सिल्क सिटी भागलपुर में गर्मी से लोगों का हाल बेहाल है। अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के करीब है। दोपहर के समय लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो रहा है है। लू को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। जैसे-जैसे गर्मी का प्रकोप तेज होता जा रहा है, वैसे-वैसे लोगों की जीवनशैली में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। गर्मी से राहत पाने के लिए लोग अब पारंपरिक और प्राकृतिक उपायों की ओर लौट रहे हैं। इसका असर बाजारों में साफ दिख रहा है। मिट्टी के घड़े और सुराही की मांग अचानक बढ़ गई है। शहर के प्रमुख बाजार घंटाघर और आसपास के इलाकों में इन दिनों मिट्टी के बर्तनों की दुकानों पर रौनक देखी जा रही है। शाम के समय ग्राहकों की भीड़ दुकानदार दिलीप शर्मा ने बताया कि पिछले एक सप्ताह में बिक्री में काफी इजाफा हुआ है। खासकर शाम के समय ग्राहकों की भीड़ अधिक उमड़ रहती है, जब लोग दिनभर की तपिश के बाद ठंडा पानी पीने के लिए बाजार पहुंचते हैं। डिजाइनदार सुराही की मांग घंटाघर के पास दुकान लगाने वाले दीपक कुमार बताते हैं कि गर्मी बढ़ते ही घड़े और सुराही की बिक्री तेज हो गई है। पहले लोग फ्रिज के पानी पर ज्यादा निर्भर थे, लेकिन अब लोग फिर से मिट्टी के बर्तनों की ओर लौट रहे हैं। ग्राहक खास तौर पर बड़े आकार के घड़े और डिजाइनदार सुराही की मांग कर रहे हैं। मिट्टी के घड़े का पानी न केवल प्राकृतिक रूप से ठंडा रहता है, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होता है। यह पाचन तंत्र के लिए भी बेहतर माना जाता है। यही वजह है कि लोग अब कृत्रिम ठंडक के बजाय प्राकृतिक ठंडक को प्राथमिकता देने लगे हैं। कुम्हारों के लिए राहत ग्राहक पंकज ने बताया कि मिट्टी के घड़े का पानी पीने से न सिर्फ प्यास बेहतर तरीके से बुझती है, बल्कि शरीर को भी सुकून मिलता है। यह बिजली की बचत का भी एक सस्ता और टिकाऊ विकल्प है। इस बढ़ती मांग का सीधा लाभ स्थानीय कुम्हारों को मिल रहा है। लंबे समय से आर्थिक संकट झेल रहे कुम्हारों के लिए यह सीजन राहत लेकर आया है। पारंपरिक व्यवसाय पटरी पर आने की उम्मीद गांव और शहर के कुम्हार दिन-रात मेहनत कर घड़े और सुराही तैयार कर रहे हैं, ताकि लोगों की डिमांड पूरी की जा सके। कुम्हारों का कहना है कि अगर इसी तरह लोगों का रुझान बना रहा तो उनका पारंपरिक व्यवसाय फिर से पटरी पर आ सकता है। गर्मी के इस मौसम में मिट्टी के बर्तनों की बढ़ती लोकप्रियता न केवल लोगों की बदलती पसंद को दर्शा रही है, बल्कि यह पारंपरिक संस्कृति के पुनर्जागरण का भी संकेत दे रही है। सिल्क सिटी भागलपुर में गर्मी से लोगों का हाल बेहाल है। अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के करीब है। दोपहर के समय लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो रहा है है। लू को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। जैसे-जैसे गर्मी का प्रकोप तेज होता जा रहा है, वैसे-वैसे लोगों की जीवनशैली में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। गर्मी से राहत पाने के लिए लोग अब पारंपरिक और प्राकृतिक उपायों की ओर लौट रहे हैं। इसका असर बाजारों में साफ दिख रहा है। मिट्टी के घड़े और सुराही की मांग अचानक बढ़ गई है। शहर के प्रमुख बाजार घंटाघर और आसपास के इलाकों में इन दिनों मिट्टी के बर्तनों की दुकानों पर रौनक देखी जा रही है। शाम के समय ग्राहकों की भीड़ दुकानदार दिलीप शर्मा ने बताया कि पिछले एक सप्ताह में बिक्री में काफी इजाफा हुआ है। खासकर शाम के समय ग्राहकों की भीड़ अधिक उमड़ रहती है, जब लोग दिनभर की तपिश के बाद ठंडा पानी पीने के लिए बाजार पहुंचते हैं। डिजाइनदार सुराही की मांग घंटाघर के पास दुकान लगाने वाले दीपक कुमार बताते हैं कि गर्मी बढ़ते ही घड़े और सुराही की बिक्री तेज हो गई है। पहले लोग फ्रिज के पानी पर ज्यादा निर्भर थे, लेकिन अब लोग फिर से मिट्टी के बर्तनों की ओर लौट रहे हैं। ग्राहक खास तौर पर बड़े आकार के घड़े और डिजाइनदार सुराही की मांग कर रहे हैं। मिट्टी के घड़े का पानी न केवल प्राकृतिक रूप से ठंडा रहता है, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होता है। यह पाचन तंत्र के लिए भी बेहतर माना जाता है। यही वजह है कि लोग अब कृत्रिम ठंडक के बजाय प्राकृतिक ठंडक को प्राथमिकता देने लगे हैं। कुम्हारों के लिए राहत ग्राहक पंकज ने बताया कि मिट्टी के घड़े का पानी पीने से न सिर्फ प्यास बेहतर तरीके से बुझती है, बल्कि शरीर को भी सुकून मिलता है। यह बिजली की बचत का भी एक सस्ता और टिकाऊ विकल्प है। इस बढ़ती मांग का सीधा लाभ स्थानीय कुम्हारों को मिल रहा है। लंबे समय से आर्थिक संकट झेल रहे कुम्हारों के लिए यह सीजन राहत लेकर आया है। पारंपरिक व्यवसाय पटरी पर आने की उम्मीद गांव और शहर के कुम्हार दिन-रात मेहनत कर घड़े और सुराही तैयार कर रहे हैं, ताकि लोगों की डिमांड पूरी की जा सके। कुम्हारों का कहना है कि अगर इसी तरह लोगों का रुझान बना रहा तो उनका पारंपरिक व्यवसाय फिर से पटरी पर आ सकता है। गर्मी के इस मौसम में मिट्टी के बर्तनों की बढ़ती लोकप्रियता न केवल लोगों की बदलती पसंद को दर्शा रही है, बल्कि यह पारंपरिक संस्कृति के पुनर्जागरण का भी संकेत दे रही है।


