आज के दौर में सोशल मीडिया पर छोटी-सी घटना भी बड़ी बहस का कारण बन जाती है, और ऐसा ही एक मामला हाल ही में अंतरराष्ट्रीय शतरंज प्रतियोगिता के दौरान देखने को मिला है। जर्मनी में आयोजित ग्रेंके फ्रीस्टाइल ओपन के दौरान एक मामूली सा क्षण सोशल मीडिया पर विवाद का विषय बन गया है।बता दें कि भारत की ग्रैंडमास्टर हरिका द्रोणावल्ली और उज्बेकिस्तान के खिलाड़ी नोदिरबेक याकुब्बोएव के बीच मैच खत्म होने के बाद पारंपरिक हाथ मिलाने की जगह नमस्ते करने का दृश्य वायरल हो गया। इस पर सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं, जहां कुछ लोगों ने इसे सांस्कृतिक सम्मान बताया, तो कुछ ने इसे अस्वीकार करने के तौर पर देखा।मौजूद जानकारी के अनुसार, इस पूरे मामले पर अब हरिका द्रोणावल्ली ने खुद सामने आकर स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि इस घटना को गलत तरीके से पेश किया गया और इसमें किसी भी तरह की असम्मानजनक बात नहीं थी।गौरतलब है कि हरिका ने बताया कि मैच शुरू होने से पहले ही याकुब्बोएव ने उन्हें हाथ न मिलाने की अपनी व्यक्तिगत वजह बता दी थी, जिसे उन्होंने पूरी तरह समझते हुए स्वीकार कर लिया था। मैच के अंत में हाथ बढ़ाना केवल उनकी आदत का हिस्सा था, क्योंकि लंबे समय से खेलते हुए यह एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया बन चुकी है।हरिका के मुताबिक, जैसे ही याकुब्बोएव ने नमस्ते किया, उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने तुरंत माफी भी मांगी। उन्होंने यह भी कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कैमरे में कैद यह छोटा सा पल गलत संदर्भ में वायरल हो गया और एक खिलाड़ी को बेवजह आलोचना का सामना करना पड़ा।बता दें कि याकुब्बोएव पहले भी इसी तरह की स्थिति का सामना कर चुके हैं, जहां उन्होंने अपनी धार्मिक मान्यताओं के चलते महिला खिलाड़ियों से शारीरिक संपर्क से परहेज किया था। ऐसे मामलों में उन्होंने पहले भी स्पष्ट किया है कि यह उनका व्यक्तिगत विश्वास है, न कि किसी के प्रति असम्मान।गौरतलब है कि इस पूरे विवाद के बीच हरिका का शानदार प्रदर्शन भी चर्चा में रहा। उन्होंने इस प्रतियोगिता में शीर्ष महिला पुरस्कार जीता और आगामी विश्व स्तर की प्रतियोगिता के लिए क्वालीफाई किया।हालांकि, हरिका ने इस बात पर चिंता जताई कि इस तरह की छोटी घटनाएं असली खेल उपलब्धियों को पीछे छोड़ देती हैं। उनका मानना है कि खिलाड़ियों के व्यक्तिगत विश्वास और भावनाओं को समझना जरूरी है, ताकि किसी को अनावश्यक मानसिक दबाव का सामना न करना पड़े।
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