सिद्धार्थनगर में मेडिकल कॉलेज की लिफ्ट में 8 लोग फंसे:1 घंटे तक अटके रहे, भाजपा नेता ने 112 पर कॉल कर बुलाई मदद

सिद्धार्थनगर में मेडिकल कॉलेज की लिफ्ट में 8 लोग फंसे:1 घंटे तक अटके रहे, भाजपा नेता ने 112 पर कॉल कर बुलाई मदद

माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में गुरुवार को एक लिफ्ट में आठ लोग करीब एक घंटे तक फंसे रहे। फंसे लोगों में चार मरीज, एक बच्चा, भाजपा नेता बिंदुमती मिश्र और दो तीमारदार शामिल थे। घटना उस समय हुई जब जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन मेडिकल कॉलेज परिसर में निरीक्षण कर रहे थे। इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन की ओर से तत्काल कोई प्रभावी राहत व्यवस्था देखने को नहीं मिली। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोपहर लगभग एक बजे नई बिल्डिंग के सर्जिकल वार्ड के पास लगी लिफ्ट अचानक बीच रास्ते में अटक गई। लिफ्ट में सवार लोगों ने इमरजेंसी बटन दबाए और दरवाजा खोलने की कोशिश की, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। लिफ्ट के भीतर धीरे-धीरे घुटन बढ़ने लगी, जिससे अंदर फंसे लोग घबरा गए। लगभग आधे घंटे तक कोई मदद नहीं पहुंचने से स्थिति और बिगड़ गई। कुछ मरीजों की हालत बिगड़ने लगी और एक बच्चा रोने लगा। भाजपा नेता ने 112 पर कॉल किया
जब अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई, तब भाजपा नेता बिंदुमती मिश्र ने डायल-112 पर कॉल कर मदद मांगी। सूचना मिलते ही पुलिस की पीआरवी टीम मौके पर पहुंची। हालांकि, उन्हें भी लिफ्ट का सही स्थान तलाशने और उसे खोलने में समय लगा। अंततः, तकनीकी टीम को बुलाया गया। उनकी करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद लिफ्ट का दरवाजा खोला जा सका और सभी आठ लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। लिफ्ट से बाहर निकलते ही लोगों ने राहत की सांस ली, लेकिन साथ ही अस्पताल प्रशासन के खिलाफ जमकर आक्रोश भी जताया। पीड़ितों का कहना था कि यह सिर्फ तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि गंभीर लापरवाही है। यदि समय रहते मदद नहीं पहुंचती, तो कोई बड़ा हादसा हो सकता था।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने कहा- स्प्रिंग बैठने से लिफ्ट रुकी
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. राजेश मोहन का कहना है कि लिफ्ट में ज्यादा वजन होने के कारण स्प्रिंग बैठ गया था, जिससे लिफ्ट बंद हो गई। घटना के दौरान जिलाधिकारी द्वारा इमरजेंसी वार्ड का निरीक्षण भी किया जा रहा था। उन्होंने मरीजों से बातचीत कर स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी ली और साफ-सफाई, दवा उपलब्धता तथा उपचार व्यवस्था को बेहतर बनाने के निर्देश दिए। लेकिन इसी दौरान अस्पताल की एक बड़ी खामी सामने आना प्रशासनिक दावों की पोल खोलता है।

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