भिवंडी निज़ामपुर नगर निगम चुनाव में भाजपा को करारा झटका लगा, जब उसके बागी नेता नारायण चौधरी कांग्रेस और अन्य प्रतिद्वंद्वी दलों के समर्थन से मेयर चुने गए। धर्मनिरपेक्ष मोर्चा गठबंधन के उम्मीदवार चौधरी ने 90 सदस्यीय निगम में 48 वोट हासिल करके मेयर का पद ग्रहण किया। यह परिणाम भिवंडी निज़ामपुर नगर निगम में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम है, जिसमें कांग्रेस समर्थित गठबंधन ने इस कड़े मुकाबले में भाजपा को मात देने में कामयाबी हासिल की।
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पिछले महीने हुए महाराष्ट्र नगर निगम चुनावों में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला। कांग्रेस ने 30 सीटें, भाजपा ने 22, शिवसेना ने 12, एनसीपी, सपा ने 12, समाजवादी पार्टी ने 6, कोनार्क विकास अघाड़ी ने 4, भिवंडी विकास अघाड़ी ने 3 सीटें जीतीं और 1 निर्दलीय उम्मीदवार निर्वाचित हुआ। भिवंडी नगर निगम में बहुमत के लिए कुल 46 वोटों की आवश्यकता थी, जहां आज मेयर चुनाव हुए। धर्मनिरपेक्ष मोर्चा के उम्मीदवार नारायण चौधरी ने 48 वोट हासिल कर यह पद जीता।
भिवंडी में चुनावी माहौल कैसे बदला
शुरुआत में कांग्रेस और एनसीपी-एसपी को समाजवादी पार्टी के समर्थन से अपने महापौर के चुनाव को लेकर पूरा भरोसा था। हालांकि, समाजवादी पार्टी ने समर्थन देने से इनकार कर दिया और इसके बजाय शिवसेना को समर्थन देने की घोषणा की। इसके जवाब में कांग्रेस और एनसीपी ने महापौर पद के लिए आवश्यक संख्या जुटाने के लिए एक धर्मनिरपेक्ष मोर्चा बनाया। स्थिति में नाटकीय बदलाव तब आया जब नारायण चौधरी के नेतृत्व में 9 भाजपा पार्षदों ने गठबंधन से अलग होकर कांग्रेस-एनसीपी-एसपी गठबंधन का समर्थन करने का फैसला किया।


