बिहार के फॉर्मूले से बंगाल जीतेगी भाजपा!:गली-गली में मंत्री-विधायकों की तैनाती, 5 राज्यों के 600 भाजपा नेता जनता का मूड भांप रहे

बिहार के फॉर्मूले से बंगाल जीतेगी भाजपा!:गली-गली में मंत्री-विधायकों की तैनाती, 5 राज्यों के 600 भाजपा नेता जनता का मूड भांप रहे

तारीख- 16 मार्च 2026. बिहार विधानसभा में राज्यसभा चुनाव की वोटिंग चल रही थी। यहां सभी विधायकों के लिए वोटिंग करना अनिवार्य था। इस बीच BJP के कुछ विधायक बेचैन थे। पूछने पर कहा, ‘आज हमें किसी भी सूरत में बंगाल में रहना था। पार्टी की तरफ से पहली लिस्ट जारी की जाएगी। इस मौके पर हमारी जिम्मेदारी बेटिकट हुए लोगों को संभालना और मनाना है। ताकि पार्टी के भीतर किसी तरह का असंतोष नहीं उभरे। सभी उस कैंडिडेट का साथ दें, जिनके नाम का ऐलान चुनाव के लिए हुआ है।’ बंगाल फतह के लिए भाजपा ने देशभर से 600 से ज्यादा नेताओं को फील्ड में उतार दिया है। इसमें सिर्फ बिहार से 150 से ज्यादा हैं। कमान बिहार सरकार के मंत्री मंगल पांडेय संभाल रहे हैं। उनके साथ लगभग 12 विधायक हैं। 12 से ज्यादा संगठन प्रदेश संगठन स्तर के नेता समेत लगभग 150 नेताओं को मैदान में उतारा गया है। इनके अलावा युवा मोर्चा के पदाधिकारी स्तर के 50 नेता और जमीन स्तर पर मंडल अध्यक्ष तक को भेजा गया है। मंडे स्पेशल स्टोरी में पढ़िए, कैसे बंगाल फतह के लिए बीजेपी बिहार वाला फॉर्मूला लागू कर रही है? बिहारी नेताओं को बंगाल चुनाव में क्या जिम्मेदारी दी गई है? बिहार चुनाव अभियान खत्म होते ही भारतीय जनता पार्टी ने अब पश्चिम बंगाल में अपनी चुनावी मशीनरी को उतार दिया है। पार्टी ने राज्य को पांच जोनों में बांटा है। यहां संगठन मंत्री से लेकर बूथ स्तर तक के अधिकारी की तैनाती की गई है। नितिन की अगुआई में मंगल और भूपेंद्र संभाल रहे कमान बिहार सरकार में मंत्री रहे नितिन नवीन के भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद 5 राज्यों (असम, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी) में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। बंगाल को नितिन नवीन के लिए बड़ी चुनौती बताया जा रहा है। नितिन नवीन ने अमित शाह के भरोसेमंद भूपेंद्र यादव को बंगाल चुनाव प्रभारी बनाया है। इनके साथ सुनिल बंंसल सह-प्रभारी हैं। बंगाल के ओवरऑल प्रभारी मंगल पांडेय हैं। नेशनल सोशल मीडिया इंचार्ज अमित मालवीय को भी सह-प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। अब इसे विस्तार से समझिए… मंडल के नेताओं को जिम्मेदारी- गांव-गांव घूमिए, हिन्दी भाषी वोटर्स को जोड़िए बिहार के मंडल स्तर के नेताओं को हर विधानसभा क्षेत्र में उतारा गया है। खासकर बिहार और झारखंड से सटे सीमाई इलाके के साथ उन क्षेत्रों में जहां हिन्दी भाषी और बिहारी वोटर्स हैं। इस टीम के एक सदस्य ने भास्कर को बताया कि उन्हें केवल गांव-गांव घूमने के लिए बोला गया है। हमें हिन्दी भाषी लोगों को पार्टी से जोड़ना है। उनके साथ बैठ कर चाय पीनी है। उन्हें वोट डालने के लिए प्रोत्साहित करना है। हमारी अलग-अलग टोली पहले से तय किए गए विधानसभा क्षेत्रों के गांवों में घूम रही है। विधायकों को