रीवा में 19 अगस्त को आई बाढ़ को एक सप्ताह बीत चुका है, लेकिन गायत्री नगर में हालात अब भी सामान्य नहीं हुए हैं। यहां 35 घरों में रहने वाले 200 से अधिक लोग 8 दिन से बाढ़ के पानी के बीच फंसे हुए हैं। पानी की निकासी नहीं होने से बच्चों का स्कूल जाना बंद हो गया है। महिलाएं घरों से बाहर नहीं निकल पा रही हैं। बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए अस्पताल तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। लोगों का कहना है कि बाढ़ का पानी कई दिनों से जमा है, लेकिन स्थायी निकासी की व्यवस्था नहीं हो पाई है। एक महिला ने कहा कि नगर निगम को फोन किया तो वहां से उन्हें धमकी मिली। भास्कर की टीम जब बुधवार को गायत्री नगर में मौके पर पड़ताल के लिए पहुंची। जलभराव की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि टीम के सदस्य कमर से ऊपर तक पानी में डूब गए। कई जगह पानी इतना गहरा था कि सामान्य तरीके से पैदल निकलना संभव नहीं था। स्थानीय लोगों ने बताया कि इसी पानी के बीच वे पिछले कई दिनों से रहने को मजबूर हैं। पहले 3 तस्वीरें देखिए… गंभीर मरीजों को डिप्टी सीएम के निर्देश पर निकाला
गायत्री नगर में जलभराव के बीच चार से पांच महिला-पुरुष गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। अत्यधिक पानी होने के कारण वे इलाज के लिए बाहर नहीं निकल पा रहे थे। इनमें रीना तिवारी फेफड़ों के संक्रमण से पीड़ित हैं, जबकि शुभम सिंह परिहार दुर्घटना के बाद पैरों में तेज दर्द से परेशान हैं। मामले की जानकारी उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल तक पहुंची। उनके निर्देश मिलते ही जिला सेनानी मीनाक्षी चौहान के मार्गदर्शन में पांच सदस्यीय रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। टीम ने करीब 9 लोगों का सफल रेस्क्यू किया और उन्हें इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराने के निर्देश दिए। मीना पांडेय- पहले से बीमारी, अब पानी ने बढ़ाई परेशानी
50 वर्षीय मीना पांडेय ने बताया कि वह अक्सर बीमार रहती हैं। डॉक्टर ने उन्हें इंफेक्शन बताया है। उन्होंने कहा कि बीमारी के कारण पहले से परेशानी रहती थी, लेकिन घर के आसपास लगातार पानी भरा होने से स्थिति और बिगड़ गई है। डॉक्टर को दिखाने, दवा लेने या जरूरी जांच के लिए घर से निकलना मुश्किल है। पानी के बीच से निकलना बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए और भी जोखिम भरा है। परिवार के लोगों को हर बार उनकी तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल तक पहुंचाने की चिंता रहती है। तीन दिन से जला मोटर, बिजली के खंभे से करंट उतरने का आरोप
पूजा मिश्रा ने बताया कि उनके घर का पानी का मोटर तीन दिन से जला हुआ है। मकैनिक को बुलाया तो उसने पानी भरा होने के कारण आने से मना कर दिया। उसका कहना था कि जब तक बाढ़ का पानी नहीं निकलता, वह मोटर सुधारने नहीं आएगा। पूजा ने बताया कि घर के पास बिजली के खंभे से पानी में करंट उतरने की आशंका भी है। इसकी जानकारी देने के बावजूद लाइनमैन मौके पर नहीं पहुंच रहा। उन्होंने कहा कि पानी के बीच बिजली का खतरा अलग बना हुआ है और ऐसे में बच्चों व परिवार के अन्य सदस्यों को बाहर निकालना भी मुश्किल है। उन्होंने बताया कि डिलीवरी की सुविधा भी प्रभावित है। ऑनलाइन सामान मंगाने पर डिलीवरी पार्टनर घर तक नहीं आ पा रहा। वह काफी दूर खड़ा हो जाता है और पानी के कारण सामान लेने के लिए खुद वहां तक जाना पड़ता है। उनका कहना है कि एक सप्ताह से अधिक समय से ऐसी स्थिति में रहने के कारण रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो गया है। टोल फ्री नंबर पर शिकायत, धमकाने का आरोप
