तिरहुत प्रमंडल में बाल संरक्षण व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से प्रमंडल स्तरीय विचार गोष्ठी सह संवेदीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रमंडलीय आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह ने की। इसमें मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर, वैशाली, पश्चिम चंपारण और पूर्वी चंपारण के जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, बाल संरक्षण तंत्र से जुड़े अधिकारी और विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि शामिल हुए। विभागों के बीच समन्वय पर जोर कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न विभागों और संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना, उनकी भूमिकाओं को स्पष्ट करना तथा बचाव से लेकर पुनर्वास तक की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना था। प्रशासनिक तंत्र को संवेदनशील बनाने की पहल मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने कहा कि इस तरह की कार्यशालाएं प्रशासनिक तंत्र को अधिक जागरूक और उत्तरदायी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने अधिकारियों से अपने-अपने जिलों में बाल संरक्षण प्रणाली को मजबूत करने का आह्वान किया। बच्चों की सुरक्षा सभी की साझा जिम्मेदारी अध्यक्षीय संबोधन में प्रमंडलीय आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण और समग्र विकास केवल एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह प्रशासन, पुलिस, न्यायिक संस्थाओं और समाज की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने बाल संरक्षण व्यवस्था को जिला के साथ-साथ प्रखंड और पंचायत स्तर तक मजबूत करने पर जोर दिया। विशेषज्ञों ने दी महत्वपूर्ण जानकारी कार्यक्रम में मिशन वात्सल्य, किशोर न्याय अधिनियम और बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों ने प्रस्तुतीकरण दिया। यूनिसेफ के विशेषज्ञ अजय कुमार और उदयन केयर के जितेंद्र पंडित ने पुनर्वास, केस मैनेजमेंट, वैकल्पिक पारिवारिक देखभाल और आफ्टर केयर जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। समग्र और प्रभावी बाल संरक्षण पर जोर कार्यक्रम में यह निष्कर्ष निकला कि बाल संरक्षण को प्रभावी बनाने के लिए बहुविभागीय समन्वय, समयबद्ध कार्रवाई, गुणवत्तापूर्ण केस मैनेजमेंट और जमीनी स्तर तक सक्रिय तंत्र विकसित करना आवश्यक है। इसे राज्य में बाल संरक्षण व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया गया। तिरहुत प्रमंडल में बाल संरक्षण व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से प्रमंडल स्तरीय विचार गोष्ठी सह संवेदीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रमंडलीय आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह ने की। इसमें मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर, वैशाली, पश्चिम चंपारण और पूर्वी चंपारण के जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, बाल संरक्षण तंत्र से जुड़े अधिकारी और विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि शामिल हुए। विभागों के बीच समन्वय पर जोर कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न विभागों और संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना, उनकी भूमिकाओं को स्पष्ट करना तथा बचाव से लेकर पुनर्वास तक की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना था। प्रशासनिक तंत्र को संवेदनशील बनाने की पहल मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने कहा कि इस तरह की कार्यशालाएं प्रशासनिक तंत्र को अधिक जागरूक और उत्तरदायी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने अधिकारियों से अपने-अपने जिलों में बाल संरक्षण प्रणाली को मजबूत करने का आह्वान किया। बच्चों की सुरक्षा सभी की साझा जिम्मेदारी अध्यक्षीय संबोधन में प्रमंडलीय आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण और समग्र विकास केवल एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह प्रशासन, पुलिस, न्यायिक संस्थाओं और समाज की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने बाल संरक्षण व्यवस्था को जिला के साथ-साथ प्रखंड और पंचायत स्तर तक मजबूत करने पर जोर दिया। विशेषज्ञों ने दी महत्वपूर्ण जानकारी कार्यक्रम में मिशन वात्सल्य, किशोर न्याय अधिनियम और बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों ने प्रस्तुतीकरण दिया। यूनिसेफ के विशेषज्ञ अजय कुमार और उदयन केयर के जितेंद्र पंडित ने पुनर्वास, केस मैनेजमेंट, वैकल्पिक पारिवारिक देखभाल और आफ्टर केयर जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। समग्र और प्रभावी बाल संरक्षण पर जोर कार्यक्रम में यह निष्कर्ष निकला कि बाल संरक्षण को प्रभावी बनाने के लिए बहुविभागीय समन्वय, समयबद्ध कार्रवाई, गुणवत्तापूर्ण केस मैनेजमेंट और जमीनी स्तर तक सक्रिय तंत्र विकसित करना आवश्यक है। इसे राज्य में बाल संरक्षण व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया गया।


