सूरत-धांकुनी डीएफसी प्रोजेक्ट से माल ढुलाई होगी आसान

सूरत-धांकुनी डीएफसी प्रोजेक्ट से माल ढुलाई होगी आसान

डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (डीएफसीसीआइएल) के प्रबंध निदेशक प्रवीण कुमार ने गांधीनगर में मुख्य सचिव मनोज कुमार दास से मुलाकात की। इस मौके पर कुमार ने सूरत से पश्चिम बंगाल के धांकुनी के बीच प्रस्तावित डीएफसी प्रोजेक्ट की जानकारी दी। साथ ही प्रोजेक्ट में सहयोग देने को लेकर उन्होंने राज्य सरकार का आभार जताते हुए आगामी प्रोजेक्ट में भी समर्थन मांगा। मुख्य सचिव ने हर सहयोग का विश्वास दिलाया। बैठक में डीएफसी के मुख्य महाप्रबंधक गोविंद प्रसाद सैनी, कार्यकारी निदेशक मनीष अवस्थी, महाप्रबंधक (सुरक्षा) जितेन्द्र श्रीवास्तव और ऑपरेशन के सहायक महाप्रबंधक जे.के. अग्रवाल भी उपस्थित रहे।

यह है प्रोजेक्ट

केन्द्र सरकार की ओर से इस वर्ष के बजट में घोषित सूरत से पश्चिम बंगाल के धांकुनी के बीच डीएफसी की लंबाई लगभग 2100 किलोमीटर होगी। इस कॉरिडोर में गुजरात में करीब 88 किलोमीटर का हिस्सा है। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य पूर्वी और पश्चिमी समुद्री तटों के बीच माल ढुलाई को तेज, सुरक्षित और सस्ता बनाना है।

इन राज्यों से गुजरेगा प्रोजेक्ट

यह कॉरिडोर पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों से होकर गुजरेगा। इससे पारंपरिक यात्री रेल लाइनों पर भीड़ कम होगी और औद्योगिक विकास को गति मिलेगी। कॉरिडोर को 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली मालगाड़ियों के लिए डिजाइन किया गया है, जिसमें कवच जैसी उन्नत सिग्नलिंग प्रणाली और उच्च क्षमता की विद्युतीकरण व्यवस्था होगी।

गुजरात के लिए अहम

गुजरात के लिए यह कॉरिडोर विशेष महत्व रखता है। इससे राज्य के प्रमुख बंदरगाहों तक सामान की पहुंच आसान होगी और माल का आवागमन तेज होगा। यह लाइन सूरत के पास मौजूदा वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से सीधे जुड़ जाएगी, जिससे पूर्वी औद्योगिक बेल्ट से गुजरात के विनिर्माण केंद्रों तक माल की आवाजाही अधिक आसान हो सकेगी। प्रोजेक्ट से गुजरात में लॉजिस्टिक्स लागत में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है, जिससे वहां के उद्योगों को सीधा लाभ मिलेगा।

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