लुप्तप्राय राज्य पक्षी गोडावण के संरक्षण की दिशा में देश ने एक बड़ी ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। जैसलमेर के प्रजनन केंद्र से भेजे गए एक अंडे से गुजरात के कच्छ में चूजे का जन्म हुआ है। कच्छ के घास के मैदानों में पिछले एक दशक से प्राकृतिक रूप से गोडावण के कुनबे में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई थी, लेकिन ‘जंपस्टार्ट अप्रोच’ तकनीक ने इस सूखे को खत्म कर दिया है। जैसलमेर का अंडा, कच्छ की ‘फोस्टर मदर’ कच्छ के नलिया इलाके में केवल तीन मादा गोडावण बची थीं, लेकिन वहां नर पक्षी न होने के कारण प्रजनन संभव नहीं था। ऐसे में जैसलमेर के सम स्थित ब्रीडिंग सेंटर से एक उपजाऊ अंडा चुना गया। सफर की बड़ी चुनौतियां 21 मार्च को अंडे को एक पोर्टेबल इनक्यूबेटर में रखकर जैसलमेर से कच्छ ले जाया गया। हाल्ट-फ्री कॉरिडोर बनाकर अंडे के तापमान और सुरक्षा को देखते हुए पूरे रास्ते कहीं भी ब्रेक नहीं लिया गया। 19 घंटे तक लगातार गाड़ी चली। 22 मार्च को यह अंडा कच्छ में एक मादा गोडावण के घोंसले में रखा गया। 26 मार्च को अंडे से चूजा बाहर आ गया, जिसका पालन-पोषण अब वहां की मादा पक्षी (फोस्टर मदर) कर रही है। अब ‘रीवाइल्डिंग’ की तैयारी विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहली बार है जब एक राज्य से दूसरे राज्य में अंडा ले जाकर प्राकृतिक वातावरण में चूजा पैदा करवाया गया है। अब अगला कदम इन पक्षियों को पिंजरों से निकालकर वापस खुले जंगलों में छोड़ने यानी ‘रीवाइल्डिंग’ का होगा। “यह लुप्तप्राय प्रजाति के पुनरुद्धार की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। राजस्थान और गुजरात के वन विभागों के साथ वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) के वैज्ञानिकों की मेहनत का यह सुखद परिणाम है।”— भूपेंद्र यादव, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रजनन केंद्रों में बढ़ा कुनबा: संख्या हुई 73 केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस सफलता पर खुशी जताते हुए बताया कि जैसलमेर के सम और रामदेवरा स्थित संरक्षण केंद्रों में गोडावण की संख्या अब बढ़कर 73 हो गई है। अकेले इस सीजन में ही 5 नए चूजों का जन्म हुआ है। पांचवा चूजा 25 मार्च को रामदेवरा में निकला। इसके माता मिटा जेरी और पर्व है। यह प्रोजेक्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2011 में परिकल्पित किया गया था, जो अब रंग ला रहा है।


