बिहार की राजनीति में इन दिनों नया मुकाबला शुरू हो गया है। एक तरफ RJD सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बेटे तेजस्वी यादव राज्यसभा चुनाव हारते ही कोलकाता रवाना हो गए। दूसरी तरफ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार JDU जॉइन करते ही लोगों के बीच और सीनियर नेताओं के घर-घर घूम रहे हैं। लोग इसे पार्ट टाइम वर्सेज फूल टाइम पॉलिटिक्स का मुकाबला बना रहे हैं। सवाल यह है कि क्या पार्ट टाइम पॉलिटिक्स से तेजस्वी बिहार जीत पाएंगे? या निशांत की ग्राउंड रियलिटी वाली पॉलिटिक्स नया चेहरा बनेगी। जानेंगे आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में…। तेजस्वी यादवः विधानसभा हारे तो यूरोप, राज्यसभा हारे तो कोलकाता गए 16 मार्च को बिहार की राज्यसभा की 5 सीटों के लिए वोटिंग हुई। इसमें NDA ने सभी पांचों सीटों पर जीत दर्ज की। तेजस्वी यादव की पार्टी RJD के कैंडिडेट अमरेंद्र धारी सिंह हार गए। रिजल्ट की घोषणा के कुछ मिनट बाद ही तेजस्वी यादव पटना से कोलकाता रवाना हो गए। वह उस समय पटना से रवाना हुए, जब उनकी पार्टी के 1 और कांग्रेस के 3 विधायकों ने अनुशासन तोड़ा और वोटिंग से गैर हाजिर हो गए। इसका असर यह हुआ कि RJD कैंडिडेट हार हो गया। हालांकि, तेजस्वी यादव पहली बार नहीं है, जब बिहार से बाहर गए हैं। इससे पहले भी वह चुनाव में हार के बाद बाहर जाते रहे हैं… विधानसभा चुनाव बीत गया, लेकिन गठबंधन में खटपट बनी रही 2025 विधानसभा चुनाव में सीटों के तालमेल से लेकर प्रचार तक की कमान तेजस्वी यादव के हाथ में थी। लेकिन नामांकन की तारीख बीतने के बाद तक गठबंधन ने सीट शेयरिंग का फॉर्मूला नहीं निकाल पाया। इस कारण कुछ सीटों पर फ्रेंडली फाइट तक हुई। महागठबंधन में खटपट इतनी बढ़ गई थी कि तेजस्वी यादव के नामांकन में महागठबंधन का कोई नेता साथ नहीं दिखा। वह अपने पिता लालू यादव के साथ राघोपुर पहुंचे थे। महागठबंधन के नेता मीडिया से दूर हैं। 2019 लोकसभा चुनाव बाद गए थे विदेश निशांत कुमारः सीनियर नेताओं के घर गए, लोगों से मिले 8 मार्च को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ने आधिकारिक तौर पर JDU जॉइन की। उसके बाद से वह लगातार एक्टिव हैं। अगले दिन मतलब 9 मार्च को निशांत ने पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के घर गए। वहां पार्टी के युवा विधायकों के साथ मुलाकात की। दावत-ए-इफ्तार में शामिल हुए निशांत, तेजस्वी रहे दूर निशांत कुमार पार्टी जॉइन करने के बाद पटना के महावीर मंदिर गए। पूजा की। उसके बाद वह पार्टी नेताओं और मुस्लिम संगठनों की इफ्तार पार्टी में भी शरीक हुए। JDU ने इफ्तार का आयोजन भी किया। दूसरी तरफ तेजस्वी यादव सिर्फ 15 मार्च को बिहार AIMIM प्रमुख अख्तरुल ईमाम की इफ्तार पार्टी में शामिल हुए। RJD ने इफ्तार का आयोजन नहीं किया। निशांत और तेजस्वी की चुनौतियां…. तेजस्वी को सत्ता चाहिए तो MY से आगे बढ़ना होगा तेजस्वी यादव को अगर बिहार की सत्ता हासिल करनी है तो उनको अपने पिता के MY (मुस्लिम-यादव) समीकरण का विस्तार करना होगा। दोनों को मिलकर 32% है, लेकिन बिहार की सत्ता के लिए 40% से ज्यादा वोट जरूरी है। निशांत कुमार को वोट बैंक बचाना बड़ी चुनौती निशांत कुमार अगर यह 2 काम कर दें तो बिहार की सत्ता में बने रह सकते हैं। 1. नीतीश के वोटबैंक को बचाए रखना नीतीश कुमार का मुख्य वोटबैंक कुर्मी (उनकी जाति), महादलित, EBC और कुछ मुस्लिम-दलित समूहों में है, जो ‘सुशासन’ और विकास की छवि पर टिका है। 