11 मार्च को राष्ट्रीय आय सह मेधा स्कॉलरशिप एग्जाम:नालंदा जिले से 3,088 छात्र होंगे शामिल, गड़बड़ी करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी

11 मार्च को राष्ट्रीय आय सह मेधा स्कॉलरशिप एग्जाम:नालंदा जिले से 3,088 छात्र होंगे शामिल, गड़बड़ी करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी

प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले आर्थिक रूप से कमजोर मेधावी छात्रों के भविष्य को संवारने वाली राष्ट्रीय आय सह मेधा छात्रवृत्ति परीक्षा आगामी 11 मार्च को आयोजित की जाएगी। शिक्षा विभाग ने परीक्षा को लेकर अपनी तैयारियां पूरी कर ली है। एग्जाम के ठीक दो दिन बाद यानी 13 मार्च को आधिकारिक आंसर-शीट भी जारी कर दी जाएगी। इस प्रतिष्ठित परीक्षा में इस बार परीक्षार्थियों की संख्या में भारी उछाल देखने को मिला है। पूरे बिहार के 38 जिलों में कुल 88 हजार 699 अभ्यर्थी अपनी मेधा का प्रदर्शन करेंगे, जिनके लिए 194 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। अकेले नालंदा जिले से 3,088 और शेखपुरा से 667 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल होंगे, जिसके लिए नालंदा में छह और शेखपुरा में दो केंद्र बनाए गए हैं। परीक्षा को शांतिपूर्ण और कदाचारमुक्त संपन्न कराने के लिए शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेन्दर ने सभी जिलाधिकारियों, पुलिस अधीक्षकों और जिला शिक्षा पदाधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या गड़बड़ी होने पर सीधे तौर पर केंद्राधीक्षक को जिम्मेदार ठहराया जाएगा। जिले के डीएम पूरी व्यवस्था पर पैनी नजर रखेंगे, जबकि डीईओ को परीक्षा नियंत्रक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस छात्रवृत्ति योजना का मुख्य उद्देश्य आर्थिक तंगी के कारण आठवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ने वाले छात्रों को प्रोत्साहित करना है। चयन परीक्षा में सफल होने वाले छात्रों को कक्षा नौवीं से बारहवीं तक अपनी शिक्षा जारी रखने के लिए सालाना 12 हजार रुपये का वजीफा दिया जाएगा। छात्रों को अंकों में पांच प्रतिशत चयन प्रक्रिया के नियमों के अनुसार, इस परीक्षा में वही छात्र शामिल हो रहे हैं। जिनके अभिभावकों की वार्षिक आय साढ़े तीन लाख रुपये से कम है और जिन्होंने सातवीं कक्षा में कम से कम 55 फीसदी अंक प्राप्त किए हैं। अनुसूचित जाति और जनजाति के छात्रों को अंकों में पांच प्रतिशत की छूट दी गई है। 11 मार्च को होने वाली यह परीक्षा दो पालियों में आयोजित की जाएगी, जिसमें पहली पाली में मानसिक योग्यता परीक्षा (मैट) और दूसरी पाली में शैक्षिक योग्यता परीक्षा (सैट) ली जाएगी। सामान्य अभ्यर्थियों के मुकाबले दिव्यांग परीक्षार्थियों को 30 मिनट का अतिरिक्त समय प्रदान किया जाएगा। बेगूसराय ने पटना को पीछे छोड़ दिया है इस वर्ष के आंकड़ों पर गौर करें तो परीक्षार्थियों की संख्या पिछले साल के मुकाबले डेढ़ गुना से भी अधिक बढ़ी है। पिछले वर्ष जहाँ पूरे सूबे में 50 हजार के करीब अभ्यर्थी थे, वहीं इस बार यह आंकड़ा 88 हजार को पार कर गया है। दिलचस्प बात यह है कि छात्रसंख्या के मामले में बेगूसराय ने पटना को पीछे छोड़ दिया है। बेगूसराय से सर्वाधिक 5,436 परीक्षार्थी शामिल हो रहे हैं, जबकि अरवल जिले में सबसे कम 528 छात्र परीक्षा देंगे। नालंदा के परीक्षार्थियों के लिए शहर के नेशनल हाईस्कूल, सोगरा हाईस्कूल, एसएस गर्ल्स हाईस्कूल समेत अन्य प्रमुख शिक्षण संस्थानों