नालंदा की ऐतिहासिक ज्ञान परंपरा को वैश्विक पटल पर पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से आने वाले 12 से 14 मार्च तक राजगीर अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में ‘नालंदा अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव 2026’ का आयोजन किया जा रहा है। तीन दिनों तक चलने वाले इस भव्य समागम में देश-विदेश के प्रख्यात लेखक, विद्वान, पत्रकार और सांस्कृतिक हस्तियां जुटेंगी, जो साहित्य, इतिहास, दर्शन और आधुनिक तकनीक जैसे विविध विषयों पर मंथन करेंगे। आयोजन का मुख्य आकर्षण प्राचीन भारतीय बौद्धिक संस्कृति को समकालीन विमर्श से जोड़ना है, जिसमें संवाद सत्रों के साथ-साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और कवि सम्मेलन भी आकर्षण का केंद्र रहेंगे। महोत्सव का औपचारिक शंखनाद 12 मार्च को अपराह्न 3 बजे एम्फीथिएटर में उद्घाटन सत्र के साथ होगा। उद्घाटन के बाद पहले दिन ‘21वीं सदी में नालंदा का महत्व’ विषय पर डॉ. कविता शर्मा और डॉ. आनंद सिंह जैसे विद्वान अपने विचार रखेंगे। इसके तुरंत बाद प्राचीन भारत की बहस और संवाद परंपरा पर केंद्रित सत्र में वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी और लेखिका क्षमा कौल हिस्सा लेंगी। सुरीली संगीत प्रस्तुति दी जाएगी पहले दिन की शाम प्रसिद्ध कलाकार रंजना झा की सुरीली संगीत प्रस्तुति के साथ संपन्न होगी, जो आगंतुकों को बिहार की लोक संस्कृति से रूबरू कराएगी। कार्यक्रम के दूसरे दिन, 13 मार्च को चर्चा का केंद्र प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा और क्षेत्रीय साहित्य का वैश्विक संदर्भ रहेगा। इस दौरान विकास वैभव, गुरु प्रकाश पासवान और नीलोत्पल मृणाल जैसे वक्ता साहित्य और समाज के अंतर्संबंधों पर प्रकाश डालेंगे। विशेष रूप से ‘बिहार की पहचान निर्माण में मीडिया की भूमिका’ जैसे समसामयिक विषयों पर भी सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिसमें पत्रकारिता जगत के विशेषज्ञ अपने अनुभव साझा करेंगे। यह दिन पूरी तरह से अकादमिक विमर्श और सामाजिक सरोकारों को समर्पित होगा। सिनेमा और तकनीक का संगम दिखेगा महोत्सव के अंतिम दिन, 14 मार्च को सिनेमा और तकनीक का संगम देखने को मिलेगा। दिग्गज अभिनेता अमोल पालेकर एक विशेष सत्र में सिनेमाई अनुभवों को साझा करेंगे, वहीं ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और नालंदा की शिक्षण परंपरा’ जैसे आधुनिक विषयों पर भी गंभीर चर्चा होगी। आयोजन का समापन एक भव्य कवि सम्मेलन के साथ होगा, जिसमें संजीव मुकेश और प्रतीक गुप्ता सहित कई चर्चित कवि अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करेंगे। आयोजकों ने इस बौद्धिक महाकुंभ में व्यापक जन-भागीदारी की अपील की है। नालंदा की ऐतिहासिक ज्ञान परंपरा को वैश्विक पटल पर पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से आने वाले 12 से 14 मार्च तक राजगीर अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में ‘नालंदा अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव 2026’ का आयोजन किया जा रहा है। तीन दिनों तक चलने वाले इस भव्य समागम में देश-विदेश के प्रख्यात लेखक, विद्वान, पत्रकार और सांस्कृतिक हस्तियां जुटेंगी, जो साहित्य, इतिहास, दर्शन और आधुनिक तकनीक जैसे विविध विषयों पर मंथन करेंगे। आयोजन का मुख्य आकर्षण प्राचीन भारतीय बौद्धिक संस्कृति को समकालीन विमर्श से जोड़ना है, जिसमें संवाद सत्रों के साथ-साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और कवि सम्मेलन भी आकर्षण का केंद्र रहेंगे। महोत्सव का औपचारिक शंखनाद 12 मार्च को अपराह्न 3 बजे एम्फीथिएटर में उद्घाटन सत्र के साथ होगा। उद्घाटन के बाद पहले दिन ‘21वीं सदी में नालंदा का महत्व’ विषय पर डॉ. कविता शर्मा और डॉ. आनंद सिंह जैसे विद्वान अपने विचार रखेंगे। इसके तुरंत बाद प्राचीन भारत की बहस और संवाद परंपरा पर केंद्रित सत्र में वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी और लेखिका क्षमा कौल हिस्सा लेंगी। सुरीली संगीत प्रस्तुति दी जाएगी पहले दिन की शाम प्रसिद्ध कलाकार रंजना झा की सुरीली संगीत प्रस्तुति के साथ संपन्न होगी, जो आगंतुकों को बिहार की लोक संस्कृति से रूबरू कराएगी। कार्यक्रम के दूसरे दिन, 13 मार्च को चर्चा का केंद्र प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा और क्षेत्रीय साहित्य का वैश्विक संदर्भ रहेगा। इस दौरान विकास वैभव, गुरु प्रकाश पासवान और नीलोत्पल मृणाल जैसे वक्ता साहित्य और समाज के अंतर्संबंधों पर प्रकाश डालेंगे। विशेष रूप से ‘बिहार की पहचान निर्माण में मीडिया की भूमिका’ जैसे समसामयिक विषयों पर भी सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिसमें पत्रकारिता जगत के विशेषज्ञ अपने अनुभव साझा करेंगे। यह दिन पूरी तरह से अकादमिक विमर्श और सामाजिक सरोकारों को समर्पित होगा। सिनेमा और तकनीक का संगम दिखेगा महोत्सव के अंतिम दिन, 14 मार्च को सिनेमा और तकनीक का संगम देखने को मिलेगा। दिग्गज अभिनेता अमोल पालेकर एक विशेष सत्र में सिनेमाई अनुभवों को साझा करेंगे, वहीं ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और नालंदा की शिक्षण परंपरा’ जैसे आधुनिक विषयों पर भी गंभीर चर्चा होगी। आयोजन का समापन एक भव्य कवि सम्मेलन के साथ होगा, जिसमें संजीव मुकेश और प्रतीक गुप्ता सहित कई चर्चित कवि अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करेंगे। आयोजकों ने इस बौद्धिक महाकुंभ में व्यापक जन-भागीदारी की अपील की है।


