US-Iran Ceasefire: डेडलाइन से पहले ट्रंप क्यों झुके ? पाकिस्तान की एंट्री और सीजफायर का दुनिया पर असर

US-Iran Ceasefire: डेडलाइन से पहले ट्रंप क्यों झुके ? पाकिस्तान की एंट्री और सीजफायर का दुनिया पर असर

Middle East: मध्य पूर्व में पिछले कई दिनों से चल रहे विनाशकारी युद्ध के बीच अमेरिका और ईरान ने दो हफ्ते के सीजफायर करने का ऐलान किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से दी गई ‘विनाश’ की चेतावनी की डेडलाइन खत्म होने से ठीक पहले इस समझौते पर मुहर लगी। इस फैसले से पूरी दुनिया ने राहत की सांस ली है। आइए जानते हैं कि आखिर ट्रंप इस सीजफायर के लिए क्यों राजी हुए, इज़रायल का क्या कहना है, इसमें किस देश ने मुख्य भूमिका निभाई और इसका वैश्विक प्रभाव क्या होगा।

सीज़फायर के लिए क्यों माने ट्रंप ?

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को धमकी दी थी कि अगर उसने होर्मुज जलडमरूमध्य को नहीं खोला, तो उसके पावर प्लांट और पुलों सहित पूरे बुनियादी ढांचे को तबाह कर दिया जाएगा। 8 बजे की डेडलाइन खत्म होने से करीब डेढ़ घंटे पहले ट्रंप सीजफायर के लिए मान गए। इसके पीछे दो प्रमुख कारण थे:

होर्मुज जलमार्ग का खुलना: अमेरिका के दबाव में ईरान ‘पूर्ण, तत्काल और सुरक्षित’ तरीके से इस अहम जलमार्ग को खोलने के लिए तैयार हो गया। होर्मुज खुलने पर भारत में भी जहाज आने लगेंगे और तेल व गैस की किल्लत नहीं रहेगी।

सैन्य लक्ष्य पूरे होना: ट्रंप ने साफ किया कि अमेरिका ने अपने सभी सैन्य उद्देश्यों को हासिल कर लिया है और उससे भी आगे निकल चुका है। इसके अलावा, ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि ईरान द्वारा भेजा गया 10-सूत्रीय प्रस्ताव बातचीत शुरू करने के लिए एक “व्यावहारिक आधार” हो सकता है।

इज़रायल का सीज़फायर पर पक्ष

अमेरिका के इस कदम के बाद इज़रायल ने भी अपनी ओर से सैन्य अभियानों पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी है। हालांकि, इज़रायल का रुख बेहद सख्त है। इज़रायली नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि यह युद्धविराम ‘ईरान की शर्तों पर’ नहीं हुआ है। इज़रायल ईरान के 10-सूत्रीय प्रस्ताव की कई बातों (जैसे कि सभी प्रतिबंधों को हटाना) को खारिज करता है। इज़रायल की नज़रें मुख्य रूप से इस बात पर टिकी हैं कि ईरान इस दो हफ्ते के समय का इस्तेमाल अपनी मिसाइल या परमाणु क्षमताओं को फिर से संगठित करने के लिए न करे। इज़रायल ने चेतावनी दी है कि ईरान की ओर से कोई भी ‘गलती’ होने पर वह तुरंत और पूरी ताकत से पलटवार करेगा।

कैसे हुआ सीज़फायर? किस देश ने निभाई भूमिका

इस विनाशकारी युद्ध को रोकने में पाकिस्तान ने सबसे अहम मध्यस्थ की भूमिका निभाई है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने सीधे तौर पर डोनाल्ड ट्रंप से बात की और उनसे ईरान पर विनाशकारी हमले रोकने का अनुरोध किया। पाकिस्तान हाल के हफ्तों में ईरान और अमेरिका दोनों के बीच संदेश पहुंचाने का एक प्रमुख चैनल बनकर उभरा है। इसी कूटनीतिक मध्यस्थता के चलते दोनों देश युद्ध रोकने पर राजी हुए। अब इस समझौते को अंतिम रूप देने के लिए 10 अप्रैल को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच आगे की बातचीत तय की गई है।

सीज़फायर से दुनिया पर पड़ने वाला प्रभाव

होर्मुज जलमार्ग के खुलने और युद्धविराम लागू होने का वैश्विक स्तर पर व्यापक और सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है:

वैश्विक तेल और ऊर्जा व्यापार: होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने से दुनिया भर में तेल आपूर्ति को लेकर बना हुआ भारी संकट टल गया है। वैश्विक बाजार को बड़ी राहत मिली है।

खाड़ी देशों को राहत: संयुक्त अरब अमीरात , सऊदी अरब, कतर और ओमान जैसे देशों में बड़ी शांति की उम्मीद जगी है। इन देशों के ऊर्जा और आर्थिक ढांचे लगातार ईरानी मिसाइलों और ड्रोन हमलों के साए में थे।

यूरोप का बचाव: कई यूरोपीय सहयोगी देश होर्मुज को खोलने के लिए अपनी नौसेना भेजने से कतरा रहे थे। बिना किसी बड़े सैन्य उलझाव के इस जलमार्ग का खुलना यूरोप के लिए एक बड़ी रणनीतिक जीत है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *