400 साल पुराने मां चिटाने वाली मंदिर में लगा मेला:सोनीपत में पहुंचे लाखों श्रद्धालु; मां के दरबार में होती हैं मुराद पूरी

400 साल पुराने मां चिटाने वाली मंदिर में लगा मेला:सोनीपत में पहुंचे लाखों श्रद्धालु; मां के दरबार में होती हैं मुराद पूरी

सोनीपत जिले के गाँव चिटाना में स्थित मां चिटाने वाली का मंदिर अपने ऐतिहासिक और प्राचीन स्वरूप के लिए देश दुनिया में प्रसिद्धि हासिल किया हुआ है। भक्तों की आस्था और भक्ति का एक अनूठा केंद्र है। मंदिर प्रागंण में दो दिन विशाल मेले का आयोजन किया गया।
जहां सप्तमी और अष्टमी के दिन लाखों श्रद्धालु मां के दरबार में आकर मत्था टेकते हैं। वहीं वीरवार को अष्टमी के दिन मेले में श्रद्धालुओं की लंबी कतार देखने को मिली। दूर-दराज से आए बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं लाइन में लगे नजर आए। मंदिर का दिव्य स्वरूप और इसकी चमत्कारिक इतिहास माना जाता है कि यह मंदिर करीब 400 साल पुराना है और माता की मूर्ति 400 साल पहले गांव चिटाना के तालाब से मिली थी। देशभर से श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं और आस्था लेकर इस प्राचीन मंदिर पहुंचते हैं। माता का मंदिर हरियाणा के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक बनाता है। इस मंदिर का न केवल गहरा धार्मिक महत्व है, बल्कि इससे जुड़ी चमत्कारी घटनाएं भी भक्तों को मां के प्रति और अधिक समर्पित कर देती हैं। माता चिटाने के दरबार की अलग-अलग तस्वीर देखिए… ​मां चिटाने वाली मंदिर का इतिहास अत्यंत समृद्ध और चमत्कारी घटनाओं से भरा हुआ है। मान्यता है कि गांव चिटाना की एक ब्राह्मण कन्या को स्वप्न में माता ने दर्शन दिए और कहा कि गांव के तालाब में उनकी दिव्य मूर्ति मिट्टी के नीचे दबी हुई है। माता ने आदेश दिया कि इस मूर्ति को यथायोग्य स्थान पर स्थापित किया जाए, जिससे वे सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करेंगी।​सुबह जब कन्या ने अपने परिजनों को यह जानकारी दी, तो गांव के विद्वान ब्राह्मणों की सलाह से तालाब की खुदाई करवाई गई। खुदाई के दौरान माता की अष्टधातु से निर्मित भव्य मूर्ति प्राप्त हुई। और माता की मूर्ति आज गाँव चिटाना में स्थापित है। मंदिर से जुड़ी विशेष मान्यताएं ​मां चिटाने वाली मंदिर में माता का दिव्य स्वरूप अष्टधातु की मूर्ति के रूप में विराजमान है। मंदिर में श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है, और यह मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूर्ण होती है। मंदिर में मां का विशेष शयनकक्ष भी बनाया गया है, जहां माता के लिए विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
​मंदिर के चमत्कारों का एक और प्रतीक यहां स्थित एक 300 साल पुराना इमली का पेड़ है। कहा जाता है कि यह पेड़ एक समय सूख गया था, लेकिन जब माता के स्थान पर अखंड ज्योत जलाई गई, तो यह पुनः हरा-भरा हो गया। देशभर से आते हैं श्रद्धालु और नवरात्रि का विशेष आयोजन
