हत्या मामले में 5 दोषी को उम्रकैद की सजा:मुजफ्फरपुर में कोर्ट ने 35 साल बाद सुनाया फैसला, बहन को पेड़ से बांधकर भाई की हत्या हुई थी

हत्या मामले में 5 दोषी को उम्रकैद की सजा:मुजफ्फरपुर में कोर्ट ने 35 साल बाद सुनाया फैसला, बहन को पेड़ से बांधकर भाई की हत्या हुई थी

मुजफ्फरपुर में 35 साल पुराने एक हत्याकांड में अदालत ने फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे-5) आलोक कुमार पांडेय की अदालत ने अहियापुर थाना क्षेत्र से जुड़े इस मामले में पांच दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह घटना साल 1991 की है। जमीनी विवाद के कारण शिवयहां चतुर्भुज गांव में उमा राय नाम के व्यक्ति की हत्या कर दी गई थी। आरोपियों ने उमा राय की बहन बसंती देवी को घर के पास एक पेड़ से बांध दिया था। बसंती देवी के सामने ही हमलावरों ने उनके भाई उमा राय को गोली मारकर हत्या कर दी थी। न्याय मिलने में साढ़े तीन दशक का लंबा समय लगा लोक अभियोजक सुनील कुमार पांडेय ने बताया कि इस मामले में न्याय मिलने में साढ़े तीन दशक का लंबा समय लगा। इसके पीछे कई तकनीकी कारण थे। घटना के बाद उमा राय का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर का निधन हो चुका था, जिससे मेडिकल सबूत प्रस्तुत करने में कठिनाई हुई। इसके अलावा, केस के जांच से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और कागजात भी समय के साथ उपलब्ध नहीं हो पा रहे थे। इन प्रशासनिक और तकनीकी जटिलताओं के कारण यह मुकदमा साल तक लंबित रहा। अदालत का कड़ा रुख और सजा का ऐलान अदालत ने गवाहों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों को गंभीरता से लेते हुए पांचों आरोपियों को हत्या सहित अन्य संबंधित धाराओं में दोषी पाया। सजा पाने वाले दोषियों में अहियापुर के शिवयहां चर्तुभुज निवासी बैद्यनाथ राय (77), महंथ राय (50), रामचंद्र पासवान (60), सहदेव राय (50 ) और मीनापुर के मोहनपुर निवासी रामबालक राय (70 ) शामिल हैं। उम्रकैद की सजा के साथ-साथ माननीय अदालत ने सभी पांचों दोषियों पर 50-50 हजार रुपये का अर्थदंड (जुर्माना) भी लगाया है। जुर्माने की राशि जमा न करने पर दोषियों को अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। आज मिली कलेजे को ठंडक बसंती देवी के बेटे मोहन राय ने भावुक होते हुए कहा कि उन्होंने अपनी मां की आंखों में वह खौफ और दर्द सालों तक देखा है। उन्होंने कहा, “मेरी मां को पेड़ से बांधकर उनके सगे भाई की हत्या की गई थी। वह दृश्य हमारे परिवार के लिए किसी डरावने सपने जैसा था। 35 सालों तक हमने अदालत की चौखट पर न्याय की आस में चक्कर काटे। आज जब फैसला आया है, तो ऐसा महसूस हो रहा है कि वाकई सत्य की जीत हुई है। देर से ही सही, मेरे मामा को इंसाफ मिला।” मुजफ्फरपुर में 35 साल पुराने एक हत्याकांड में अदालत ने फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे-5) आलोक कुमार पांडेय की अदालत ने अहियापुर थाना क्षेत्र से जुड़े इस मामले में पांच दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह घटना साल 1991 की है। जमीनी विवाद के कारण शिवयहां चतुर्भुज गांव में उमा राय नाम के व्यक्ति की हत्या कर दी गई थी। आरोपियों ने उमा राय की बहन बसंती देवी को घर के पास एक पेड़ से बांध दिया था। बसंती देवी के सामने ही हमलावरों ने उनके भाई उमा राय को गोली मारकर हत्या कर दी थी। न्याय मिलने में साढ़े तीन दशक का लंबा समय लगा लोक अभियोजक सुनील कुमार पांडेय ने बताया कि इस मामले में न्याय मिलने में साढ़े तीन दशक का लंबा समय लगा। इसके पीछे कई तकनीकी कारण थे। घटना के बाद उमा राय का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर का निधन हो चुका था, जिससे मेडिकल सबूत प्रस्तुत करने में कठिनाई हुई। इसके अलावा, केस के जांच से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और कागजात भी समय के साथ उपलब्ध नहीं हो पा रहे थे। इन प्रशासनिक और तकनीकी जटिलताओं के कारण यह मुकदमा साल तक लंबित रहा। अदालत का कड़ा रुख और सजा का ऐलान अदालत ने गवाहों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों को गंभीरता से लेते हुए पांचों आरोपियों को हत्या सहित अन्य संबंधित धाराओं में दोषी पाया। सजा पाने वाले दोषियों में अहियापुर के शिवयहां चर्तुभुज निवासी बैद्यनाथ राय (77), महंथ राय (50), रामचंद्र पासवान (60), सहदेव राय (50 ) और मीनापुर के मोहनपुर निवासी रामबालक राय (70 ) शामिल हैं। उम्रकैद की सजा के साथ-साथ माननीय अदालत ने सभी पांचों दोषियों पर 50-50 हजार रुपये का अर्थदंड (जुर्माना) भी लगाया है। जुर्माने की राशि जमा न करने पर दोषियों को अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। आज मिली कलेजे को ठंडक बसंती देवी के बेटे मोहन राय ने भावुक होते हुए कहा कि उन्होंने अपनी मां की आंखों में वह खौफ और दर्द सालों तक देखा है। उन्होंने कहा, “मेरी मां को पेड़ से बांधकर उनके सगे भाई की हत्या की गई थी। वह दृश्य हमारे परिवार के लिए किसी डरावने सपने जैसा था। 35 सालों तक हमने अदालत की चौखट पर न्याय की आस में चक्कर काटे। आज जब फैसला आया है, तो ऐसा महसूस हो रहा है कि वाकई सत्य की जीत हुई है। देर से ही सही, मेरे मामा को इंसाफ मिला।”  

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