अनूपपुर जिले में छत्तीसगढ़ से आए हाथियों का दल पिछले 110 दिनों से डेरा डाले हुए है। तीन हाथियों का एक समूह और एक अकेला हाथी अलग-अलग क्षेत्रों में विचरण कर ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बन गए हैं। हाथियों के उत्पात से दर्जनों गांवों के लोग दहशत में हैं और अपनी फसलों व घरों की सुरक्षा के लिए रातभर जागने को मजबूर हैं। वर्तमान में चार हाथी दो समूहों में बंटकर उत्पात मचा रहे हैं। तीन हाथियों का मुख्य दल 116 दिन पहले छत्तीसगढ़ के मरवाही से अनूपपुर पहुंचा था। यह दल डिंडौरी और शहडोल होते हुए अब जैतहरी और राजेंद्रग्राम के जंगलों में घूम रहा है। वहीं, एक अकेला हाथी लगभग 10 दिन पहले अपने साथियों की तलाश में जिले में दाखिल हुआ, जो अब जिला मुख्यालय से 5 से 8 किलोमीटर दूर स्थित गांवों में सक्रिय है। हाथी दिन के समय धनगवां और पोंड़ी बीट के घने जंगलों में आराम करते हैं, लेकिन सूरज ढलते ही वे बस्तियों की ओर रुख कर लेते हैं। जैतहरी के कुकुरगोड़ा, बेल्हाटोला और पड़रिया में हाथियों ने छोट्टन कोल और गुलाब सिंह के घरों को निशाना बनाया। बरबसपुर के भोलगढ़ में बारेलाल पाव का घर ढहा दिया गया, जबकि ग्राम चटुआ में रामलाल सिंह का मिट्टी का घर तोड़ दिया गया। हाथियों ने कई किसानों की फसलों को भी रौंद दिया है। इनमें रामलाल, दिनेश और भूषण राठौर जैसे किसान शामिल हैं। शंभू पटेल के खेत में रखे गेहूं और केमला सिंह के केले-गन्ने की फसल को भी हाथियों ने चट कर दिया। रामलाल सिंह के घर में घुसकर अरहर और चना खा लिया गया। इसके अतिरिक्त, हाथियों ने वन विभाग द्वारा लगाए गए सुरक्षा खंभों और तारों को भी उखाड़ फेंका है। शुक्रवार रात खांडा के खोलगढ़ी में स्थिति गंभीर हो गई, जब एक हाथी ने प्रभात पाव के घर की आरसीसी शीट तोड़ दी। घर के भीतर सो रहा एक वृद्ध व्यक्ति मलबे और हाथी के हमले से बाल-बाल बचा, जिसे परिजनों ने तुरंत सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। फिलहाल, हाथी पोंड़ी बीट और धनगवां के जंगलों में डेरा डाले हुए हैं।


