शेखपुरा जिले में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) के तहत विशेष शिविरों का आयोजन किया गया। नीति आयोग के आकांक्षी जिला कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित इन शिविरों में लगभग 600 गर्भवती महिलाओं का प्रसव पूर्व स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। बरबीघा रेफरल अस्पताल में डीडीसी संजय कुमार ने इस कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण प्रसव पूर्व जांच की सुविधा प्रदान करना और मातृ मृत्यु दर को कम करना है। शिविरों में पंजीकृत गर्भवती महिलाओं को विशेषज्ञों द्वारा चिकित्सीय परामर्श, अल्ट्रासाउंड, हीमोग्लोबिन, शुगर और बीपी जैसी आवश्यक जांचें निःशुल्क उपलब्ध कराई गईं। महिलाओं को लाल स्टिकर वाले कार्ड दिए गए जांच के दौरान कई महिलाओं को ‘उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था’ के रूप में चिन्हित किया गया। इन महिलाओं को लाल स्टिकर वाले कार्ड दिए गए और सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने के लिए विशेष देखभाल तथा नियमित फॉलो-अप की सलाह दी गई। सभी लाभार्थियों को आयरन-फोलिक एसिड की गोलियां, कैल्शियम और अन्य आवश्यक दवाएं भी मुफ्त दी गईं। एक बार विशेषज्ञ चिकित्सक द्वारा जांच की सुविधा मिले शिविर में उपस्थित महिलाओं को पोषण, संस्थागत प्रसव के महत्व और स्वच्छता के प्रति जागरूक किया गया। इस अवसर पर डीडीसी संजय कुमार ने बताया कि प्रत्येक माह की 9 तारीख को आयोजित होने वाला यह अभियान ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण सिद्ध हो रहा है। उन्होंने कहा कि जिले की हर गर्भवती महिला को कम से कम एक बार विशेषज्ञ चिकित्सक द्वारा जांच की सुविधा मिले, ताकि प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं को शून्य किया जा सके। इस मौके पर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉक्टर फैजल अरसद, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रूपम, अस्पताल प्रबंधक त्रिलोकीनाथ पांडेय, प्रभाष पांडेय, पिरामल के प्रतिनिधि कुंदन कुमार सहित कई स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित थे। शेखपुरा जिले में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) के तहत विशेष शिविरों का आयोजन किया गया। नीति आयोग के आकांक्षी जिला कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित इन शिविरों में लगभग 600 गर्भवती महिलाओं का प्रसव पूर्व स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। बरबीघा रेफरल अस्पताल में डीडीसी संजय कुमार ने इस कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण प्रसव पूर्व जांच की सुविधा प्रदान करना और मातृ मृत्यु दर को कम करना है। शिविरों में पंजीकृत गर्भवती महिलाओं को विशेषज्ञों द्वारा चिकित्सीय परामर्श, अल्ट्रासाउंड, हीमोग्लोबिन, शुगर और बीपी जैसी आवश्यक जांचें निःशुल्क उपलब्ध कराई गईं। महिलाओं को लाल स्टिकर वाले कार्ड दिए गए जांच के दौरान कई महिलाओं को ‘उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था’ के रूप में चिन्हित किया गया। इन महिलाओं को लाल स्टिकर वाले कार्ड दिए गए और सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने के लिए विशेष देखभाल तथा नियमित फॉलो-अप की सलाह दी गई। सभी लाभार्थियों को आयरन-फोलिक एसिड की गोलियां, कैल्शियम और अन्य आवश्यक दवाएं भी मुफ्त दी गईं। एक बार विशेषज्ञ चिकित्सक द्वारा जांच की सुविधा मिले शिविर में उपस्थित महिलाओं को पोषण, संस्थागत प्रसव के महत्व और स्वच्छता के प्रति जागरूक किया गया। इस अवसर पर डीडीसी संजय कुमार ने बताया कि प्रत्येक माह की 9 तारीख को आयोजित होने वाला यह अभियान ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण सिद्ध हो रहा है। उन्होंने कहा कि जिले की हर गर्भवती महिला को कम से कम एक बार विशेषज्ञ चिकित्सक द्वारा जांच की सुविधा मिले, ताकि प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं को शून्य किया जा सके। इस मौके पर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉक्टर फैजल अरसद, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रूपम, अस्पताल प्रबंधक त्रिलोकीनाथ पांडेय, प्रभाष पांडेय, पिरामल के प्रतिनिधि कुंदन कुमार सहित कई स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित थे।


