कौशल विकास व आजीविका योजना में फर्जीवाड़ा:अभ्यर्थियों के अंगूठों के क्लोन से हाजिरी लगाई, उठाए 1 करोड़ रुपए

कौशल विकास व आजीविका योजना में फर्जीवाड़ा:अभ्यर्थियों के अंगूठों के क्लोन से हाजिरी लगाई, उठाए 1 करोड़ रुपए

इस फोटो में जो अंगूठों के क्लोन दिख रहे हैं, ये उन अभ्यर्थियों के हैं जिन्होंने कौशल विकास और शहरी आजीविका योजना में प्रवेश लिया। एनजीओ के पदाधिकारियों ने फर्जी तरीके से प्रवेश के वक्त ही क्लोन बनवा लिए और बाद में फर्जी उपस्थिति लगाते रहे। इनके बदले सरकार से एक करोड़ रुपए उठा लिए। दैनिक भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में सामने आया कि चित्तौड़गढ़ के एनजीओ वूमन एंड चाइल्ड डेवलपमेंट सेक्टर स्किल एवं चंद्रा ऑर्गेनाइजेशन फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट सोशल एम्पावरमेंट (कोड) ने ट्रेनिंग से पहले ही 100 से ज्यादा अभ्यर्थियों के अंगूठों के क्लोन बनवा लिए। बाद में उन्हें अलग-अलग कोर्स में दिखाकर फर्जी हाजिरी लगाई। ट्रेनर व सदस्यों के नाम से ही फर्जी दस्तावेज बना लिए। इन संस्थाओं के बिलों को नगर परिषद निम्बाहेड़ा व चित्तौड़गढ़ ने भी बिना वेरिफाई पास कर दिया। यह संस्था कई शहरों में ट्रेनिंग दिलाने का काम कर रही है। एनजीओ का कौशल… ट्रेनिंग किए बिना अभ्यर्थियों की हाजिरी दिखाई वुमन एंड चाइल्ड डेवलपमेंट सेक्टर स्किल काउंसिल ने भारत सरकार की समर्थ योजना के तहत एमएसएमई मेरठ के माध्यम से महिला अभ्यर्थियों को सिलाई ट्रेनिंग देकर रोजगार दिलाने का एमओयू किया। जरूरी खानापूर्ति बताकर अभ्यर्थियों के अंगूठों के क्लोन बना लिए। उन्हीं से उपस्थिति लगाते रहे। इससे भी पैसा उठा लिया। दस्तावेजों में भी हेरफेर किया गया। एनजीओ के पदाधिकारियों ने सरकार से विभिन्न प्रोजेक्ट लेकर सिलाई के अलावा कंप्यूटर, फायर फाइटर, सोलर आदि कोर्स में भी प्रशिक्षण दिया। इसमें एनजीओ के नाम बदलने के साथ ही सदस्यों को भी बदलते रहे। पोल्ट्री फार्म के खाते में डलवाए एनजीओ के इन पदाधिकारियों ने विभिन्न ट्रेनिंग कोर्स के नाम पर करीब एक करोड़ रुपए का भुगतान उठाया है। यह पैसा भी अलग-अलग खातों में गया। इसमें से कुछ पैसा तो इन्होंने चित्तौड़ पोल्ट्री फार्म के नाम से भी लिया। निकाय ने भी भुगतान कर दिया। गए बिना हाजिरी : अभ्यर्थी सिलाई ट्रेनिंग करने के लिए अलग-अलग बैच की करीब सौ से ज्यादा अभ्यर्थी हैं, जिनके क्लोन बनाए गए। भास्कर के पास 13 अभ्यर्थियों की बातचीत है, जिनमें उन्होंने स्वीकारा है कि वे कभी-कभी जाती थीं, लेकिन उनकी उपस्थिति जरूर लग जाती थी। “हमारा काम कब का बंद हो गया। जो क्लोन बने हैं, उसका दुरुपयोग भी हमने नहीं किया, करने वाले कोई और ही हैं।”
— अमित शर्मा, एनजीओ संचालक, कोड “मुझे कब अध्यक्ष बनाया और कब इस तरह की ट्रेनिंग दी गई, ये पता ही नहीं है। दस्तावेज फर्जी थे, मैंने एफआईआर कराई है।”
— तेज सिंह, अध्यक्ष, WCDSS

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *