चारधाम यात्रियों को व्हाट्एप से मिलेगी जाम और आपातकालीन सूचनाएं, भीड़ प्रबंधन होगा मजबूत

चारधाम यात्रियों को व्हाट्एप से मिलेगी जाम और आपातकालीन सूचनाएं, भीड़ प्रबंधन होगा मजबूत

Chardham Yatra 2026 : चारधाम यात्रा की तैयारियां जोरशोर से चल रही हैं।   बता दें कि उत्तराखंड में नवंबर में चारधाम यात्रा शीतकाल के लिए बंद हो गई थी। चार धामों के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए थे। अब 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया पर गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा शुरू हो जाएगी। 22 अप्रैल को केदारनाथ धाम जबकि 23 अप्रैल को बदरीनाथ धाम के कपाट खुलेंगे। उसके साथ ही उत्तराखंड में चारधाम यात्रा पूर्ण रूप से शुरू हो जाएगी। शासन स्तर से चारधाम यात्रा  की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।  मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने गुरुवार को यात्रा तैयारियों की समीक्षा की। निर्देश दिए गए कि जाम, भीड़ समेत हर आकस्मिक स्थिति की सूचना यात्रियों को व्हाट्सऐप पर तुरंत दी जाए। उन्होंने एक सप्ताह में इसकी प्रगति रिपोर्ट भी मांगी है। उन्होंने कहा कि डीएम चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी स्थानीय स्तर पर सभी विभागों, एजेंसियों, स्टेक होल्डर्स के साथ समन्वय स्थापित करें। व्यवस्थाओं को चुस्त-दुरुस्त बनाएं। पिछले सालों के अनुभवों, चुनौतियों की समीक्षा की जाए। भीड़ प्रबंधन को मजबूत और व्यावहारिक प्लान तैयार किया जाए।

क्यूआर कोड से मिलेगी जानकारी

चारधाम यात्रा की तैयारी बैठक में मुख्य सचिव ने कहा कि  प्रमुख स्थलों पर क्यूआर कोड अंकित किए जाएं, जिससे यात्रियों को संबंधित स्थान समेत आसपास की महत्वपूर्ण जानकारी मिल सके। उन्होंने यात्रा के लिए एसओपी जारी करने के निर्देश दिए। साथ ही यात्रा मार्ग पर पशुओं का पंजीकरण सुनिश्चित करने को कहा। कहा कि यात्रा की तैयारियों में किसी भी प्रकार की चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

घोड़े-खच्चरों का पंजीकरण शुरू

चारधाम यात्रा की तैयारी तेज हो गई है। 22 अप्रैल को केदारनाथ धाम के कपाट खुलेंगे। इसी को देखते हुए यात्रा से पहले घोड़े-खच्चरों के पंजीकरण शुरू हो गया है। पशुपालन विभाग ने 26 से 28 फरवरी तक छह स्थानों के लिए पहले चरण के घोड़ा-खच्चरों के पंजीकरण को लेकर रोस्टर जारी किया है। होली के बाद दूसरे चरण के लिए रोस्टर जारी होगा। बता दें कि केदारनाथ पैदल मार्ग पर सवारी और सामान ले जाने वाले घोड़ा-खच्चरों के स्वास्थ्य परीक्षण, माइक्रो चिपिंग, टैगिंग, रक्त सैंपलिंग, पशु बीमा के बाद ही पंजीकरण किया जाएगा। प्रशासन पांच हजार घोड़ा खच्चरों के संचालन की अनुमति देगा।

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