‘रमन ने मेरे साथ जाने की जिद की। स्कूल के गेट पर मैंने कहा- “बेस्ट ऑफ लक”, मुस्कुराते हुए जवाब मिला, “वेरी-वेरी गुड पापा।” मैंने उसके गाल पर झप्पी दी और वो चला गया। नहीं पता था कि उसे आखिरी बार देख रहा हूं। अब वो कभी लौटकर नहीं आएगा।’ यह कहते हुए सज्जन सिंह कराड़ा की आंखों में आंसू आ जाते हैं। शुक्रवार को मधुमक्खियों के हमले में उनके बेटे रमन की मौत हो गई। वह आगर-मालवा जिले के सोयत कलां स्थित स्वामी विवेकानंद स्कूल में चौथी क्लास में पढ़ता था। शाम को उसका शाजापुर जिले के पलासी सोन गांव में अंतिम संस्कार किया गया। दैनिक भास्कर की टीम जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर गांव पहुंची। यहां बच्चे के पिता सज्जन सिंह, दादा नागजी राम और चाचा अरविंद कराड़ा से बात की। मोबाइल पर बेटे के जन्मदिन के वीडियो देखते हैं पलासी सोन गांव में शाम 7:30 बजे गांव में बिजली नहीं है। अंधेरे में ग्राम देवता के मंदिर के चबूतरे पर गांव के लोग जमा हैं। सामने एक घर से रुक-रुककर महिलाओं के रोने की आवाज आ रही है। तभी …100 साल जिए तू… खुशी-खुशी से बोलना… गाना सुनाई दिया। फिर दूसरे गाने …थाम के अंगुली तेरे साथ चलना है… सुनाई दिया। देखा कि ग्राम देवता के चबूतरे पर बैठा एक शख्स अपने मोबाइल की स्क्रीन को तेजी से स्क्रॉल कर रहा है। गानों की आवाज यहीं से आ रही थी। ये रमन के पिता सज्जन सिंह हैं। सज्जन बहुत कुछ कहना चाहते हैं, लेकिन कह नहीं पा रहे। मोबाइल दिखाते हुए कहते हैं- ये वीडियो मेरे इकलौते बेटे के हैं। पिछले साल 16 नवंबर को उसके जन्मदिन पर मैंने बनाए थे। जब भी उसकी याद आती थी, वीडियो देख लिया करता था। शुक्रवार को बेटे का मैथ्स का पेपर था। मैं ही उसे स्कूल छोड़ने गया। उससे कहा था कि बाकी बच्चे भी जा रहे हैं, उनके साथ चला जा, लेकिन वो नहीं माना। मेरे साथ जाने की जिद की। स्कूल के गेट पर मैंने कहा- “बेस्ट ऑफ लक”, रमन ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “वेरी-वेरी गुड पापा।” उसने कंधे पर बैग टांगते हुए कहा- “आज मम्मी ने बेस्ट ऑफ लक नहीं कहा।” मैंने उसके गाल पर हलकी झप्पी दी। डॉक्टर ने कह दिया- धड़कन नहीं है करीब एक घंटे बाद घर पहुंचा। कहीं जाने की तैयारी कर रहा था, तभी मोबाइल पर स्कूल से कॉल आया। वहां से किसी टीचर ने बताया कि रमन को मधुमक्खियों ने काट लिया है। आप आ जाइए। उसे अस्पताल लेकर गए हैं। मैं उलटे पांव अस्पताल पहुंचा। पता चला कि उसे झालवाड़ (राजस्थान) ले गए हैं। वहां पहुंचा तो रमन बिस्तर पर लेटा था। डॉक्टर और दूसरे लोग आस-पास थे। लेडी डॉक्टर ने कहा- इसकी धड़कन नहीं चल रही। इतना सुनते ही मुझे होश ही नहीं रहा। लोगों ने परिवार वालों को खबर दी, जो जहां जिस हालत में था, आ गया। अभी तो शादी के मेहमान ही वापस नहीं गए सज्जन सिंह कहते हैं कि दो दिन पहले ही तो घर में खुशियों का माहौल था। 7 अप्रैल को भतीजी की शादी में मेहमान आए थे। रमन ने सबके और मेरे साथ डांस किया था। उसका वीडियो भी बनाया था। 