2. भाजपा से तालमेल बनाकर रखना नीतीश के दिल्ली जाने के बाद बिहार में BJP का मुख्यमंत्री बनना लगभग तय है, और JDU को डिप्टी CM या अन्य पदों पर संतोष करना पड़ सकता है। बिहार की राजनीति में इन दिनों नया मुकाबला शुरू हो गया है। एक तरफ RJD सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बेटे तेजस्वी यादव राज्यसभा चुनाव हारते ही कोलकाता रवाना हो गए। दूसरी तरफ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार JDU जॉइन करते ही लोगों के बीच और सीनियर नेताओं के घर-घर घूम रहे हैं। लोग इसे पार्ट टाइम वर्सेज फूल टाइम पॉलिटिक्स का मुकाबला बना रहे हैं। सवाल यह है कि क्या पार्ट टाइम पॉलिटिक्स से तेजस्वी बिहार जीत पाएंगे? या निशांत की ग्राउंड रियलिटी वाली पॉलिटिक्स नया चेहरा बनेगी। जानेंगे आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में…। तेजस्वी यादवः विधानसभा हारे तो यूरोप, राज्यसभा हारे तो कोलकाता गए 16 मार्च को बिहार की राज्यसभा की 5 सीटों के लिए वोटिंग हुई। इसमें NDA ने सभी पांचों सीटों पर जीत दर्ज की। तेजस्वी यादव की पार्टी RJD के कैंडिडेट अमरेंद्र धारी सिंह हार गए। रिजल्ट की घोषणा के कुछ मिनट बाद ही तेजस्वी यादव पटना से कोलकाता रवाना हो गए। वह उस समय पटना से रवाना हुए, जब उनकी पार्टी के 1 और कांग्रेस के 3 विधायकों ने अनुशासन तोड़ा और वोटिंग से गैर हाजिर हो गए। इसका असर यह हुआ कि RJD कैंडिडेट हार हो गया। हालांकि, तेजस्वी यादव पहली बार नहीं है, जब बिहार से बाहर गए हैं। इससे पहले भी वह चुनाव में हार के बाद बाहर जाते रहे हैं… विधानसभा चुनाव बीत गया, लेकिन गठबंधन में खटपट बनी रही 2025 विधानसभा चुनाव में सीटों के तालमेल से लेकर प्रचार तक की कमान तेजस्वी यादव के हाथ में थी। लेकिन नामांकन की तारीख बीतने के बाद तक गठबंधन ने सीट शेयरिंग का फॉर्मूला नहीं निकाल पाया। इस कारण कुछ सीटों पर फ्रेंडली फाइट तक हुई। महागठबंधन में खटपट इतनी बढ़ गई थी कि तेजस्वी यादव के नामांकन में महागठबंधन का कोई नेता साथ नहीं दिखा। वह अपने पिता लालू यादव के साथ राघोपुर पहुंचे थे। महागठबंधन के नेता मीडिया से दूर हैं। 2019 लोकसभा चुनाव बाद गए थे विदेश निशांत कुमारः सीनियर नेताओं के घर गए, लोगों से मिले 8 मार्च को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ने आधिकारिक तौर पर JDU जॉइन की। उसके बाद से वह लगातार एक्टिव हैं। अगले दिन मतलब 9 मार्च को निशांत ने पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के घर गए। वहां पार्टी के युवा विधायकों के साथ मुलाकात की। दावत-ए-इफ्तार में शामिल हुए निशांत, तेजस्वी रहे दूर निशांत कुमार पार्टी जॉइन करने के बाद पटना के महावीर मंदिर गए। पूजा की। उसके बाद वह पार्टी नेताओं और मुस्लिम संगठनों की इफ्तार पार्टी में भी शरीक हुए। JDU ने इफ्तार का आयोजन भी किया। दूसरी तरफ तेजस्वी यादव सिर्फ 15 मार्च को बिहार AIMIM प्रमुख अख्तरुल ईमाम की इफ्तार पार्टी में शामिल हुए। RJD ने इफ्तार का आयोजन नहीं किया। निशांत और तेजस्वी की चुनौतियां…. तेजस्वी को सत्ता चाहिए तो MY से आगे बढ़ना होगा तेजस्वी यादव को अगर बिहार की सत्ता हासिल करनी है तो उनको अपने पिता के MY (मुस्लिम-यादव) समीकरण का विस्तार करना होगा। दोनों को मिलकर 32% है, लेकिन बिहार की सत्ता के लिए 40% से ज्यादा वोट जरूरी है। निशांत कुमार को वोट बैंक बचाना बड़ी चुनौती निशांत कुमार अगर यह 2 काम कर दें तो बिहार की सत्ता में बने रह सकते हैं। 1. नीतीश के वोटबैंक को बचाए रखना नीतीश कुमार का मुख्य वोटबैंक कुर्मी (उनकी जाति), महादलित, EBC और कुछ मुस्लिम-दलित समूहों में है, जो ‘सुशासन’ और विकास की छवि पर टिका है। 2. भाजपा से तालमेल बनाकर रखना नीतीश के दिल्ली जाने के बाद बिहार में BJP का मुख्यमंत्री बनना लगभग तय है, और JDU को डिप्टी CM या अन्य पदों पर संतोष करना पड़ सकता है।