बूथ मजबूत करने की जिम्मेदारी बिहार के विधायकों को एक-एक विधानसभा सीट की जिम्मेदारी दी गई है। इन्हें यहां का प्रभारी बनाया गया है। इसके तहत इन्हें इलाके के सभी बूथ मैनेज करना है। पटना के एक विधायक (जो फिलहाल बंगाल में चुनाव प्रबंधन में जुटे हैं) ने भास्कर को बताया, ’बूथ को पहले पार्टी के समर्थकों के मुताबिक A, B और C में आइडेंटिफाइ करना है। इसके बाद A और B लेवल के बूथ पर सबसे ज्यादा फोकस करना है। इनके वोटर्स को बूथ तक पहुंचाने के लिए मोटिवेट करना है। बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की जिम्मेदारी भी इन्हीं की होगी।’ उन्होंने बताया, ‘विधायक अपने इलाके में घर-घर जाकर संपर्क कर रहे हैं। बंगाल में रह रहे बिहारी परिवारों के घर जाकर उन्हें ‘मिट्टी का रिश्ता’ याद दिला रहे हैं। वहां के सांस्कृतिक कार्यक्रम में भी हिस्सा ले रहे हैं।’ पदाधिकारी मॉनिटरिंग के साथ कार्यकर्ताओं के साथ संवाद कर रहे विधायकों के अलावा पार्टी पदाधिकारियों को चुनाव प्रबंधन के साथ कार्यकर्ताओं के साथ नियमित संवाद, सामाजिक संगठनों से संपर्क, मतदाता समूहों की पहचान और मुद्दा आधारित अभियान को भी मजबूती देने के अभियान में लगाया गया है। खासकर उन क्षेत्रों में जहां भाजपा का जनाधार बढ़ा है, लेकिन संगठनात्मक ढांचे को और मजबूत करने की जरूरत है। ये अपना पूरा अपडेट सीधे चुनाव प्रभारी को सौंप रहे हैं। बिहार का उदाहरण बंगाल में दे रहे हैं बंगाल चुनाव में बीजेपी ने ‘सोनार बांग्ला’ और ‘भ्रष्टाचार मुक्त बंगाल’ का नारा दिया है। बिहार के नेता वहां जाकर संदेश दे रहे हैं कि जिस तरह बिहार में ‘सुशासन’ (NDA के अनुसार) की वापसी हुई है, वैसी ही जरूरत बंगाल को भी है। NDA सरकार के पहले बिहार की क्या स्थिति थी और मौजूदा समय में क्या स्थिति है। इसके साथ ही ये वहां के लोगों को डबल इंजन सरकार यानि केंद्र और राज्य में NDA सरकार के फायदे को भी गिना रहे हैं। शहर दर शहर चौपाल लगा रहे हैं युवा मोर्चा के नेता पार्टी की तरफ से केवल मुख्य धारा के नेता और कार्यकर्ताओं को ही बंगाल नहीं भेजा गया है। बिहार के युवा मोर्चा के लगभग 50 से ज्यादा नेता-कार्यकर्ता पिछले एक महीने से ज्यादा समय से बंगाल में डेरा डाले हुए हैं। इन्हें मुख्य जिम्मेदारी अलग-अलग विधानसभा के शहरी इलाकों में यूथ को पार्टी से जोड़ना और पार्टी के प्रति मोटिवेट करना है। बिहार भाजयुमो के क्षेत्रीय प्रभारी वरुण राज सिंह ने बताया, ’20 फरवरी के बाद हमें टीम के साथ बंगाल भेजा गया था। मुझे हावड़ा सेंट्रल और हावड़ा नॉर्थ का विधानसभा युवा मोर्चा प्रभारी बनाया गया है। पहले मेरी टीम में 15 लोग भी नहीं थे। आज एक महीने के भीतर टीम में स्थानीय स्तर के लगभग 150 से ज्यादा नेता जुड़ गए हैं।’ वरुण राज ने कहा, ‘युवा मोर्चा की मुख्य जिम्मेदारी रोज अलग-अलग इलाकों में चौपाल लगाना है। इसमें हम लोगों को बता रहे हैं कि बंगाल को केंद्र सरकार की किन योजनाओं का सीधा लाभ मिल रहा है।’
