खगड़िया नगर परिषद की सभापति अर्चना कुमारी ने 15 लाख रुपए से कम लागत वाली योजनाओं के लिए अनिवार्य ई-टेंडर प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने इस निर्णय को जमीनी स्तर पर विकास कार्यों की गति को बाधित करने वाला बताया। सभापति के अनुसार, पारदर्शिता के साथ-साथ व्यावहारिकता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।नगर सभापति ने कहा कि नगर परिषद सीधे आम नागरिकों से जुड़ा संस्थान है, जहां प्रतिदिन छोटी लेकिन बेहद आवश्यक समस्याएं सामने आती हैं। इन समस्याओं का समाधान सीमित राशि और त्वरित निर्णय से ही संभव होता है। गली-सड़क निर्माण, नाला ढक्कन, जलनिकासी और क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत जैसे कार्यों के लिए लंबी ई-टेंडर प्रक्रिया अपनाने से विकास कार्यों में अनावश्यक देरी होगी, जिससे जनता को सीधी परेशानी झेलनी पड़ेगी। लंबी प्रक्रिया के कारण कार्य होंगे प्रभावित उन्होंने स्पष्ट किया कि एक-दो लाख रुपये जैसे छोटे कार्यों के लिए भी निविदा प्रकाशन, तकनीकी स्वीकृति, निविदा अवधि, मूल्यांकन और प्रशासनिक स्वीकृति जैसे कई चरणों से गुजरना पड़ता है। इस लंबी प्रक्रिया के कारण तात्कालिक समाधान वाले कार्य प्रभावित होंगे और कई जरूरी योजनाएं केवल कागजों में ही अटक कर रह जाएंगी। अर्चना कुमारी ने इस पर भी सवाल उठाया कि विधायक निधि, सांसद निधि और जिला परिषद की कई योजनाएं विभागीय स्तर पर सीधे संचालित होती हैं। ऐसे में केवल नगर निकायों के लिए इतनी सख्त और जटिल प्रक्रिया लागू करना भेदभावपूर्ण प्रतीत होता है। उन्होंने सभी संस्थाओं के लिए समान, न्यायसंगत और संतुलित नीति की आवश्यकता पर जोर दिया।सभापति ने चेतावनी दी कि बरसात के मौसम में जलनिकासी, नाला ढक्कन और गली-सड़कों की तत्काल मरम्मत न होने पर जलजमाव, दुर्घटनाएं और आवागमन बाधित होने जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इसका सीधा असर आम लोगों के स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर पड़ेगा। सरकार से पुनर्विचार की अपील उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि पारदर्शिता बनाए रखते हुए छोटी योजनाओं के लिए सरल, त्वरित और व्यावहारिक प्रक्रिया तय की जाए। नगर परिषद गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं कर रही है, लेकिन ऐसी व्यवस्था जरूरी है जिससे छोटे-छोटे जनहितकारी कार्य समय पर पूरे हो सकें। नगर सभापति ने कहा कि नगर निकाय विकास की सबसे निचली और जनता के सबसे करीब की इकाई है। इसलिए उनकी कार्यप्रणाली को लचीला और व्यावहारिक बनाए रखना समय की मांग है, ताकि आम नागरिकों की रोजमर्रा की समस्याओं का समाधान बिना देरी के किया जा सके। खगड़िया नगर परिषद की सभापति अर्चना कुमारी ने 15 लाख रुपए से कम लागत वाली योजनाओं के लिए अनिवार्य ई-टेंडर प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने इस निर्णय को जमीनी स्तर पर विकास कार्यों की गति को बाधित करने वाला बताया। सभापति के अनुसार, पारदर्शिता के साथ-साथ व्यावहारिकता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।नगर सभापति ने कहा कि नगर परिषद सीधे आम नागरिकों से जुड़ा संस्थान है, जहां प्रतिदिन छोटी लेकिन बेहद आवश्यक समस्याएं सामने आती हैं। इन समस्याओं का समाधान सीमित राशि और त्वरित निर्णय से ही संभव होता है। गली-सड़क निर्माण, नाला ढक्कन, जलनिकासी और क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत जैसे कार्यों के लिए लंबी ई-टेंडर प्रक्रिया अपनाने से विकास कार्यों में अनावश्यक देरी होगी, जिससे जनता को सीधी परेशानी झेलनी पड़ेगी। लंबी प्रक्रिया के कारण कार्य होंगे प्रभावित उन्होंने स्पष्ट किया कि एक-दो लाख रुपये जैसे छोटे कार्यों के लिए भी निविदा प्रकाशन, तकनीकी स्वीकृति, निविदा अवधि, मूल्यांकन और प्रशासनिक स्वीकृति जैसे कई चरणों से गुजरना पड़ता है। इस लंबी प्रक्रिया के कारण तात्कालिक समाधान वाले कार्य प्रभावित होंगे और कई जरूरी योजनाएं केवल कागजों में ही अटक कर रह जाएंगी। अर्चना कुमारी ने इस पर भी सवाल उठाया कि विधायक निधि, सांसद निधि और जिला परिषद की कई योजनाएं विभागीय स्तर पर सीधे संचालित होती हैं। ऐसे में केवल नगर निकायों के लिए इतनी सख्त और जटिल प्रक्रिया लागू करना भेदभावपूर्ण प्रतीत होता है। उन्होंने सभी संस्थाओं के लिए समान, न्यायसंगत और संतुलित नीति की आवश्यकता पर जोर दिया।सभापति ने चेतावनी दी कि बरसात के मौसम में जलनिकासी, नाला ढक्कन और गली-सड़कों की तत्काल मरम्मत न होने पर जलजमाव, दुर्घटनाएं और आवागमन बाधित होने जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इसका सीधा असर आम लोगों के स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर पड़ेगा। सरकार से पुनर्विचार की अपील उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि पारदर्शिता बनाए रखते हुए छोटी योजनाओं के लिए सरल, त्वरित और व्यावहारिक प्रक्रिया तय की जाए। नगर परिषद गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं कर रही है, लेकिन ऐसी व्यवस्था जरूरी है जिससे छोटे-छोटे जनहितकारी कार्य समय पर पूरे हो सकें। नगर सभापति ने कहा कि नगर निकाय विकास की सबसे निचली और जनता के सबसे करीब की इकाई है। इसलिए उनकी कार्यप्रणाली को लचीला और व्यावहारिक बनाए रखना समय की मांग है, ताकि आम नागरिकों की रोजमर्रा की समस्याओं का समाधान बिना देरी के किया जा सके।


