शाजापुर में चंद्रग्रहण से मंदिरों के पट बंद:शाम 6:47 बजे बाद खुलेंगे कपाट, साढ़े 12 घंटे का सूतक काल

शाजापुर में चंद्रग्रहण से मंदिरों के पट बंद:शाम 6:47 बजे बाद खुलेंगे कपाट, साढ़े 12 घंटे का सूतक काल

शाजापुर में मंगलवार को साल का पहला चंद्रग्रहण लगा, जिसका व्यापक असर शहर की धार्मिक व्यवस्थाओं पर देखने को मिला। ग्रहण की मान्यताओं का पालन करते हुए शहर के सभी प्रमुख मंदिरों के कपाट सुबह से ही बंद कर दिए गए। इनमें मां राजराजेश्वरी मंदिर, मंगलनाथ महादेव मंदिर और खेड़ापति हनुमान मंदिर जैसे प्रमुख आस्था के केंद्र शामिल रहे। सूतक काल लगने के कारण श्रद्धालुओं को बाहर से ही दर्शन करने पड़े। साढ़े 12 घंटे का रहा सूतक काल पंडित सुनील नागर के मुताबिक, इस चंद्रग्रहण का सूतक काल काफी लंबा रहा। सुबह 6:20 बजे से ही सूतक शुरू हो गया था, जो शाम को 6:47 बजे ग्रहण खत्म होने तक जारी रहा। फाल्गुन पूर्णिमा के दिन पूर्ण चंद्रग्रहण पड़ने की वजह से इसका धार्मिक महत्व काफी बढ़ गया। इस दौरान मंदिरों में पूजा-पाठ और दर्शन पूरी तरह बंद रहे और भगवान की प्रतिमाओं को स्पर्श करना भी वर्जित रहा। सावधानी और दान-पुण्य पर जोर ग्रहण काल के दौरान लोगों को कई तरह की सावधानियां बरतने की सलाह दी गई थी। इस समय में तुलसी और पीपल जैसे पौधों को न छूने, विवादों से बचने और नुकीली चीजों का इस्तेमाल न करने की बात कही गई। खासतौर पर गर्भवती महिलाओं को अपनी सेहत और नियमों का ध्यान रखने के निर्देश दिए गए। पंडितों के अनुसार, इस समय में घर पर रहकर ही मंत्र जाप और भगवान का ध्यान करना फलदायी माना जाता है। शुद्धिकरण के बाद खुलेंगे पट ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिरों में साफ-सफाई और शुद्धिकरण का दौर शुरू होगा। पूरे मंदिर परिसर को धोकर गंगाजल का छिड़काव किया जाएगा, जिसके बाद ही नियमित आरती और दर्शन शुरू हो सकेंगे। जानकारों का कहना है कि ग्रहण खत्म होने के बाद लोगों को स्नान कर दान-पुण्य करना चाहिए, इससे ग्रहण के नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं। शाम को मंदिर खुलने के बाद एक बार फिर भक्तों की भीड़ उमड़ने की उम्मीद है।

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