आरा में AEPS साइबर ठगी का खुलासा:11 जीविका दीदियों के 2.64 लाख रुपए वापस, आधार-फिंगरप्रिंट के जरिए अवैध निकासी की गई थी

आरा में AEPS साइबर ठगी का खुलासा:11 जीविका दीदियों के 2.64 लाख रुपए वापस, आधार-फिंगरप्रिंट के जरिए अवैध निकासी की गई थी

आरा साइबर पुलिस ने आधार आधारित भुगतान प्रणाली (AEPS) के जरिए की गई साइबर ठगी के मामलों में बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 11 जीविका दीदियों से ठगे गए कुल 2.64 लाख रुपए वापस उनके खातों में दिलाए हैं। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर गठित विशेष टीम ने की है। साइबर अपराधियों ने आधार संख्या और फिंगरप्रिंट का दुरुपयोग कर अलग-अलग खाताधारकों के बैंक खातों से अवैध निकासी कर ली थी। जीविका समूह की महिलाओं ने इसकी शिकायत दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस उपाधीक्षक सह थानाध्यक्ष स्नेह सेतू के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। टीम ने तकनीकी-वैज्ञानिक अनुसंधान के माध्यम से ठगी के पूरे तरीके का खुलासा किया। बैंक अकाउंट में रुपए ट्रांसफर संबंधित बैंकों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के सहयोग से पीड़ितों की पूरी राशि रिकवर कर उनके खातों में वापस कर दी गई। जिन लाभार्थियों को राशि लौटाई गई, उनमें चरपोखरी की निभा देवी, हसन बाजार की राजकुमारी देवी, अगिआंव बाजार की गंगो देवी, तरारी की प्रेमता कुमारी, पीरो की सविता कुमारी, संदेश की लालती कुमारी, मुफस्सिल की विजयालक्ष्मी देवी, चांदी की नीलम देवी, इमादपुर की पुष्पा देवी, चौरी की शांति देवी और अंकिता कुमारी शामिल हैं। आम जनता से अपील यह कार्रवाई साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा है और इससे पीड़ितों को बड़ी राहत मिली है। साथ ही, इस मामले में शामिल अन्य आरोपियों की पहचान की जा रही है। गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी जारी है। अपना आधार नंबर, ओटीपी और फिंगरप्रिंट से जुड़ी जानकारी किसी के साथ साझा न करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में तुरंत साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी थाना से संपर्क करें। आरा साइबर पुलिस ने आधार आधारित भुगतान प्रणाली (AEPS) के जरिए की गई साइबर ठगी के मामलों में बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 11 जीविका दीदियों से ठगे गए कुल 2.64 लाख रुपए वापस उनके खातों में दिलाए हैं। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर गठित विशेष टीम ने की है। साइबर अपराधियों ने आधार संख्या और फिंगरप्रिंट का दुरुपयोग कर अलग-अलग खाताधारकों के बैंक खातों से अवैध निकासी कर ली थी। जीविका समूह की महिलाओं ने इसकी शिकायत दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस उपाधीक्षक सह थानाध्यक्ष स्नेह सेतू के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। टीम ने तकनीकी-वैज्ञानिक अनुसंधान के माध्यम से ठगी के पूरे तरीके का खुलासा किया। बैंक अकाउंट में रुपए ट्रांसफर संबंधित बैंकों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के सहयोग से पीड़ितों की पूरी राशि रिकवर कर उनके खातों में वापस कर दी गई। जिन लाभार्थियों को राशि लौटाई गई, उनमें चरपोखरी की निभा देवी, हसन बाजार की राजकुमारी देवी, अगिआंव बाजार की गंगो देवी, तरारी की प्रेमता कुमारी, पीरो की सविता कुमारी, संदेश की लालती कुमारी, मुफस्सिल की विजयालक्ष्मी देवी, चांदी की नीलम देवी, इमादपुर की पुष्पा देवी, चौरी की शांति देवी और अंकिता कुमारी शामिल हैं। आम जनता से अपील यह कार्रवाई साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा है और इससे पीड़ितों को बड़ी राहत मिली है। साथ ही, इस मामले में शामिल अन्य आरोपियों की पहचान की जा रही है। गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी जारी है। अपना आधार नंबर, ओटीपी और फिंगरप्रिंट से जुड़ी जानकारी किसी के साथ साझा न करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में तुरंत साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी थाना से संपर्क करें।  

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