औरंगाबाद में राजस्व कर्मचारी का धरना प्रदर्शन:17 मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल, कहा- 1900 से 2800 ग्रेड-पे हो

औरंगाबाद में राजस्व कर्मचारी का धरना प्रदर्शन:17 मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल, कहा- 1900 से 2800 ग्रेड-पे हो

बिहार राज्य भूमि सुधार कर्मचारी संघ (संयुक्त संघर्ष मोर्चा) के आह्वान पर राज्य भर के राजस्व कर्मचारी आज से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार की ओर से पूर्व में किए गए लिखित समझौतों और घोषणाओं को अब तक पूरी तरह लागू नहीं किया गया है। इसी के विरोध में राज्य के विभिन्न जिलों में धरना-प्रदर्शन शुरू किया गया है। औरंगाबाद में भी राजस्व कर्मचारी शहर के गांधी मैदान में धरना पर बैठकर सरकार के खिलाफ अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद कर रहे हैं।धरना कार्यक्रम की अध्यक्षता संघ के कोषाध्यक्ष इंद्रजीत कुमार ने की, जबकि संचालन मीडिया प्रभारी सुमंत कुमार ने किया। 27 दिनों तक ऐतिहासिक हड़ताल चली थी इंद्रजीत कुमार ने बताया कि राजस्व कर्मचारियों की 17 सूत्री मांगों को लेकर पिछले साल 27 दिनों तक ऐतिहासिक हड़ताल चली थी। इसके बाद दो जून 2025 को तत्कालीन अपर मुख्य सचिव (राजस्व) के साथ कर्मचारियों की कई मांगों पर लिखित सहमति बनी थी। उस समय कर्मचारियों को भरोसा दिलाया गया था कि उनकी प्रमुख मांगों पर जल्द ही आवश्यक सरकारी आदेश जारी किए जाएंगे। मांगों पर सुनवाई नहीं कर रही सरकार उन्होंने कहा कि आठ महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद कई महत्वपूर्ण मांगों पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। इससे कर्मचारियों में गहरा असंतोष व्याप्त है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वर्तमान में राजस्व कर्मचारी 1900 ग्रेड पे पर काम कर रहे हैं, जबकि पहले हुई सहमति के अनुसार उन्हें 2800 ग्रेड पे का लाभ मिलना चाहिए। लंबे समय से यह मांग लंबित है और इस पर निर्णय नहीं होने से कर्मचारियों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि सरकार ने समय रहते इस मांग पर निर्णय लिया होता तो आज आंदोलन की नौबत नहीं आती। संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि इस संबंध में विभाग के साथ कई दौर की वार्ता भी हो चुकी है। 20 फरवरी 2026 को उपमुख्यमंत्री सह राजस्व मंत्री और प्रधान सचिव के साथ प्रतिनिधिमंडल की बैठक हुई थी। बैठक के दौरान कर्मचारियों की मांगों पर सकारात्मक आश्वासन दिया गया, लेकिन सरकार की ओर से इन बातों को लिखित रूप में देने से इनकार कर दिया गया। इससे कर्मचारियों का भरोसा और कमजोर हो गया है। राजस्व कर्मचारी का सुध नहीं ले रही सरकार संघ का कहना है कि जब पहले हुए लिखित समझौतों को ही लागू नहीं किया जा रहा है तो केवल मौखिक आश्वासनों पर भरोसा करना संभव नहीं है। इसी कारण संघर्ष समिति ने निर्णय लिया है कि जब तक सहमति के बिंदुओं पर विधिवत सरकारी आदेश जारी नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। राजस्व कर्मचारियों ने यह भी कहा कि विभाग में काम का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। राज्य में दाखिल-खारिज, परिमार्जन, नामांतरण और भूमि से जुड़े लाखों मामलों का निपटारा राजस्व कर्मचारियों के जिम्मे है। कहा- आवश्यक संसाधनों की भारी कमी है इसके बावजूद कार्यालयों में आवश्यक संसाधनों की भारी कमी है। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें काम निष्पादन के लिए लैपटॉप, इंटरनेट, प्रिंटर, कार्यालयी संसाधन और क्षेत्रीय कार्यों के लिए वाहन व ईंधन जैसी बुनियादी सुविधाएं भी पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं कराई जाती हैं। इससे काम करने में भी काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। मांगों को पूरा नहीं करने तक चलेगा आंदोलन संघ ने स्पष्ट किया कि राजस्व कर्मचारी हमेशा जनता के हित में कार्य करते रहे हैं, लेकिन विभागीय उपेक्षा और लंबित मांगों के कारण उन्हें मजबूर होकर आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों, विशेष रूप से 1900 ग्रेड पे से बढ़ाकर 2800 ग्रेड पे करने सहित अन्य सहमति बिंदुओं पर सरकार की ओर से स्पष्ट आदेश जारी नहीं किया जाता, तब तक उनकी सामूहिक हड़ताल और आंदोलन जारी रहेगा। धरना कार्यक्रम में जिला सचिव मुकेश कुमार, सुरेंद्र पंडित, रजनीश कुमार, दयानंद कुमार सहित बड़ी संख्या में राजस्व