विक्रमशिला सेतु हादसा, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर सस्पेंड:16 जिलों की कनेक्टिविटी पर असर; नाव के सहारे लोग, क्षमता से अधिक यात्री को बिठाया जा रहा

विक्रमशिला सेतु हादसा, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर सस्पेंड:16 जिलों की कनेक्टिविटी पर असर; नाव के सहारे लोग, क्षमता से अधिक यात्री को बिठाया जा रहा

भागलपुर में विक्रमशिला सेतु का 34 मीटर हिस्सा रविवार देर रात गिर गया। गनीमत रही कि इस हादसे में किसी की जान नहीं गई। प्रशासन ने पहले ही ट्रैफिक रोक दिया था, जिससे बड़ा हादसा टल गया। पुल गिरने से सीमांचल समेत करीब 16 जिलों की कनेक्टिविटी प्रभावित हुई है। रोजाना इस पुलिस से करीब 1 लाख लोगों का आना जाना है। लापरवाही को लेकर पथ निर्माण विभाग ने एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को सस्पेंड किया है। पटना में आयोजित प्रेस वार्ता में राज्य पुल निगम लिमिटेड के अध्यक्ष डॉ चंद्रशेखर ने बताया कि मुख्यमंत्री ने रक्षा मंत्री से बात की है। पुल मरम्मत के काम में आर्मी की मदद की कोशिश की जा रही है। स्थानीय लोगों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जी रही है। वहीं, पुल गिरने से लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नवगछिया, बिहपुर, पूर्णिया, कटिहार, सहरसा, खगड़िया जाने वाले नाव के सहारे इस पार से उस पार जा रहे हैं। लोगों के लिए अब 2 वैकल्पिक रास्ते हैं। पानी के जहाज, नाव या मुंगेर होकर जा सकते हैं। ऐसे में बरारी घाट पर लोगों की भीड़ बढ़ गई है। नाव में क्षमता से अधिक लोगों को बिठाया जा रहा है। दोषी पर कार्रवाई की मांग नाव से सफर कर रहे प्रकाश ने बताया कि घाट किनारे नाव से उतरकर पैदल ही 5 किलोमीटर तक जाना पड़ेगा। समय से मेंटेंनेंस नहीं होने के कारण पुल गिरा है। लापरवाही के चलते ही हादसा हुआ है। इसके लिए जो भी दोषी है, उस पर कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, सूरज ने बताया कि 13 मई से बहन का एग्जाम है। एडमिट कार्ड लाने के नवगछिया जाना है। पुल गिरने से परेशानी बढ़ गई है। नाव में भी क्षमता से अधिक लोगों को बिठाने जा रहा है। प्रशासन को इस पर कार्रवाई करना चाहिए। मेंटेंनेंस नहीं होने के कारण ही पुल गिरा है। सीमांचल समेत 16 जिलों को भागलपुर से जोड़ता है ये पुल विक्रमशिला सेतु पर हर दिन करीब एक लाख लोगों की आवाजाही होती है। करीब 50 हजार से अधिक छोटे-बड़े वाहन इस पुल से गुजरते हैं। सीमांचल समेत 16 जिलों को यह सेतु भागलपुर से जोड़ता है। इसका निर्माण तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के कार्यकाल में कराया गया था। पुल में लगातार जॉइंट और एक्सपेंशन गैप की समस्या को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। आखिरी बार 2020 में पुल की मरम्मत कराई गई थी। कुछ दिन पहले ही वॉल वायरिंग क्षतिग्रस्त होने की खबरें सामने आई थीं। हालांकि प्रशासन ने उस समय इसे खारिज करते हुए कहा था कि पुल पर किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं है। भागलपुर में विक्रमशिला सेतु का 34 मीटर हिस्सा रविवार देर रात गिर गया। गनीमत रही कि इस हादसे में किसी की जान नहीं गई। प्रशासन ने पहले ही ट्रैफिक रोक दिया था, जिससे बड़ा हादसा टल गया। पुल गिरने से सीमांचल समेत करीब 16 जिलों की कनेक्टिविटी प्रभावित हुई है। रोजाना इस पुलिस से करीब 1 लाख लोगों का आना जाना है। लापरवाही को लेकर पथ निर्माण विभाग ने एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को सस्पेंड किया है। पटना में आयोजित प्रेस वार्ता में राज्य पुल निगम लिमिटेड के अध्यक्ष डॉ चंद्रशेखर ने बताया कि मुख्यमंत्री ने रक्षा मंत्री से बात की है। पुल मरम्मत के काम में आर्मी की मदद की कोशिश की जा रही है। स्थानीय लोगों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जी रही है। वहीं, पुल गिरने से लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नवगछिया, बिहपुर, पूर्णिया, कटिहार, सहरसा, खगड़िया जाने वाले नाव के सहारे इस पार से उस पार जा रहे हैं। लोगों के लिए अब 2 वैकल्पिक रास्ते हैं। पानी के जहाज, नाव या मुंगेर होकर जा सकते हैं। ऐसे में बरारी घाट पर लोगों की भीड़ बढ़ गई है। नाव में क्षमता से अधिक लोगों को बिठाया जा रहा है। दोषी पर कार्रवाई की मांग नाव से सफर कर रहे प्रकाश ने बताया कि घाट किनारे नाव से उतरकर पैदल ही 5 किलोमीटर तक जाना पड़ेगा। समय से मेंटेंनेंस नहीं होने के कारण पुल गिरा है। लापरवाही के चलते ही हादसा हुआ है। इसके लिए जो भी दोषी है, उस पर कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, सूरज ने बताया कि 13 मई से बहन का एग्जाम है। एडमिट कार्ड लाने के नवगछिया जाना है। पुल गिरने से परेशानी बढ़ गई है। नाव में भी क्षमता से अधिक लोगों को बिठाने जा रहा है। प्रशासन को इस पर कार्रवाई करना चाहिए। मेंटेंनेंस नहीं होने के कारण ही पुल गिरा है। सीमांचल समेत 16 जिलों को भागलपुर से जोड़ता है ये पुल विक्रमशिला सेतु पर हर दिन करीब एक लाख लोगों की आवाजाही होती है। करीब 50 हजार से अधिक छोटे-बड़े वाहन इस पुल से गुजरते हैं। सीमांचल समेत 16 जिलों को यह सेतु भागलपुर से जोड़ता है। इसका निर्माण तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के कार्यकाल में कराया गया था। पुल में लगातार जॉइंट और एक्सपेंशन गैप की समस्या को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। आखिरी बार 2020 में पुल की मरम्मत कराई गई थी। कुछ दिन पहले ही वॉल वायरिंग क्षतिग्रस्त होने की खबरें सामने आई थीं। हालांकि प्रशासन ने उस समय इसे खारिज करते हुए कहा था कि पुल पर किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं है।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *