कैमूर जिले में स्वास्थ्य विभाग ने अवैध रूप से संचालित और मानकों की अनदेखी करने वाले 12 निजी अस्पतालों व पैथोलॉजी केंद्रों पर बड़ी कार्रवाई की है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त जांच के बाद इन संस्थानों पर क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के नियमों का उल्लंघन करने के लिए 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। सिविल सर्जन डॉ. चंदेश्वरी रजक के नेतृत्व में गठित 27 सदस्यीय टीम ने जिले के विभिन्न प्रखंडों में कुल 27 अस्पतालों और पैथोलॉजी केंद्रों की गहन जांच की थी। जांच में पाया गया कि 12 संस्थान बिना वैध पंजीकरण और निर्धारित मानकों के विपरीत संचालित हो रहे थे। पत्र प्राप्ति के 24 घंटे के भीतर अस्पताल बंद करने के निर्देश सिविल सर्जन ने सभी संबंधित संचालकों को निर्देश दिया है कि वे पत्र प्राप्ति के 24 घंटे के भीतर अपने अस्पताल बंद कर दें। साथ ही, जुर्माने की राशि जिला निबंधन प्राधिकार के नाम से बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से जमा करने को कहा गया है। जिला स्वास्थ्य प्रबंधक ऋषिकेश जायसवाल ने बताया कि नियमों के अनुसार, बिना पंजीकरण के पहली बार पकड़े जाने पर 50 हजार रुपये, दूसरी बार पर एक लाख रुपये और बार-बार उल्लंघन पर पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 24 घंटे के भीतर संस्थान बंद नहीं हुए, तो विधि-सम्मत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जुर्माने की जद में आए ये प्रमुख संस्थान जुर्माने की जद में आए प्रमुख संस्थानों में माँ शारदा हॉस्पिटल (बेलाव-रामपुर), कल्पना हॉस्पिटल (बेलाव-रामपुर), बगैर नामित क्लिनिक (गोड़सरा-रामगढ़), आशीर्वाद हॉस्पिटल (सदर अस्पताल के सामने, भभुआ), उज्ज्वल हॉस्पिटल (उखला मोड़-दुर्गावती), सूर्या हॉस्पिटल (पटेल कॉलेज के सामने, भभुआ), माँ शारदा हॉस्पिटल (रामगढ़), जनता हॉस्पिटल (रामगढ़), महिला हॉस्पिटल, साईंनाथ हॉस्पिटल (जी.टी. रोड, मोहनिया), पैथ काइंड लैब कलेक्शन सेंटर और भारत पैथोलॉजी (अनुमंडलीय अस्पताल के पूर्व, मोहनिया) शामिल हैं। इस कार्रवाई से अवैध रूप से क्लीनिक चलाने वाले संचालकों में हड़कंप मच गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाले किसी भी संस्थान को बख्शा नहीं जाएगा। कैमूर जिले में स्वास्थ्य विभाग ने अवैध रूप से संचालित और मानकों की अनदेखी करने वाले 12 निजी अस्पतालों व पैथोलॉजी केंद्रों पर बड़ी कार्रवाई की है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त जांच के बाद इन संस्थानों पर क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के नियमों का उल्लंघन करने के लिए 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। सिविल सर्जन डॉ. चंदेश्वरी रजक के नेतृत्व में गठित 27 सदस्यीय टीम ने जिले के विभिन्न प्रखंडों में कुल 27 अस्पतालों और पैथोलॉजी केंद्रों की गहन जांच की थी। जांच में पाया गया कि 12 संस्थान बिना वैध पंजीकरण और निर्धारित मानकों के विपरीत संचालित हो रहे थे। पत्र प्राप्ति के 24 घंटे के भीतर अस्पताल बंद करने के निर्देश सिविल सर्जन ने सभी संबंधित संचालकों को निर्देश दिया है कि वे पत्र प्राप्ति के 24 घंटे के भीतर अपने अस्पताल बंद कर दें। साथ ही, जुर्माने की राशि जिला निबंधन प्राधिकार के नाम से बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से जमा करने को कहा गया है। जिला स्वास्थ्य प्रबंधक ऋषिकेश जायसवाल ने बताया कि नियमों के अनुसार, बिना पंजीकरण के पहली बार पकड़े जाने पर 50 हजार रुपये, दूसरी बार पर एक लाख रुपये और बार-बार उल्लंघन पर पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 24 घंटे के भीतर संस्थान बंद नहीं हुए, तो विधि-सम्मत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जुर्माने की जद में आए ये प्रमुख संस्थान जुर्माने की जद में आए प्रमुख संस्थानों में माँ शारदा हॉस्पिटल (बेलाव-रामपुर), कल्पना हॉस्पिटल (बेलाव-रामपुर), बगैर नामित क्लिनिक (गोड़सरा-रामगढ़), आशीर्वाद हॉस्पिटल (सदर अस्पताल के सामने, भभुआ), उज्ज्वल हॉस्पिटल (उखला मोड़-दुर्गावती), सूर्या हॉस्पिटल (पटेल कॉलेज के सामने, भभुआ), माँ शारदा हॉस्पिटल (रामगढ़), जनता हॉस्पिटल (रामगढ़), महिला हॉस्पिटल, साईंनाथ हॉस्पिटल (जी.टी. रोड, मोहनिया), पैथ काइंड लैब कलेक्शन सेंटर और भारत पैथोलॉजी (अनुमंडलीय अस्पताल के पूर्व, मोहनिया) शामिल हैं। इस कार्रवाई से अवैध रूप से क्लीनिक चलाने वाले संचालकों में हड़कंप मच गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाले किसी भी संस्थान को बख्शा नहीं जाएगा।