कर्मचारी उपस्थित थे। कर्मचारियों ने सरकार से जल्द मांगों पर निर्णय लेकर आंदोलन समाप्त कराने की अपील की है। बिहार राज्य भूमि सुधार कर्मचारी संघ (संयुक्त संघर्ष मोर्चा) के आह्वान पर राज्य भर के राजस्व कर्मचारी आज से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार की ओर से पूर्व में किए गए लिखित समझौतों और घोषणाओं को अब तक पूरी तरह लागू नहीं किया गया है। इसी के विरोध में राज्य के विभिन्न जिलों में धरना-प्रदर्शन शुरू किया गया है। औरंगाबाद में भी राजस्व कर्मचारी शहर के गांधी मैदान में धरना पर बैठकर सरकार के खिलाफ अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद कर रहे हैं।धरना कार्यक्रम की अध्यक्षता संघ के कोषाध्यक्ष इंद्रजीत कुमार ने की, जबकि संचालन मीडिया प्रभारी सुमंत कुमार ने किया। 27 दिनों तक ऐतिहासिक हड़ताल चली थी इंद्रजीत कुमार ने बताया कि राजस्व कर्मचारियों की 17 सूत्री मांगों को लेकर पिछले साल 27 दिनों तक ऐतिहासिक हड़ताल चली थी। इसके बाद दो जून 2025 को तत्कालीन अपर मुख्य सचिव (राजस्व) के साथ कर्मचारियों की कई मांगों पर लिखित सहमति बनी थी। उस समय कर्मचारियों को भरोसा दिलाया गया था कि उनकी प्रमुख मांगों पर जल्द ही आवश्यक सरकारी आदेश जारी किए जाएंगे। मांगों पर सुनवाई नहीं कर रही सरकार उन्होंने कहा कि आठ महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद कई महत्वपूर्ण मांगों पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। इससे कर्मचारियों में गहरा असंतोष व्याप्त है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वर्तमान में राजस्व कर्मचारी 1900 ग्रेड पे पर काम कर रहे हैं, जबकि पहले हुई सहमति के अनुसार उन्हें 2800 ग्रेड पे का लाभ मिलना चाहिए। लंबे समय से यह मांग लंबित है और इस पर निर्णय नहीं होने से कर्मचारियों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि सरकार ने समय रहते इस मांग पर निर्णय लिया होता तो आज आंदोलन की नौबत नहीं आती। संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि इस संबंध में विभाग के साथ कई दौर की वार्ता भी हो चुकी है। 20 फरवरी 2026 को उपमुख्यमंत्री सह राजस्व मंत्री और प्रधान सचिव के साथ प्रतिनिधिमंडल की बैठक हुई थी। बैठक के दौरान कर्मचारियों की मांगों पर सकारात्मक आश्वासन दिया गया, लेकिन सरकार की ओर से इन बातों को लिखित रूप में देने से इनकार कर दिया गया। इससे कर्मचारियों का भरोसा और कमजोर हो गया है। राजस्व कर्मचारी का सुध नहीं ले रही सरकार संघ का कहना है कि जब पहले हुए लिखित समझौतों को ही लागू नहीं किया जा रहा है तो केवल मौखिक आश्वासनों पर भरोसा करना संभव नहीं है। इसी कारण संघर्ष समिति ने निर्णय लिया है कि जब तक सहमति के बिंदुओं पर विधिवत सरकारी आदेश जारी नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। राजस्व कर्मचारियों ने यह भी कहा कि विभाग में काम का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। राज्य में दाखिल-खारिज, परिमार्जन, नामांतरण और भूमि से जुड़े लाखों मामलों का निपटारा राजस्व कर्मचारियों के जिम्मे है। कहा- आवश्यक संसाधनों की भारी कमी है इसके बावजूद कार्यालयों में आवश्यक संसाधनों की भारी कमी है। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें काम निष्पादन के लिए लैपटॉप, इंटरनेट, प्रिंटर, कार्यालयी संसाधन और क्षेत्रीय कार्यों के लिए वाहन व ईंधन जैसी बुनियादी सुविधाएं भी पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं कराई जाती हैं। इससे काम करने में भी काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। मांगों को पूरा नहीं करने तक चलेगा आंदोलन संघ ने स्पष्ट किया कि राजस्व कर्मचारी हमेशा जनता के हित में कार्य करते रहे हैं, लेकिन विभागीय उपेक्षा और लंबित मांगों के कारण उन्हें मजबूर होकर आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों, विशेष रूप से 1900 ग्रेड पे से बढ़ाकर 2800 ग्रेड पे करने सहित अन्य सहमति बिंदुओं पर सरकार की ओर से स्पष्ट आदेश जारी नहीं किया जाता, तब तक उनकी सामूहिक हड़ताल और आंदोलन जारी रहेगा। धरना कार्यक्रम में जिला सचिव मुकेश कुमार, सुरेंद्र पंडित, रजनीश कुमार, दयानंद कुमार सहित बड़ी संख्या में राजस्व कर्मचारी उपस्थित थे। कर्मचारियों ने सरकार से जल्द मांगों पर निर्णय लेकर आंदोलन समाप्त कराने की अपील की है।  

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