बंगाल में तैनात हैं बिहार के ये नेता बंगाल के स्टार प्रचारक हैं बिहार के ये नेता मुख्य रूप से इन जिलों में फोकस है बिहार के नेताओं का मुख्य फोकस हावड़ा, आसनसोल, सिलीगुड़ी, बैरकपुर और कोलकाता के उन हिस्सों पर है जहां बिहारी मूल के लोग निर्णायक भूमिका में हैं। तारीख- 16 मार्च 2026. बिहार विधानसभा में राज्यसभा चुनाव की वोटिंग चल रही थी। यहां सभी विधायकों के लिए वोटिंग करना अनिवार्य था। इस बीच BJP के कुछ विधायक बेचैन थे। पूछने पर कहा, ‘आज हमें किसी भी सूरत में बंगाल में रहना था। पार्टी की तरफ से पहली लिस्ट जारी की जाएगी। इस मौके पर हमारी जिम्मेदारी बेटिकट हुए लोगों को संभालना और मनाना है। ताकि पार्टी के भीतर किसी तरह का असंतोष नहीं उभरे। सभी उस कैंडिडेट का साथ दें, जिनके नाम का ऐलान चुनाव के लिए हुआ है।’ बंगाल फतह के लिए भाजपा ने देशभर से 600 से ज्यादा नेताओं को फील्ड में उतार दिया है। इसमें सिर्फ बिहार से 150 से ज्यादा हैं। कमान बिहार सरकार के मंत्री मंगल पांडेय संभाल रहे हैं। उनके साथ लगभग 12 विधायक हैं। 12 से ज्यादा संगठन प्रदेश संगठन स्तर के नेता समेत लगभग 150 नेताओं को मैदान में उतारा गया है। इनके अलावा युवा मोर्चा के पदाधिकारी स्तर के 50 नेता और जमीन स्तर पर मंडल अध्यक्ष तक को भेजा गया है। मंडे स्पेशल स्टोरी में पढ़िए, कैसे बंगाल फतह के लिए बीजेपी बिहार वाला फॉर्मूला लागू कर रही है? बिहारी नेताओं को बंगाल चुनाव में क्या जिम्मेदारी दी गई है? बिहार चुनाव अभियान खत्म होते ही भारतीय जनता पार्टी ने अब पश्चिम बंगाल में अपनी चुनावी मशीनरी को उतार दिया है। पार्टी ने राज्य को पांच जोनों में बांटा है। यहां संगठन मंत्री से लेकर बूथ स्तर तक के अधिकारी की तैनाती की गई है। नितिन की अगुआई में मंगल और भूपेंद्र संभाल रहे कमान बिहार सरकार में मंत्री रहे नितिन नवीन के भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद 5 राज्यों (असम, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी) में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। बंगाल को नितिन नवीन के लिए बड़ी चुनौती बताया जा रहा है। नितिन नवीन ने अमित शाह के भरोसेमंद भूपेंद्र यादव को बंगाल चुनाव प्रभारी बनाया है। इनके साथ सुनिल बंंसल सह-प्रभारी हैं। बंगाल के ओवरऑल प्रभारी मंगल पांडेय हैं। नेशनल सोशल मीडिया इंचार्ज अमित मालवीय को भी सह-प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। अब इसे विस्तार से समझिए… मंडल के नेताओं को जिम्मेदारी- गांव-गांव घूमिए, हिन्दी भाषी वोटर्स को जोड़िए बिहार के मंडल स्तर के नेताओं को हर विधानसभा क्षेत्र में उतारा गया है। खासकर बिहार और झारखंड से सटे सीमाई इलाके के साथ उन क्षेत्रों में जहां हिन्दी भाषी और बिहारी वोटर्स हैं। इस टीम के एक सदस्य ने भास्कर को बताया कि उन्हें केवल गांव-गांव घूमने के लिए बोला गया है। हमें हिन्दी भाषी लोगों को पार्टी से जोड़ना है। उनके साथ बैठ कर चाय पीनी है। उन्हें वोट डालने के लिए प्रोत्साहित करना है। हमारी अलग-अलग टोली पहले से तय किए गए विधानसभा क्षेत्रों के गांवों में घूम रही है। विधायकों को बूथ मजबूत करने की जिम्मेदारी बिहार के विधायकों को एक-एक विधानसभा सीट की जिम्मेदारी दी गई है। इन्हें यहां का प्रभारी बनाया गया है। इसके तहत इन्हें इलाके के सभी बूथ मैनेज करना है। पटना के एक विधायक (जो फिलहाल बंगाल में चुनाव प्रबंधन में जुटे हैं) ने भास्कर को बताया, ’बूथ को पहले पार्टी के समर्थकों के मुताबिक A, B और C में आइडेंटिफाइ करना है। इसके बाद A और B लेवल के बूथ पर सबसे ज्यादा फोकस करना है। इनके वोटर्स को बूथ तक पहुंचाने के लिए मोटिवेट करना है। बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की जिम्मेदारी भी इन्हीं की होगी।’ उन्होंने बताया, ‘विधायक अपने इलाके में घर-घर जाकर संपर्क कर रहे हैं। बंगाल में रह रहे बिहारी परिवारों के घर जाकर उन्हें ‘मिट्टी का रिश्ता’ याद दिला रहे हैं। वहां के सांस्कृतिक कार्यक्रम में भी हिस्सा ले रहे हैं।’ पदाधिकारी मॉनिटरिंग के साथ कार्यकर्ताओं के साथ संवाद कर रहे विधायकों के अलावा पार्टी पदाधिकारियों को चुनाव प्रबंधन के साथ कार्यकर्ताओं के साथ नियमित संवाद, सामाजिक संगठनों से संपर्क, मतदाता समूहों की पहचान और मुद्दा आधारित अभियान को भी मजबूती देने के अभियान में लगाया गया है। खासकर उन क्षेत्रों में जहां भाजपा का जनाधार बढ़ा है, लेकिन संगठनात्मक ढांचे को और मजबूत करने की जरूरत है। ये अपना पूरा अपडेट सीधे चुनाव प्रभारी को सौंप रहे हैं। बिहार का उदाहरण बंगाल में दे रहे हैं बंगाल चुनाव में बीजेपी ने ‘सोनार बांग्ला’ और ‘भ्रष्टाचार मुक्त बंगाल’ का नारा दिया है। बिहार के नेता वहां जाकर संदेश दे रहे हैं कि जिस तरह बिहार में ‘सुशासन’ (NDA के अनुसार) की वापसी हुई है, वैसी ही जरूरत बंगाल को भी है। NDA सरकार के पहले बिहार की क्या स्थिति थी और मौजूदा समय में क्या स्थिति है। इसके साथ ही ये वहां के लोगों को डबल इंजन सरकार यानि केंद्र और राज्य में NDA सरकार के फायदे को भी गिना रहे हैं। शहर दर शहर चौपाल लगा रहे हैं युवा मोर्चा के नेता पार्टी की तरफ से केवल मुख्य धारा के नेता और कार्यकर्ताओं को ही बंगाल नहीं भेजा गया है। बिहार के युवा मोर्चा के लगभग 50 से ज्यादा नेता-कार्यकर्ता पिछले एक महीने से ज्यादा समय से बंगाल में डेरा डाले हुए हैं। इन्हें मुख्य जिम्मेदारी अलग-अलग विधानसभा के शहरी इलाकों में यूथ को पार्टी से जोड़ना और पार्टी के प्रति मोटिवेट करना है। बिहार भाजयुमो के क्षेत्रीय प्रभारी वरुण राज सिंह ने बताया, ’20 फरवरी के बाद हमें टीम के साथ बंगाल भेजा गया था। मुझे हावड़ा सेंट्रल और हावड़ा नॉर्थ का विधानसभा युवा मोर्चा प्रभारी बनाया गया है। पहले मेरी टीम में 15 लोग भी नहीं थे। आज एक महीने के भीतर टीम में स्थानीय स्तर के लगभग 150 से ज्यादा नेता जुड़ गए हैं।’ वरुण राज ने कहा, ‘युवा मोर्चा की मुख्य जिम्मेदारी रोज अलग-अलग इलाकों में चौपाल लगाना है। इसमें हम लोगों को बता रहे हैं कि बंगाल को केंद्र सरकार की किन योजनाओं का सीधा लाभ मिल रहा है।’
बंगाल में तैनात हैं बिहार के ये नेता बंगाल के स्टार प्रचारक हैं बिहार के ये नेता मुख्य रूप से इन जिलों में फोकस है बिहार के नेताओं का मुख्य फोकस हावड़ा, आसनसोल, सिलीगुड़ी, बैरकपुर और कोलकाता के उन हिस्सों पर है जहां बिहारी मूल के लोग निर्णायक भूमिका में हैं।  

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