​सोनीपत का यह मंदिर सिर्फ स्थानीय भक्तों तक सीमित नहीं है, बल्कि दूर-दराज से भी लोग माता के दर्शन के लिए आते हैं। खासकर नवरात्रों के दौरान यहां लाखों श्रद्धालु हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब और हिमाचल प्रदेश समेत देशभर के विभिन्न हिस्सों से अपनी श्रद्धा अर्पित करने पहुंचते हैं। नवरात्र में होती है विशेष पूजा ​हर साल नवरात्रि में मां चिटाने वाली मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। सप्तमी और अष्टमी को यहां भव्य मेले का आयोजन होता है। सप्तमी की रात को महाआरती की जाती है, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं। इस अवसर पर दो दिन लगातार दिन-रात विशाल भंडारे का आयोजन भी किया जाता है। ​कमल तालाब से निकाली जाती है मिट्टी
​ग्रामीणों ने बताया है कि गांव के मंदिर के पास जहां माता जी की मूर्ति तालाब से मिली थी, वह तालाब भी करीबन 400 साल पुराना है और उसका नाम कमल तालाब रखा गया है। माता के दरबार में पूजा अर्चना के बाद तालाब में सात बार श्रद्धापूर्वक मिट्टी निकालने की परंपरा है, जिससे भक्तों में मनोकामना पूर्ण होती है। ​मंदिर सोसाइटी समाज सेवा में भी सक्रिय है।
हर बार मंदिर सोसाइटी समाज में कुछ नया करने के लिए काम करती है। अष्टमी के दिन गांव के लिए एक एम्बुलेंस भी समर्पित की गई है, जो बीमार और गर्भवती महिलाओं के लिए निशुल्क सेवा करेगी।
इसके अलावा, सोनीपत से गांव तक के लिए श्रद्धालुओं के लिए फ्री वाहन लगाए गए हैं और दो दिन मेले के दौरान किसी भी श्रद्धालु से कोई भी किराया नहीं लिया जाता है। प्रधान अनिल कुहाड़ का बयान
मंदिर समिति के प्रधान अनिल कुहाड़ ने बताया कि मंदिर परिसर में स्थित प्राचीन इमली का पेड़ विशेष आस्था का केंद्र है, जहां अखंड ज्योत जलाई जाती है। उन्होंने कहा कि परंपरा के अनुसार श्रद्धालु तालाब से सात बार मिट्टी निकालते हैं और सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद माता रानी अवश्य पूरी करती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि हर साल यहां श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो मंदिर की बढ़ती आस्था का प्रमाण है। ​प्रधान ने यह भी बताया कि मंदिर में नौ ग्रह परिक्रमा की भी शुरुआत की गई है और माता के दरबार में अद्धकुंवारी भूमि पूजन भी किया गया है। मां चिटाने वाली मंदिर भक्तों के लिए आस्था, विश्वास और चमत्कार का एक महान प्रतीक बना हुआ है।
भक्त संजय बेनीवाल का बयान
कमेटी मेंबर भक्त संजय बेनीवाल ने बताया कि मंदिर कमेटी के सभी सदस्य मेले की तैयारियों में करीब एक महीना पहले से जुट जाते हैं। उन्होंने कहा कि इस बार भी श्रद्धालुओं के लिए हर प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, ताकि किसी को कोई परेशानी न हो। साथ ही मेले के दौरान स्वास्थ्य कैंप भी लगाया गया है, जिससे जरूरतमंद लोगों को तुरंत चिकित्सा सुविधा मिल सके।साल 2017 से मंदिर के प्रांगण में भक्तों के द्वारा अखंड ज्योत भी जलाई जा रही है। और यह 24 घंटे जलती रहती है।
वहीं दो दिन भक्तजन विशाल भंडारे का भी आयोजन करते हैं जिसमें लाखों श्रद्धालु प्रसाद का सेवन करते हैं। यह भंडारा दो दिन लगातार दिन रात चलता है। इस दौरान मंदिर में कमेटी के प्रधान अनिल कुहाड़, सुरेंद्र, संजय बेनीवाल, देवेंद्र लाकड़ा, नरेंद्र वर्मा, बिजेंदर लाकड़ा, अमरजीत कुहाड़, राजेंद्र बल्हारा, रणधीर सिंह रंगा, संतराम भारद्वाज, जितेंद्र सोलंकी, शशिकांत भारद्वाज, श्री कृष्ण भगत , रामफल, नरेंद्र, पंडित सतीश, पंडित भोपाल, जयवीर आदि समस्त भक्तजन शामिल रहे।

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