प्रयागराज जंक्शन पर रविवार, 15 मार्च को एक नकली आरपीएफ दारोगा को गिरफ्तार किया गया। 22 वर्षीय दिव्यांशु कुमार आरपीएफ की वर्दी पहनकर प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर घूम रहा था, जब जीआरपी और आरपीएफ की संयुक्त टीम ने उसे पकड़ा। दिव्यांशु गाजीपुर के थाना बरेसर अंतर्गत ग्राम रेंगा का निवासी है। पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि दिव्यांशु ने नौकरी के बढ़ते पारिवारिक दबाव के कारण खुद को आरपीएफ दारोगा बताया था। उसने न केवल पुलिस को, बल्कि अपने पूरे परिवार को भी धोखे में रखा। हाल ही में संपन्न हुए माघ मेले के दौरान, दिव्यांशु अपनी पत्नी, पिता और मां को प्रयागराज लाया था। उसने वर्दी का रौब दिखाकर परिवार को संगम में ‘सरकारी रसूख’ के साथ स्नान कराया, जिससे वे पूरी तरह आश्वस्त हो गए कि वह वास्तव में रेलवे पुलिस का अधिकारी है। जीआरपी प्रभारी अकलेश कुमार सिंह की टीम प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर गश्त कर रही थी, तभी उन्हें दिल्ली एंड की तरफ एक ‘दारोगा’ संदिग्ध अवस्था में दिखा। पूछताछ करने पर उसके हाव-भाव बदल गए, जिससे संदेह गहराया। कड़ाई से पूछताछ में उसने अपना फर्जीवाड़ा कबूल कर लिया। जीआरपी प्रयागराज ने दिव्यांशु के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज दिया है। यह गिरफ्तारी क्षेत्राधिकारी रेलवे अरुण कुमार पाठक के पर्यवेक्षण में की गई। पुलिस ने अभियुक्त के पास से कुछ सामान भी बरामद किया है। पुलिस को इस मामले में पूर्ण आरपीएफ वर्दी (स्टार, बेल्ट, मोनोग्राम, डोरी सहित, लाल रंग के जूते और खाकी मोजे 650 नकद, आधार कार्ड और एटीएम कार्ड देख-देखकर बाजार से हूबहू सामान (स्टार, बैच, मोनोग्राम, नीली डोरी और लाल जूते) खरीदा था। वह पिछले तीन महीने से बिना टिकट मुफ्त यात्रा करने और रौब झाड़ने के लिए इस फर्जीवाड़े को अंजाम दे रहा था। प्रयागराज थाना जीआरपी और आरपीएफ की टीमों के सतर्कता के चलते फर्जी दारोगा अब सलाखों के पीछे पहुंच गया है।


