भारत की नौसैनिक विमानन क्षमताओं को एक बड़ा बढ़ावा देते हुए, राफेल मरीन लड़ाकू विमान ने गुरुवार (29 अक्टूबर) को देश के स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत पर सफलतापूर्वक अपनी पहली लैंडिंग पूरी की। अपने पहले ही प्रयास में यह सफल लैंडिंग, भारतीय नौसेना के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इससे नौसेना को अपने विमानवाहक पोत-आधारित युद्ध क्षमताओं को मजबूत करने और अपनी समुद्री हवाई ताकत को अगले स्तर तक ले जाने में मदद मिलेगी। यह उपलब्धि भारतीय नौसेना में ‘राफेल-मरीन’ (Rafale-Marine) को शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। विमान वाहक पोतों (aircraft carriers) से संचालित होने के लिए डिज़ाइन किया गया यह लड़ाकू विमान, भारत की समुद्री हितों की रक्षा करने, हवाई खतरों को रोकने और लंबी दूरी तक सटीक हमले करने की क्षमता को काफी बढ़ा देगा। INS विक्रांत पर इस विमान की सफल लैंडिंग उन चल रहे परीक्षणों में हुई प्रगति को भी दर्शाती है, जो भविष्य में इसे पूरी तरह से ऑपरेशनल (तैनात) करने का मार्ग प्रशस्त करेंगे।
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भारत-फ्रांस राफेल-M समझौता: 63,000 करोड़ रुपये का सौदा
भारत और फ्रांस ने 28 अप्रैल 2025 को एक अंतर-सरकारी समझौते (IGA) पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत लगभग 63,000 करोड़ रुपये की लागत से 26 ‘राफेल-मरीन’ लड़ाकू विमान खरीदे जाएंगे। इस बेड़े में 22 सिंगल-सीट (एक सीट वाले) और 4 ट्विन-सीट (दो सीट वाले) लड़ाकू विमान शामिल होंगे। इस खरीद प्रक्रिया को पहले ही एक महत्वपूर्ण मंजूरी मिल चुकी थी, जब 13 जुलाई 2023 को रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने ‘आवश्यकता की स्वीकृति’ (Acceptance of Necessity – AoN) प्रदान की थी। इस समझौते का उद्देश्य भारतीय नौसेना के विमान वाहक पोतों को उन्नत मल्टीरोल लड़ाकू विमानों से लैस करके उनकी हवाई क्षमताओं को मजबूत करना है, जो कई तरह के युद्ध अभियानों को अंजाम देने में सक्षम हैं।
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राफेल-मरीन को एक दुर्जेय लड़ाकू विमान क्या बनाता है?
राफेल-एम एक दो इंजन वाला, चौथी पीढ़ी से भी उन्नत बहु-भूमिका लड़ाकू विमान है जिसे विमानवाहक पोत आधारित अभियानों के लिए विकसित किया गया है। इसकी गति, उन्नत सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और सटीक हथियारों का संयोजन इसे आधुनिक नौसैनिक युद्ध के लिए एक बहुमुखी मंच बनाता है। यह लड़ाकू विमान लगभग मैक 1.8 की अधिकतम गति प्राप्त कर सकता है और इसकी युद्धक त्रिज्या लगभग 1,000 किलोमीटर है। यह एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड ऐरे (एईएसए) रडार से सुसज्जित है, जो हवाई लक्ष्यों का पता लगाने और उनका पीछा करने की इसकी क्षमता को बढ़ाता है। एक अन्य प्रमुख विशेषता इसका स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली सूट है, जिसे शत्रुतापूर्ण रडार और इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों का पता लगाकर और उनका मुकाबला करके दुश्मन के खतरों से उन्नत सुरक्षा प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। पारंपरिक भूमि-आधारित लड़ाकू विमानों के विपरीत, राफेल-एम को विशेष रूप से विमानवाहक पोत संचालन के लिए अनुकूलित किया गया है। इसमें प्रबलित लैंडिंग गियर, विमानवाहक पोत के डेक पर उतरने के लिए एक अरेस्टोर हुक और विमानवाहक पोतों पर उपलब्ध सीमित स्थान में भंडारण को आसान बनाने के लिए फोल्डिंग पंख हैं। यह विमान उन्नत हथियारों की एक विस्तृत श्रृंखला को भी ले जा सकता है, जिसमें मेटियोर और एमआईसीए हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, स्कैल्प क्रूज मिसाइलें और हैमर सटीक निर्देशित हथियार शामिल हैं।