8 अप्रैल को ही तो विदाई हुई है। कई मेहमान तो वापस ही नहीं गए। अब उसी घर से भाई की अर्थी उठेगी। बहुत सपने देखे थे उसे लेकर, एक पल में जिंदगी खत्म हो गई सी लगती है। मैं ही तो उसे स्कूल छोड़ने गया था, क्या पता था कि उसका और मेरा ये आखिरी साथ है। उसे आखिरी बार देख रहा हूं। मुझे क्या पता था कि अब वो वापस नहीं आएगा। इतना कहने के बाद सज्जन सिंह को आंसू आ गए। दादा बोले- हरिद्वार की मन्नत से पहले चला गया चबूतरे पर ही रमन के दादा नागजी राम बैठे मिले। वे कहते हैं- दिमाग में पोते की हंसी और आवाज गूंज रही है। आंखों में उसकी चहल-कदमी घूम रही है। नागजी राम कहते हैं कि रमन के जन्म के लिए सात-आठ जगह मन्नत मांगी थी। सलकनपुर, शिर्डी, त्रयंबकेश्वर और न जाने कहां-कहां। उसे लेकर हर जगह गए भी थे। उसकी मन्नत का हरिद्वार अभी बाकी है। इसी साल सावन में वहां जाना था, लेकिन वो तो मनौती पूरी होने से पहले ही चला गया। रमन को रामायण और महाभारत की पूरी-पूरी बातें अच्छी तरह याद थीं। कोई अगर बात करते-करते गलती कर दे, तो वो तुरंत टोक कर सही बात बता देता था। रमन ने कहा था- जमीन लेकर क्या करूंगा नागजी राम ने बताया कि मेरे पास चार बीघा जमीन है। बच्चों के बेटे हो गए तो चारों पोतों के नाम पांच-पांच बीघा कर दी। जिस दिन रमन के नाम जमीन कर आया, ये बात उसे बताई तो उसने कहा- जमीन का वो क्या करेगा। उसे तो बहुत पढ़ाई करना है। कलेक्टर बनना है। मैं जब भी उसे फोन करता, वो कहता- दादाजी, पढ़ाई कर रहा हूं। बाद में बात करूंगा। शादी के मंडप के पास बेहोश पड़ी थीं मां पास ही रमन के चाचा अरविंद का घर है। आंगन में आम के पत्तों से मंडप बना है। दीवारों पर हल्दी से लगे थापों के निशान अभी ताजे ही हैं। महिलाओं के हाथों में मेहंदी और पैरों में महावर का रंग भी नहीं छूटा। आंगन से अंदर पहले कमरे में परिवार और पड़ोस की महिलाएं बैठी हैं। दादी बार-बार हाय रमन, हाय रमन कहती हुई रो रही हैं। महिलाओं के बीच सफेद कपड़ों में महिला बेसुध सी पड़ी हैं। पूछने पर बताया कि ये रमन की मां राजेश्वरी हैं। राजेश्वरी सोयत कलां के सरकारी अस्पताल में नर्स हैं। जब से रमन की मौत की खबर सुनी। बार-बार बेसुध हो जा रही हैं। रमन के चाचा अरविंद कहते हैं- काफी कोशिश कर चुके हैं, लेकिन भाभी को होश नहीं आ रहा। चाचा के साथ जमकर किया था डांस अरविंद कहते हैं- तीन दिन पहले मंडप के नीचे खुशियां थीं। लोग नाच-गा रहे थे। पूरा गांव भतीजी की शादी में आया था। आज ऐसा लग रहा है सबकुछ खत्म सा हो गया। रमन ने आखिरी बार कहा था कि चाचा आपके साथ नाचूंगा। मैंने कहा- कौन से गाने पर, उसने कहा- कोई भी। फिर हम दोनों ने काफी देर तक डांस किया। दूसरे दिन भाभी को सोयत कलां में ड्यूटी पर जाना था। सज्जन भैया-भाभी और रमन को लेकर 9 अप्रैल को सुबह जल्दी निकल गए। दूसरे दिन घटना हो गई। स्कूल परिसर में इतना बड़ा मधुमक्खी का छत्ता होना गंभीर लापरवाही है। समय रहते ध्यान दिया जाता तो रमन जिंदा होता। …………… यह भी पढ़ें- मधुमक्खियों के हमले में 9 साल के बच्चे की मौत आगर मालवा के प्राइवेट स्कूल में एग्जाम के दौरान मधुमक्खियों ने हमला कर दिया। इसमें 9 साल के छात्र की मौत हो गई। मधुमक्खियों ने बच्चे को शरीर पर पांच जगह काटा था। उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से डॉक्टरों ने राजस्थान के झालावाड़ रेफर कर दिया। झालावाड़ के अस्पताल में इलाज के दौरान दोपहर में दम तोड़ दिया। पढ़ें पूरी खबर


