Rajasthan: मेहंदीपुर बालाजी में हादसे के बाद हिंसक झड़प, महिला श्रद्धालुओं के साथ बेरहमी से मारपीट; तनाव का माहौल

Rajasthan: मेहंदीपुर बालाजी में हादसे के बाद हिंसक झड़प, महिला श्रद्धालुओं के साथ बेरहमी से मारपीट; तनाव का माहौल

दौसा। धार्मिक नगरी मेहंदीपुर बालाजी में बीती रात महंत किशोरपुरी चिकित्सालय के समीप उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब श्रद्धालुओं की एक कार को स्लीपर कोच बस ने टक्कर मार दी। मामूली टक्कर से शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया, जिससे मौके पर तनाव का माहौल बन गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर के बाद दोनों वाहन चालकों के बीच कहासुनी हुई, जो जल्द ही मारपीट में बदल गई। श्रद्धालुओं ने आरोप लगाया कि बस में सवार लोगों ने कार चालक सहित महिलाओं के साथ बेरहमी से मारपीट की और धक्का-मुक्की की। घटना के बाद श्रद्धालुओं में भय और आक्रोश का माहौल है।

Mehandipur Balaji
परिजनों को समझाती महिला। फोटो: पत्रिका

बालाजी थाना प्रभारी गौरव प्रधान ने बताया कि सवारी बस को पीछे करते समय श्रद्धालुओं की कार से टक्कर लग गई, जिससे विवाद उत्पन्न हुआ। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बस को जब्त कर लिया है तथा बस चालक कमल बलाई, गजराज गुर्जर और योगेश उपाध्याय को हिरासत में लेकर गिरफ्तार किया है। मामले की जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।

नो एंट्री में बसों की घुसपैठ, हादसों को दे रही न्योता

घटना ने एक बार फिर मेहंदीपुर बालाजी में यातायात व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि धार्मिक नगरी की मुख्य सड़क पर आए दिन सरकारी और निजी बसों का जमावड़ा लगा रहता है। नो एंट्री क्षेत्र में भारी वाहनों की अवैध आवाजाही और सड़क पर ही पार्किंग से हमेशा हादसे की आशंका बनी रहती है।

करोड़ों की पार्किंग बेकार, सड़कों पर अव्यवस्था हावी

गौरतलब है कि मेहंदीपुर बालाजी में वाहनों की पार्किंग के लिए राज्य सरकार ने करीब 7 साल पहले करोड़ों रुपए की लागत से पार्किंग और यात्री विश्राम गृह का निर्माण कराया था। लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के चलते निजी बसों को वहां रोकने के बजाय कस्बे के भीतर प्रवेश दिया जा रहा है। इस लापरवाही के कारण न केवल यातायात जाम की समस्या बढ़ रही है, बल्कि हर समय दुर्घटना का खतरा भी बना रहता है।

श्रद्धालुओं की मांग: सख्ती से लागू हो नियम

घटना के बाद श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि नो एंट्री नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए, भारी वाहनों की आवाजाही पर नियंत्रण लगाया जाए और यातायात व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

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