबंधी गंभीर समस्या हो रही है तो उसे नजरअंदाज न करें। पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग ने एक मरीज के पैंक्रियाज से बिना सर्जरी 16 सेंटीमीटर की गांठ सफलतापूर्वक निकाली है। यह जटिल प्रक्रिया एंडोस्कोपी के जरिए की गई और मरीज का इलाज आयुष्मान भारत योजना के तहत पूरी तरह नि:शुल्क हुआ। इस उपलब्धि के साथ IGIMS ने यह साबित कर दिया है कि सरकारी अस्पतालों में भी अत्याधुनिक और प्रभावी इलाज संभव है। आधुनिक LAMS तकनीक से गांठ निकाला मरीज को लंबे समय से पेट में दर्द और सूजन की शिकायत थी। जांच में गंभीर पैंक्रियाटाइटिस का पता चला, जिसके कारण अग्नाशय के आसपास गंदे तरल पदार्थ और मृत ऊतकों (नेक्रोसिस) की बड़ी गांठ बन गई थी। ऐसे मामलों में आमतौर पर जोखिम भरी और महंगी ओपन सर्जरी की आवश्यकता होती है। IGIMS के डॉक्टरों ने आधुनिक LAMS (ल्यूमेन-अपोज़िंग मेटल स्टेंट) तकनीक का उपयोग किया। इस एंडोस्कोपिक प्रक्रिया में पेट के अंदर एक विशेष स्टेंट डाला जाता है, जिससे जमा हुआ तरल पदार्थ और मृत ऊतक बाहर निकल जाते हैं। इसमें शरीर पर कोई चीरा या टांके नहीं लगाए जाते हैं। इस जटिल प्रक्रिया को गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. संजीव कुमार झा के नेतृत्व में पूरा किया गया। टीम में डॉ. भाग्यमणि, डॉ. ऋषव और तकनीकी सहयोगी जितेंद्र, रिंकी, याशिका, हर्षित तथा गौरव शामिल थे। IGIMS में फ्री इलाज, निजी अस्पतालों में 2 लाख तक खर्च डॉ. झा ने बताया कि पैंक्रियाटाइटिस के गंभीर मामलों में शरीर के अंदर संक्रमणयुक्त तरल और मृत ऊतक जमा हो जाते हैं। यदि समय रहते इन्हें नहीं निकाला जाए तो यह जानलेवा साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि पहले इसके लिए बड़े ऑपरेशन की आवश्यकता होती थी, लेकिन अब एंडोस्कोपिक तकनीक से यह प्रक्रिया सुरक्षित और तेजी से की जा सकती है। निजी अस्पतालों में इस तरह के इलाज पर आमतौर पर 1.5 लाख से 2 लाख रुपये तक का खर्च आता है। आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीज को यह सुविधा पूरी तरह मुफ्त मिली, जिससे उन्हें आर्थिक बोझ से मुक्ति मिली। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए नई उम्मीद IGIMS प्रशासन ने इसे राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि बताई हैं। डिप्टी डायरेक्टर डॉ. विभूति प्रसाद सिन्हा ने कहा कि, ‘यह तकनीक बिहार के आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। अब राज्य में ही विश्वस्तरीय इलाज उपलब्ध हो रहा है, जिससे लोगों को बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा।’

तेजी से रिकवरी, बेहतर परिणाम इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि मरीज को ज्यादा दिनों तक अस्पताल में भर्ती नहीं रहना पड़ता। चूंकि इसमें कोई बड़ा घाव नहीं होता, इसलिए संक्रमण का खतरा भी कम रहता है और मरीज जल्दी सामान्य जीवन में लौट सकता है। डॉक्टरों ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी को लंबे समय से पेट दर्द, सूजन, उल्टी या पाचन संबंधी गंभीर समस्या हो रही है तो उसे नजरअंदाज न करें।  

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