खुशबू सिंह परिहार ने कहा कि बाढ़ से बचाव और मदद के लिए नगर निगम और जिला प्रशासन ने टोल फ्री नंबर जारी किए थे। उनका सवाल है कि जब इन नंबरों पर सूचना देने के बाद भी मौके पर कार्रवाई नहीं होती तो इन्हें जारी करने का क्या मतलब है। खुशबू ने कहा कि लोग कई दिनों से पानी में फंसे हैं। ऐसे समय में शिकायत करना और मदद मांगना गलत नहीं है। प्रशासन ने अगर लोगों की सहायता के लिए नंबर जारी किए हैं तो शिकायत मिलने के बाद मौके पर टीम पहुंचनी चाहिए। टैक्स भरने के बावजूद मदद के लिए करना पड़ा इंतजार
दीपिका सिंह ने बताया कि वे नगर निगम की टैक्स पेयर हैं और समय पर टैक्स जमा करती हैं। इसके बावजूद जब बाढ़ में परिवार फंसा तो मदद के लिए कोई नहीं पहुंचा। उन्होंने कहा कि जब उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के दरवाजे पर जाकर अपनी समस्या बताई, तब जाकर रेस्क्यू टीम मौके पर आई। दीपिका ने कहा कि रेस्क्यू से कुछ लोगों को तत्काल राहत जरूर मिली, लेकिन मूल समस्या अभी भी बनी हुई है। पानी कब निकलेगा, इसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं है। नगर निगम की अनुमति से बनाया मकान, फिर भी जलभराव में फंसे
श्रद्धा सिंह ने बताया कि वे वार्ड क्रमांक 10 के निवासी हैं और नगर निगम की अनुमति से मकान बनाया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब लोगों ने नियमों के मुताबिक घर बनाया और नगर निगम को टैक्स भी दिया, तो बाढ़ के बाद इस तरह की स्थिति में उन्हें क्यों छोड़ दिया गया। उन्होंने कहा कि घर में रहने वाले लोगों को कई दिनों से पानी के कारण परेशान होना पड़ रहा है। बाहर निकलने के लिए सुरक्षित रास्ता नहीं है। ट्रक की ट्यूब बनी नाव, पेड़ों से बांधकर पार कर रहे पानी
विवेक तिवारी ने बताया कि पानी से बाहर निकलने के लिए स्थानीय लोगों ने ट्रक के टायर में लगने वाली बड़ी ट्यूब को फुलाकर नाव की तरह इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। ट्यूब को दोनों तरफ पेड़ों के सिरों से बांधकर लोग उसके सहारे पानी पार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कई बार संतुलन बिगड़ने से लोग पानी में गिर भी जाते हैं। मंगलवार को ट्यूब पंचर हो गई थी, जिसके बाद उसे बनवाना पड़ा। विवेक के मुताबिक यह कोई सुरक्षित तरीका नहीं है, लेकिन पानी के बीच फंसे लोगों के सामने फिलहाल यही विकल्प बचा है। 200 से ज्यादा लोगों के सामने रोजमर्रा की जिंदगी का संकट
गायत्री नगर में 35 घरों के 200 से अधिक लोगों के सामने सबसे बड़ी समस्या अब पानी की निकासी है। बच्चों की पढ़ाई रुक गई है, महिलाएं घरों से बाहर नहीं निकल पा रही हैं और बुजुर्गों व बीमार लोगों के लिए अस्पताल पहुंचना मुश्किल है। बिजली से जुड़े खतरे, खराब मोटर और जरूरी सामान की डिलीवरी नहीं होने से परेशानी और बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि 19 अगस्त को आई बाढ़ के बाद एक सप्ताह बीत चुका है। कई जगह पानी कम हुआ, लेकिन गायत्री नगर में अभी भी लोगों को जलभराव के बीच रहना पड़ रहा है। गंभीर मरीजों का रेस्क्यू कर तत्काल राहत तो दी गई, लेकिन अब स्थानीय लोग पानी की स्थायी निकासी की मांग कर रहे हैं। उनका सवाल है कि 170 घंटे बाद भी अगर पानी नहीं निकला तो आखिर गायत्री नगर के इन 35 घरों और 200 से ज्यादा लोगों को इस परेशानी से कब राहत मिलेगी।