में केंद्र बनाए गए हैं। प्रवेश पत्र 8 से 11 मार्च तक डाउनलोड किए जा सकेंगे और जून महीने में फाइनल रिजल्ट आने की संभावना है। प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले आर्थिक रूप से कमजोर मेधावी छात्रों के भविष्य को संवारने वाली राष्ट्रीय आय सह मेधा छात्रवृत्ति परीक्षा आगामी 11 मार्च को आयोजित की जाएगी। शिक्षा विभाग ने परीक्षा को लेकर अपनी तैयारियां पूरी कर ली है। एग्जाम के ठीक दो दिन बाद यानी 13 मार्च को आधिकारिक आंसर-शीट भी जारी कर दी जाएगी। इस प्रतिष्ठित परीक्षा में इस बार परीक्षार्थियों की संख्या में भारी उछाल देखने को मिला है। पूरे बिहार के 38 जिलों में कुल 88 हजार 699 अभ्यर्थी अपनी मेधा का प्रदर्शन करेंगे, जिनके लिए 194 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। अकेले नालंदा जिले से 3,088 और शेखपुरा से 667 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल होंगे, जिसके लिए नालंदा में छह और शेखपुरा में दो केंद्र बनाए गए हैं। परीक्षा को शांतिपूर्ण और कदाचारमुक्त संपन्न कराने के लिए शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेन्दर ने सभी जिलाधिकारियों, पुलिस अधीक्षकों और जिला शिक्षा पदाधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या गड़बड़ी होने पर सीधे तौर पर केंद्राधीक्षक को जिम्मेदार ठहराया जाएगा। जिले के डीएम पूरी व्यवस्था पर पैनी नजर रखेंगे, जबकि डीईओ को परीक्षा नियंत्रक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस छात्रवृत्ति योजना का मुख्य उद्देश्य आर्थिक तंगी के कारण आठवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ने वाले छात्रों को प्रोत्साहित करना है। चयन परीक्षा में सफल होने वाले छात्रों को कक्षा नौवीं से बारहवीं तक अपनी शिक्षा जारी रखने के लिए सालाना 12 हजार रुपये का वजीफा दिया जाएगा। छात्रों को अंकों में पांच प्रतिशत चयन प्रक्रिया के नियमों के अनुसार, इस परीक्षा में वही छात्र शामिल हो रहे हैं। जिनके अभिभावकों की वार्षिक आय साढ़े तीन लाख रुपये से कम है और जिन्होंने सातवीं कक्षा में कम से कम 55 फीसदी अंक प्राप्त किए हैं। अनुसूचित जाति और जनजाति के छात्रों को अंकों में पांच प्रतिशत की छूट दी गई है। 11 मार्च को होने वाली यह परीक्षा दो पालियों में आयोजित की जाएगी, जिसमें पहली पाली में मानसिक योग्यता परीक्षा (मैट) और दूसरी पाली में शैक्षिक योग्यता परीक्षा (सैट) ली जाएगी। सामान्य अभ्यर्थियों के मुकाबले दिव्यांग परीक्षार्थियों को 30 मिनट का अतिरिक्त समय प्रदान किया जाएगा। बेगूसराय ने पटना को पीछे छोड़ दिया है इस वर्ष के आंकड़ों पर गौर करें तो परीक्षार्थियों की संख्या पिछले साल के मुकाबले डेढ़ गुना से भी अधिक बढ़ी है। पिछले वर्ष जहाँ पूरे सूबे में 50 हजार के करीब अभ्यर्थी थे, वहीं इस बार यह आंकड़ा 88 हजार को पार कर गया है। दिलचस्प बात यह है कि छात्रसंख्या के मामले में बेगूसराय ने पटना को पीछे छोड़ दिया है। बेगूसराय से सर्वाधिक 5,436 परीक्षार्थी शामिल हो रहे हैं, जबकि अरवल जिले में सबसे कम 528 छात्र परीक्षा देंगे। नालंदा के परीक्षार्थियों के लिए शहर के नेशनल हाईस्कूल, सोगरा हाईस्कूल, एसएस गर्ल्स हाईस्कूल समेत अन्य प्रमुख शिक्षण संस्थानों में केंद्र बनाए गए हैं। प्रवेश पत्र 8 से 11 मार्च तक डाउनलोड किए जा सकेंगे और जून महीने में फाइनल रिजल्ट आने की संभावना है।  

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