पटना में ‘बकरी उत्सव-2026’ आयोजित:52 पशुपालकों ने लिया भाग, बीटल, ब्लैक बंगाल, जमुनापारी सहित कई नस्लें दिखाई; व्यावसायिक मॉडल पर जोर

पटना में ‘बकरी उत्सव-2026’ आयोजित:52 पशुपालकों ने लिया भाग, बीटल, ब्लैक बंगाल, जमुनापारी सहित कई नस्लें दिखाई; व्यावसायिक मॉडल पर जोर

पटना के बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय परिसर में सोमवार को ‘बकरी उत्सव-2026′ का आयोजन किया गया। इस उत्सव में राज्यभर से 52 पशुपालकों ने भाग लिया और लगभग 200 बकरियों का प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनी में बीटल, ब्लैक बंगाल, जमुनापारी, सिरोही और बरबरी जैसी प्रमुख नस्लों ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। कार्यक्रम का शुभारंभ आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. निर्मल सिंह दहिया के स्वागत संबोधन से हुआ। उन्होंने उपस्थित अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए इस आयोजन को पशुपालन क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। इस अवसर पर भा.कृ.अ.प. अटारी, पटना के निदेशक डॉ. अंजनी कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. रामेश्वर सिंह विशिष्ट अतिथि के तौर पर शामिल हुए। बकरी पालन को बढ़ाने पर दिया जोर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. इंद्रजीत सिंह ने अपने संबोधन में बकरी पालन को पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़ाकर व्यावसायिक मॉडल के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने विभिन्न जिलों से आए पशुपालकों की सराहना की। डॉ. सिंह ने सुझाव दिया कि प्रगतिशील किसानों को विश्वविद्यालय के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में नियमित रूप से शामिल किया जाना चाहिए। इससे अन्य किसानों को भी सीखने और आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। उन्होंने राज्य स्तर पर नीति निर्माण में किसानों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। विशिष्ट अतिथि डॉ. रामेश्वर सिंह ने विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित बकरी, श्वान और बिल्ली शो की सराहना की। उन्होंने कहा कि किसी भी सफल पशुपालक के लिए संस्थागत सहयोग महत्वपूर्ण होता है। गांव गोद लेने’ की योजना को भी सराहा उन्होंने विश्वविद्यालय की विस्तार गतिविधियों और ‘गांव गोद लेने’ की योजना को भी सराहा। डॉ. सिंह ने किसानों से अपील की कि वे अन्य लोगों को भी बकरी पालन से जुड़ने के लिए प्रेरित करें। मुख्य अतिथि डॉ. अंजनी कुमार ने अपने संबोधन में डॉ. रामेश्वर सिंह के योगदान को याद करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय को मजबूत बनाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि इस तरह के बकरी उत्सवों का आयोजन बिहार के चारों जोनों में किया जाना चाहिए, जिसमें अटारी और कृषि विज्ञान केंद्रों की भागीदारी सुनिश्चित हो। साथ ही उन्होंने पशु उपचार में हर्बल चिकित्सा को बढ़ावा देने और प्रत्येक KVK में हर्बल गार्डन स्थापित करने पर जोर दिया। कार्यक्रम के दौरान तीन सफल किसान-उद्यमियों ममता शर्मा, बिपिन कुमार और संतोष कुमार ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बकरी पालन से जुड़ी चुनौतियों और सफलता की कहानियों के माध्यम से अन्य किसानों को प्रेरित किया। बाजार में बकरी के मांस की मांग लगातार बनी रहती है संतोष कुमार ने कहा कि बकरी पालन भूमिहीन, छोटे और सीमांत किसानों के लिए एक लाभकारी व्यवसाय साबित हो सकता है। उन्होंने बताया कि बाजार में बकरी के मांस की मांग लगातार बनी रहती है और इसकी कीमत भी अच्छी मिलती है। उन्होंने जिला स्तर पर व्हाट्सएप समूह बनाकर किसानों को जोड़ने और कम लागत वाले नवाचारों के जरिए उत्पादन बढ़ाने की पहल की जानकारी दी। साथ ही उन्होंने बिहार के लिए एक विशिष्ट बकरी नस्ल विकसित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागी किसानों और उद्यमियों को प्रमाण पत्र, पुरस्कार और उपयोगी सामग्री प्रदान की गई। प्रदर्शनी में स्टॉल लगाने वाले प्रतिभागियों को भी प्रशंसा प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन आयोजन सचिव डॉ. पंकज कुमार और डॉ. वाई.