मधुबनी के सीमावर्ती बाजारों में सन्नाटा:नेपाल ने 100 रुपए से अधिक सामान पर टैक्स लगाया, विरोध शुरू

मधुबनी के सीमावर्ती बाजारों में सन्नाटा:नेपाल ने 100 रुपए से अधिक सामान पर टैक्स लगाया, विरोध शुरू

नेपाल की नई सरकार ने भारत से नेपाल ले जाए जाने वाले 100 रुपये से अधिक मूल्य के सामान पर अनिवार्य टैक्स लगाने का नियम लागू किया है। इस नियम के कारण मधुबनी जिले के सीमावर्ती बाजारों में कारोबार पूरी तरह ठप हो गया है। नेपाल सरकार की इस नई कस्टम नीति का देश के भीतर भी विरोध शुरू हो गया है। जनकपुर धाम के लोगों ने इस पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। भिट्ठा मोर, सिरहा और जनकपुर सहित कई स्थानों पर लोग नई कस्टम नीति के विरोध में सड़कों पर उतर आए हैं और इसे वापस लेने की मांग कर रहे हैं। नेपाली पुलिस और नागरिकों के बीच झड़पें भी हुई कई जगहों पर नेपाली पुलिस और नागरिकों के बीच झड़पें भी हुई हैं। इस नई व्यवस्था का सबसे अधिक असर मधुबनी जिले के हरलाखी प्रखंड के पिपरौन-जटही, माधवापुर-मटिहानी, सिरहा-मरार और लौकहा-लौकही सीमा पर दिख रहा है। मधुबनी जिले के माधवापुर, पिपरौन, हरिने, दुहवी, महीनाथपुर, खौना, जयनगर, लदनिया, लौकहा और लौकही बाजार पूरी तरह से नेपाल के खरीदारों पर निर्भर हैं। पिछले एक सप्ताह से इन बाजारों में सीमा पर सख्ती के कारण सन्नाटा पसरा हुआ है। भारतीय बाजार के व्यापारी प्रभावित होंगे व्यापारी चिंतित हैं कि यदि नेपाल सरकार की यह नई कस्टम नीति लंबे समय तक जारी रहती है, तो भारत के सीमावर्ती बाजारों के साथ-साथ नेपाल की सीमा से लगे सभी भारतीय बाजार के व्यापारी प्रभावित होंगे। जटही बॉर्डर पर जयनगर के ध्यानी महरा ने बताया कि उनकी बेटी की नेपाल में शादी है और वे दहेज में पलंग लेकर जनकपुर जा रहे थे। उन्हें जटही बॉर्डर पर रोक दिया गया और 20 हजार रुपये टैक्स मांगा गया, जबकि पलंग की कीमत भी 20 हजार रुपये थी। उन्होंने कहा कि यह नियम ‘रोटी-बेटी’ के संबंधों पर भी असर डाल रहा है। हरिने गांव के मोहन झा, बउअन झा, भागीरथ झा और श्री नारायण साह ने बताया कि नेपाल में नए नियम से भारतीय सीमावर्ती बाजारों पर भारी असर पड़ा है। नेपाली ग्राहकों का आना बिल्कुल बंद हो गया है। श्रावण झा ने बताया कि उनका व्यवसाय पूरी तरह चौपट हो गया है और दिन भर में एक हजार रुपये का सामान भी नहीं बिक रहा है। नेपाल की नई सरकार ने भारत से नेपाल ले जाए जाने वाले 100 रुपये से अधिक मूल्य के सामान पर अनिवार्य टैक्स लगाने का नियम लागू किया है। इस नियम के कारण मधुबनी जिले के सीमावर्ती बाजारों में कारोबार पूरी तरह ठप हो गया है। नेपाल सरकार की इस नई कस्टम नीति का देश के भीतर भी विरोध शुरू हो गया है। जनकपुर धाम के लोगों ने इस पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। भिट्ठा मोर, सिरहा और जनकपुर सहित कई स्थानों पर लोग नई कस्टम नीति के विरोध में सड़कों पर उतर आए हैं और इसे वापस लेने की मांग कर रहे हैं। नेपाली पुलिस और नागरिकों के बीच झड़पें भी हुई कई जगहों पर नेपाली पुलिस और नागरिकों के बीच झड़पें भी हुई हैं। इस नई व्यवस्था का सबसे अधिक असर मधुबनी जिले के हरलाखी प्रखंड के पिपरौन-जटही, माधवापुर-मटिहानी, सिरहा-मरार और लौकहा-लौकही सीमा पर दिख रहा है। मधुबनी जिले के माधवापुर, पिपरौन, हरिने, दुहवी, महीनाथपुर, खौना, जयनगर, लदनिया, लौकहा और लौकही बाजार पूरी तरह से नेपाल के खरीदारों पर निर्भर हैं। पिछले एक सप्ताह से इन बाजारों में सीमा पर सख्ती के कारण सन्नाटा पसरा हुआ है। भारतीय बाजार के व्यापारी प्रभावित होंगे व्यापारी चिंतित हैं कि यदि नेपाल सरकार की यह नई कस्टम नीति लंबे समय तक जारी रहती है, तो भारत के सीमावर्ती बाजारों के साथ-साथ नेपाल की सीमा से लगे सभी भारतीय बाजार के व्यापारी प्रभावित होंगे। जटही बॉर्डर पर जयनगर के ध्यानी महरा ने बताया कि उनकी बेटी की नेपाल में शादी है और वे दहेज में पलंग लेकर जनकपुर जा रहे थे। उन्हें जटही बॉर्डर पर रोक दिया गया और 20 हजार रुपये टैक्स मांगा गया, जबकि पलंग की कीमत भी 20 हजार रुपये थी। उन्होंने कहा कि यह नियम ‘रोटी-बेटी’ के संबंधों पर भी असर डाल रहा है। हरिने गांव के मोहन झा, बउअन झा, भागीरथ झा और श्री नारायण साह ने बताया कि नेपाल में नए नियम से भारतीय सीमावर्ती बाजारों पर भारी असर पड़ा है। नेपाली ग्राहकों का आना बिल्कुल बंद हो गया है। श्रावण झा ने बताया कि उनका व्यवसाय पूरी तरह चौपट हो गया है और दिन भर में एक हजार रुपये का सामान भी नहीं बिक रहा है।  

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