छोटे व्यापारियों को 2 करोड़ तक मिलेगा आसान लोन:ब्याज में 6% तक छूट,ऑनलाइन आवेदन शुरू; SSO आईडी से करें अप्लाई

छोटे व्यापारियों को 2 करोड़ तक मिलेगा आसान लोन:ब्याज में 6% तक छूट,ऑनलाइन आवेदन शुरू; SSO आईडी से करें अप्लाई

राज्य सरकार ने छोटे और मध्यम व्यापारियों को बढ़ावा देने के लिए राजस्थान ट्रेड प्रमोशन पॉलिसी 2025 के तहत ऑनलाइन आवेदन शुरू कर दिए हैं। इस पॉलिसी में व्यापारी अपनी SSO ID या ई-मित्र के जरिए आवेदन कर सकते हैं। सरकार का फोकस इस पॉलिसी के माध्यम से छोटे कारोबारियों को आसान लोन, बाजार और नई तकनीक से जोड़ने पर है, ताकि वे अपना व्यापार बढ़ा सकें। इस योजना के तहत खुदरा व्यापारियों को 2 करोड़ रुपए तक का लोन मिल सकेगा। साथ ही सरकार 6 प्रतिशत तक ब्याज में राहत देगी। इंश्योरेंस प्रीमियम पर 50 प्रतिशत तक की मदद भी मिलेगी। इससे प्रदेश के लाखों व्यापारियों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। 10.5 लाख व्यापारियों को मिलेगा फायदा उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने बताया कि यह पॉलिसी प्रदेश के व्यापार क्षेत्र के लिए नई पहल है, जिससे छोटे व्यापारियों को बड़े बाजार, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और लॉजिस्टिक नेटवर्क तक पहुंच मिल सकेगी। उन्होंने बताया कि इससे निवेश बढ़ेगा और रोजगार के नए मौके भी तैयार होंगे। इस पॉलिसी का फायदा प्रदेश के 10.5 लाख से ज्यादा रिटेल स्टोर्स और व्यापारियों को मिलेगा। सरकार का मकसद छोटे कारोबारियों को मजबूत करना, उन्हें आसान फाइनेंस दिलाना और बाजार से जोड़ना है, ताकि वे बड़े स्तर पर व्यापार कर सकें। लोन और ब्याज में क्या मिलेगी राहत नई पॉलिसी में छोटे व्यापार शुरू करने वालों को 1 करोड़ रुपए तक के लोन पर 6 प्रतिशत तक ब्याज में राहत मिलेगी। वहीं 1 से 2 करोड़ रुपए तक के लोन पर 4 प्रतिशत तक ब्याज में छूट दी जाएगी। महिला, एससी, एसटी और दिव्यांग व्यापारियों को 1 प्रतिशत अतिरिक्त राहत भी दी जाएगी। गारंटी फीस और इंश्योरेंस में भी मदद सरकार सीजीटीएमएसई योजना के तहत 5 करोड़ रुपये तक के लोन पर लगने वाली गारंटी फीस का 50 प्रतिशत तक 5 साल तक वापस देगी। इसके अलावा छोटे व्यापारियों को 5 साल तक इंश्योरेंस प्रीमियम पर 50 प्रतिशत (अधिकतम 1 लाख रुपये सालाना) तक की सहायता दी जाएगी। ई-कॉमर्स से जोड़ने पर जोर सरकार व्यापारियों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ने पर भी फोकस कर रही है। इसके लिए एक साल तक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म फीस का 75 प्रतिशत (अधिकतम 50 हजार रुपये) तक सरकार देगी, ताकि छोटे व्यापारी भी ऑनलाइन बाजार में अपनी पहुंच बना सकें।

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