एस. जादौन ने संयुक्त रूप से किया। आयोजन ने न केवल पशुपालकों को एक मंच दिया, बल्कि बकरी पालन को व्यवसाय के रूप में बढ़ावा देने की दिशा में भी एक मजबूत संदेश दिया। पटना के बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय परिसर में सोमवार को ‘बकरी उत्सव-2026′ का आयोजन किया गया। इस उत्सव में राज्यभर से 52 पशुपालकों ने भाग लिया और लगभग 200 बकरियों का प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनी में बीटल, ब्लैक बंगाल, जमुनापारी, सिरोही और बरबरी जैसी प्रमुख नस्लों ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। कार्यक्रम का शुभारंभ आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. निर्मल सिंह दहिया के स्वागत संबोधन से हुआ। उन्होंने उपस्थित अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए इस आयोजन को पशुपालन क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। इस अवसर पर भा.कृ.अ.प. अटारी, पटना के निदेशक डॉ. अंजनी कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. रामेश्वर सिंह विशिष्ट अतिथि के तौर पर शामिल हुए। बकरी पालन को बढ़ाने पर दिया जोर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. इंद्रजीत सिंह ने अपने संबोधन में बकरी पालन को पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़ाकर व्यावसायिक मॉडल के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने विभिन्न जिलों से आए पशुपालकों की सराहना की। डॉ. सिंह ने सुझाव दिया कि प्रगतिशील किसानों को विश्वविद्यालय के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में नियमित रूप से शामिल किया जाना चाहिए। इससे अन्य किसानों को भी सीखने और आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। उन्होंने राज्य स्तर पर नीति निर्माण में किसानों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। विशिष्ट अतिथि डॉ. रामेश्वर सिंह ने विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित बकरी, श्वान और बिल्ली शो की सराहना की। उन्होंने कहा कि किसी भी सफल पशुपालक के लिए संस्थागत सहयोग महत्वपूर्ण होता है। गांव गोद लेने’ की योजना को भी सराहा उन्होंने विश्वविद्यालय की विस्तार गतिविधियों और ‘गांव गोद लेने’ की योजना को भी सराहा। डॉ. सिंह ने किसानों से अपील की कि वे अन्य लोगों को भी बकरी पालन से जुड़ने के लिए प्रेरित करें। मुख्य अतिथि डॉ. अंजनी कुमार ने अपने संबोधन में डॉ. रामेश्वर सिंह के योगदान को याद करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय को मजबूत बनाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि इस तरह के बकरी उत्सवों का आयोजन बिहार के चारों जोनों में किया जाना चाहिए, जिसमें अटारी और कृषि विज्ञान केंद्रों की भागीदारी सुनिश्चित हो। साथ ही उन्होंने पशु उपचार में हर्बल चिकित्सा को बढ़ावा देने और प्रत्येक KVK में हर्बल गार्डन स्थापित करने पर जोर दिया। कार्यक्रम के दौरान तीन सफल किसान-उद्यमियों ममता शर्मा, बिपिन कुमार और संतोष कुमार ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बकरी पालन से जुड़ी चुनौतियों और सफलता की कहानियों के माध्यम से अन्य किसानों को प्रेरित किया। बाजार में बकरी के मांस की मांग लगातार बनी रहती है संतोष कुमार ने कहा कि बकरी पालन भूमिहीन, छोटे और सीमांत किसानों के लिए एक लाभकारी व्यवसाय साबित हो सकता है। उन्होंने बताया कि बाजार में बकरी के मांस की मांग लगातार बनी रहती है और इसकी कीमत भी अच्छी मिलती है। उन्होंने जिला स्तर पर व्हाट्सएप समूह बनाकर किसानों को जोड़ने और कम लागत वाले नवाचारों के जरिए उत्पादन बढ़ाने की पहल की जानकारी दी। साथ ही उन्होंने बिहार के लिए एक विशिष्ट बकरी नस्ल विकसित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागी किसानों और उद्यमियों को प्रमाण पत्र, पुरस्कार और उपयोगी सामग्री प्रदान की गई। प्रदर्शनी में स्टॉल लगाने वाले प्रतिभागियों को भी प्रशंसा प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन आयोजन सचिव डॉ. पंकज कुमार और डॉ. वाई.एस. जादौन ने संयुक्त रूप से किया। आयोजन ने न केवल पशुपालकों को एक मंच दिया, बल्कि बकरी पालन को व्यवसाय के रूप में बढ़ावा देने की दिशा में भी एक मजबूत संदेश दिया।  

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