Faiz Ahmad Faiz Shayari: मेरी ख़ामोशियों में लर्ज़ां है, मेरे नालों की गुम-शुदा आवाज़…फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ के ये शेर पहुंचाएंगे सुकून

Faiz Ahmad Faiz Shayari: मेरी ख़ामोशियों में लर्ज़ां है, मेरे नालों की गुम-शुदा आवाज़…फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ के ये शेर पहुंचाएंगे सुकून

Faiz Ahmad Faiz Shayari: फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ (1911–1984) उर्दू अदब की वो शख़्सियत थे जिन्होंने शायरी को महज़ हुस्न-ओ-इश्क़ की गलियों से निकालकर ज़माने के कड़वे सच और इंक़लाब से जोड़ दिया। यहां हम उनके कुछ मशहूर शेर लेकर आए हैं। यहां पढ़ें फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की शायरी।

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