Brewers Association of India : भारत में बीयर बनाने वाली कंपनियों ने आने वाले दिनों में सप्लाई में भारी कमी की चेतावनी दी है। ब्रुअर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (Brewers Association of India) के अनुसार, ईरान-इजराइल युद्ध के कारण पैकेजिंग सामग्री जैसे कांच की बोतलें (Glass Bottles) और एल्युमिनियम केन (Aluminium Cans) की मैन्युफैक्चरिंग बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस युद्ध की वजह से सप्लाई चेन (Supply Chain) में आए व्यवधान ने कच्चे माल की कीमतों को आसमान पर पहुँचा दिया है, जिससे घरेलू बाजार में स्टॉक (Inventory) खत्म होने का खतरा मंडरा रहा है।
कांच और एल्युमिनियम का गहराता संकट (Packaging Material Shortage)
युद्ध के कारण ऊर्जा संकट गहरा गया है, जिससे कांच बनाने वाली भट्टियों को चलाने के लिए जरूरी कमर्शियल एलएनजी (Commercial LNG) की कमी हो गई है। इसके चलते कांच की बोतलों की कीमतों में करीब 20% तक का उछाल आया है। वहीं, पश्चिम एशिया से होने वाली एल्युमीनियम की सप्लाई ठप होने से केन (Can Makers) निर्माताओं ने भी उत्पादन कम कर दिया है। जानकारों का कहना है कि अगर यह युद्ध लंबा खिंचा, तो कई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स पर ताला (Plant Shutdown) लग सकता है।
लागत में भारी बढ़ोतरी और कीमतों का दबाव (Rising Production Costs)
बीयर कंपनियों की कुल उत्पादन लागत में 12-15% का इजाफा हुआ है। कागज के कार्टन (Paper Cartons) की कीमतें लगभग दोगुनी हो गई हैं, जबकि एडहेसिव और अन्य पैकेजिंग मटेरियल 25% तक महंगे हो गए हैं। डॉलर के मुकाबले रुपये (Rupee Depreciation) की कमजोरी ने आयात को और भी खर्चीला बना दिया है। ऐसे में कंपनियां अब उन राज्यों को प्राथमिकता दे सकती हैं जहाँ उन्हें कीमतें बढ़ाने की अनुमति (Price Hike) है, जैसे महाराष्ट्र और कर्नाटक।
क्या कहती है इंडस्ट्री? (Industry Reaction)
ब्रूअर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया का कहना है कि “हम एक अभूतपूर्व स्थिति का सामना कर रहे हैं। गर्मी का सीजन (Peak Summer Season) आने वाला है, जो बीयर की बिक्री के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। लागत इतनी बढ़ गई है कि कई राज्यों में मौजूदा कीमतों पर व्यापार करना घाटे का सौदा साबित हो रहा है।”
आगे क्या होगा? (Future Outlook)
आने वाले दिनों में यदि युद्ध विराम नहीं होता है, तो रिटेल आउटलेट्स पर आपकी पसंदीदा बीयर ब्रांड गायब हो सकती है। सरकार से आयात नियमों में ढील (Regulatory Relaxation) देने की मांग की जा रही है ताकि विदेशों से केन और बोतलें मंगवाई जा सकें, लेकिन लॉजिस्टिक्स और फ्रेट चार्ज (High Freight Rates) में बढ़ोतरी इसे और चुनौतीपूर्ण बना रही है।
रेस्टोरेंट और पब पर भी असर (Hospitality Sector Impact)
सिर्फ बोतल बंद बीयर ही नहीं, बल्कि ड्राफ्ट बीयर और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री भी गैस की कमी (Gas Shortage) से जूझ रही है। कई पब और बार ने पहले ही अपने मेन्यू में बीयर की कीमतों में बदलाव के संकेत दे दिए हैं।


