हत्या का मामला:परिजन 6 साल में बच्चे की तलाश में 20 हजार किमी घूमे, अब पड़ोसी ने कहा- हत्या कर घर से 400 मीटर दूर गाड़ा

हत्या का मामला:परिजन 6 साल में बच्चे की तलाश में 20 हजार किमी घूमे, अब पड़ोसी ने कहा- हत्या कर घर से 400 मीटर दूर गाड़ा

छह साल पहले लापता हुए जिस चार साल के बच्चे को ढूंढने के लिए परिजन 20 हजार किमी तक घूमे। मुंबई, दिल्ली एवं भोपाल के साथ नेपाल बार्डर तक के चक्कर लगाते रहे लेकिन परिजनों को क्या पता था कि उनका बच्चा उनके घर से महज 400 मीटर की दूरी पर दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे नीचे मारकर गाड़ दिया गया है। छह साल में एक दिन ऐसा नहीं गया कि परिजनों ने बच्चे को नहीं ढूंढा हो। अंध विश्वास के चक्कर में फंसकर परिजनों ने झाड़ फूंक करने वालों के कहने पर चार बार गांव को भी जिमा दिया। इनके कहने पर आए दिन सत्संग तक कराते रहे। पर बच्चे के जिंदा होने की उनकी आशा तब टूट गई जब पुलिस ने 15 फरवरी को शक के आधार पर एक पड़ोसी को पकड़ कर पूछताछ की और उसने कबूल किया कि उसने बच्चे की हत्या कर शव दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे के नीचे जमीन में गाड़ दिया था। आरोपी की निशानदेही पर पुलिस तीन बार उस स्थान पर खुदाई करवा चुकी लेकिन बच्चे के कोई अवशेष नहीं मिले। घटनाक्रम के अनुसार 16 अगस्त 2020 को बांदीकुई थाना क्षेत्र के ऊनबड़ा गांव की एक ढाणी के पास घर आंगन में खेल रहा चार साल का बच्चा अचानक अपने घर से गायब हो गया था। परिजनों ने इसके अगले दिन ही बांदीकुई पुलिस थाने में रिर्पोट दर्ज कराई। एक महीने तक तो पुलिस परिजनों के साथ बच्चे को ढूंढने में लगी रही। लेकिन इसके बाद पुलिस चुप बैठ गई, लेकिन परिजनों ने तलाश जारी रखी। परिजनों ने बताया कि घटना के पांच महीने तक वे बच्चे को बांदीकुई के आसपास क्षेत्र जयपुर, अलवर, महवा सहित आसपास के गांवों में ढूंढते रहे। लेकिन कोई सुराग नहीं लगा। इसके बाद वे यह सोचकर मुंबई चले गए कि कोई गिरोह बच्चे का अपहरण कर उससे कहीं भीख तो नहीं मंगवा रहे। वर्ष 2021 जुलाई में वे पूरे महीने भर मुंबई में रहे और रेलवे स्टेशन, सार्वाजनिक जगहों पर बच्चे को तालाश किया लेकिन पता नहीं लगा। इसके बाद मार्च 2022 में दिल्ली में भी गए और यहां अलग-अलग जगह बच्चे को ढूंढा लेकिन पता नहीं चल सका। किसी ने कहा कि गिरोह के लोग बच्चे को यूपी ले जा सकते है। इस पर परिजन आगरा, लखनऊ, कानपुर में भी गए। वर्ष 2024 मार्च में भोपाल में किसी बच्चे का शव मिला था। इसकी जानकारी स्थानीय पुलिस को मिलने पर यहां से परिजन भोपाल गए और डीएनए टेस्ट करवाया। लेकिन वह बच्चा उनका नहीं था। चार साल में चार बार जीमण किए
बच्चे की तलाश में परिजन इस कदर खो चुके थे कि उन्हें अंधविश्वास की बातों में उलझना पड़ गया। उन्होंने बताया कि इन छह सालों में वे कई झाड़ फूंक करने वाले के पास गए। हमेशा वे यही कहते रहे कि उनका बच्चा जिंदा एवं सुरक्षित है। जल्दी ही मिल जाएगा। इनके कहने पर वे फिर से मुंबई, दिल्ली, नागपुर, हरियाणा तक गए। लेकिन बच्चा नहीं मिला। इसके बाद भी उन्होंने ऐसे लोगों पर से विश्वास नहीं हटाया। कुछ ने तो इतना डरा दिया कि तुम्हारे परिवार से माता नाराज है उनको मनाने के लिए पूरे गांव का जीमण करो। इस पर वर्ष 2021 से 24 के बीच चार बार गांव का जीमणा तक कर दिया। लेकिन बच्चा नहीं मिला। इस वर्ष फरवरी माह की शुरुआत में भी वे बच्चे की तलाश में एक भोपा के पास गए। जिस पर भोपा ने उन्हें आश्वस्त किया था कि आपका बच्चा जिंदा व सुरक्षित है। जल्दी ही मिल जाएगा।

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